देश के किसानों के लिए सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिससे किसानों को काफी हद तक मदद मिल रही है. इसी क्रम में मध्यपप्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात दी है. मिडवासा सिंचाई परियोजना को 300 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करके. इस परियोजना से किसानों को सिंचाई जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनकी फसल लागत कम होगी और आमदनी में इजाफा होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा.
किसानों की सालों पूरानी मांग को मिली मंजूरी
इस राज्य के किसान काफी सालों से इस योजना को लेकर सरकार के सामने गुहार लगा रहे थें, क्योंकि क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी समस्या बारिश पर निर्भर खेती थी. अनियमित मानसून के कारण कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि से फसलें प्रभावित होती थीं. ऐसे में किसान भाई केवल एक ही फसल लेने तक सीमित रह जाते थे. मिडवासा सिंचाई परियोजना को मंजूरी से अब खेती का जोखिम कम होगा और उत्पादन में बढ़ोतरी होने की संभावना बढ़ेगी.
तीन विधानसभा क्षेत्रों को सीधा फायदा
इस सरकारी परियोजना से तीन विभानसभाओं को सीधा फायदा होगा, जिनमें सुरखी, नरयावली और रहली इन क्षेत्रों के सभी गांवों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिनमें सुरखी क्षेत्र के करैया जारो, मोकलपुर, हनौताखुर्द, नारायणपुर, बंसिया, बेरसला, बैरसिया, हफसिली, बिहारीखेड़ा, तालग्वारी, गुआरी, बदरचुआ और बरोदा रहली जैसे गांवों की हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी.
वहीं, नरयावली विधानसभा के बरखुआ तिवारी, उदयपुरा तिवारी, समनापुर और किशनपुर गांवों के किसान भी इस योजना से लाभान्वित होंगे और रहली विधानसभा के सेमरा के गांव के किसानों को भी इस पानी जैसी समस्या का समाधान मिलेगा.
कितनी हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित?
सरकार ने मिडवासा सिंचाई परियोजना को 300 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें परियोजना के पूर्ण होने के बाद लगभग 7200 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी. इस योजना के माध्यम से किसान को खरीफ और रबी दोनों सीजन में बेहतर उत्पादन करना आसान होगा. उनको पानी की या खेत की सिंचाई जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा. यानी इस योजना की मदद से किसान भाई केवल एक फसल तक सीमित नहीं रहेंगे. अब वह आराम से दो से तीन फसलें लें सकेंगे.
क्या आय में होगा इजाफा?
इस सरकारी परियोजना से किसानों को बेहद ही लाभ होना वाला है. फसलों को नियमित पानी मिलने से गुणवत्ता में सुधार आएगा, जिससे किसानों को बाजारों में भी फसलों के अच्छे दाम मिलना संभव है. इसके अलावा, सिंचाई सुविधा मिलने से फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा. किसान गेहूं, चना, मसूर और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जी और बागवानी फसलों की ओर भी रुख कर सकेंगे और इनकम को दोगुना कर सकेंगे.
लेखक: रवीना सिंह