मकर संक्रांति भारत के प्रमुख और प्राचीन पर्वों में से एक है, जिसे सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है. यह पर्व धार्मिक ही नहीं, बल्कि खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है. पौष मास में जिस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. आगे इस लेख में जानें इस साल 2026 की मकर संक्रांति की सही तिथि, पंचांग और शुभ मुहूर्त का पूरा विवरण.
मकर संक्रांति धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इसे सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व भी कहा जाता है. इस दिन से सर्दियों का अंत और दिन बड़े होने शुरु हो जाते हैं और मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना अधिक मिलता है. यही कारण है कि तिल, गुड़, अनाज, वस्त्र और कंबल का दान इस दिन विशेष रूप से किया जाता है.
सौर पंचांग से जुड़ा है पर्व
मकर संक्रांति उन चुनिंदा भारतीय त्योहारों में शामिल है, जो सौर पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं. यही कारण है कि यह पर्व हर साल लगभग एक ही समय पर आता है. वर्तमान शताब्दी में मकर संक्रांति जनवरी माह की 14 या 15 तारीख को ही पड़ती है और इन दिनों में ही मकर संक्रांति त्योहार मनाया जाता है.
देशभर में कैसे मनाई जाती है मकर संक्रांति?
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उत्तर भारत - में इसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, जहां गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है.
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गुजरात- में उत्तरायण के नाम से पतंगबाजी का भव्य उत्सव होता है.
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महाराष्ट्र- में तिल-गुड़ बांटकर “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला” कहा जाता है.
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पंजाब- में लोहड़ी के साथ इसका उत्सव मनाया जाता है.
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दक्षिण भारत- में पोंगल के रूप में यह पर्व चार दिन तक चलता है.
2026 में मकर संक्रांति की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे होगा. इसी क्षण को मकर संक्रांति का वास्तविक समय माना जाएगा.
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शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: |
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संक्रांति का क्षण: दोपहर 3:13 बजे |
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पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक |
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महा पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक |