महाराष्ट्र सरकार महिला किसानों के लिए कई सरकारी मदद कर रही है, जिससे राज्य की महिला किसान आत्मनिर्भर बन रही है. अभी हाल ही में राज्य सरकार नेगोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत कपास की खेती करने वाली 5,000 से अधिक महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की विशेष ट्रेनिंग देना का ऐलान कर दिया है. इस पहल से महिला किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हुई अहम साझेदारी
राज्य सरकार नेगोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड का यह समझौता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में किया गया है, क्योंकि सरकार का यह मानना है कि महिला किसान खेतों के साथ घर परिवार की भी जिम्मेदारी उठाती है. ऐसे में उन्हें तकनीकी के रुप में सक्षम बनाना भी सबसे बड़ी जरुरत है. इस साझेदारी के जरिए महिला किसानों को खेती की नई सोच, नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन भी सिखाया जाएगा.
क्यों खास है महिला किसानों की यह ट्रेनिंग
महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है. इसलिए राज्य सरकार ने यह अहम कदम उठाया है, क्योंकि राज्य में महिला किसान की भी बाराबरी की साझेदारी है. महिला बीज बोने से लेकर फसल कटाई तक हर स्तर पर काम करती है, लेकिन ऐसे में उन्हें सही प्रशिक्षण और संसाधन नहीं मिल पाते. इस योजना की शुरुआत से महिला किसान खेती-बाड़ी से जुड़े निर्णय लेने में भी सक्षम होगी और आत्मनिर्भर भी बनेगी.
किन 9 जिलों में महिला किसानों को मिलेगा लाभ?
महाराष्ट्र सरकार ने योजना के पहले चरण में महाराष्ट्र के 9 प्रमुख कपास उत्पादक जिलों को शामिल किया गया है, इनमें हैं- नागपुर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, परभणी, जलगांव, बीड, अकोला और नांदेड जिलों को शामिल किया गया है.
बता दें कि इन राज्यों में लंबे समय से कपास की खेती की जाती है. साथ ही इन जिलों में 5,000 से अधिक महिला किसान और लगभग 100 स्वयं सहायता समूह इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे और कपास की खेती में अधिक जानकारी व नई तकीनीकों के बारे में जानकर बेहतर तरीके से कपास की खेती कर सकेंगी.
खेती की कौन-कौन सी तकनीक सिखाई जाएगी
राज्य सरकार द्वारा शुरु की गई इस योजना के तहत इस ट्रेनिंग कार्यक्रम में महिला किसानों को Good Agricultural Practices (GAP) यानी अच्छी कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी. इसके साथ ही Integrated Pest Management (IPM) के जरिए कीटों और बीमारियों से फसल को सुरक्षित रखने के तरीके सिखाए जाएंगे.
साथ ही इससे रासायनिक दवाओं पर खर्च कम होगा, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और पैदावार की गुणवत्ता बेहतर होगी. इस ट्रेनिंग कार्यक्रम से महिलाओं को यह फायदा होगा की वह कम लागत में खेती से अच्छी आय अर्जित कर सकेंगी.
50,000 एकड़ जमीन तक पहुंचेगा कार्यक्रम
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत करीब 50,000 एकड़ कृषि भूमि पर काम करने वाली महिला किसान सीधे तौर पर जुड़ेंगी. यह कार्यक्रम सिर्फ एक साल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले तीन वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से और विस्तार दिया जाएगा.
भविष्य में 500 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को इससे जोड़ा जाएगा और कपास के साथ-साथ मक्का जैसी अन्य फसलों की ट्रेनिंग भी दी जाएगी.
सरकार और गोदरेज की अलग-अलग जिम्मेदारियां
सरकार इस समझौते के तहत महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MSRLM-उमेद) महिला किसानों को स्वयं सहायता समूहों और कृषि सखी नेटवर्क के माध्यम से संगठित करेगा.
वहीं गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, डेमो प्लॉट, किसान स्कूल, फील्ड विजिट और सुरक्षा किट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा. इससे सीखने की प्रक्रिया सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सीधे खेतों में लागू की जा सकेगी.
अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष से जुड़ी अहम पहल
खास बात यह है कि यह योजना ऐसे समय में शुरू की गई है, जब संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र सरकार महिला किसानों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है.
लेखक: रवीना सिंह