कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), उजवा, नई दिल्ली द्वारा 15 से 24 जुलाई, 2026 तक आयोजित 10 दिवसीय "गार्डेनर सह नर्सरी वर्कर" व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ. प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं, किसानों एवं महिलाओं को आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों, गुणवत्तायुक्त नर्सरी उत्पादन तथा बागवानी आधारित स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए आवश्यक वैज्ञानिक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था.
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, डॉ. डी. के. राणा ने कहा कि नर्सरी उत्पादन, लैंडस्केपिंग, सजावटी पौधों का उत्पादन तथा रूफटॉप गार्डनिंग जैसे उद्यम वर्तमान समय में रोजगार एवं स्वरोजगार के प्रभावी माध्यम बन रहे हैं. उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकों को अपनाकर उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया.
प्रशिक्षण का संचालन डॉ. राकेश कुमार, विषय विशेषज्ञ (बागवानी) द्वारा किया गया. उन्होंने प्रतिभागियों को गुणवत्तायुक्त नर्सरी उत्पादन, पौध प्रवर्धन (ग्राफ्टिंग, बडिंग, कटिंग, एयर लेयरिंग एवं बीज द्वारा पौध तैयार करना), नर्सरी स्थापना एवं प्रबंधन, वैज्ञानिक पॉटिंग मिक्स तैयार करना, री-पॉटिंग, हार्डनिंग तथा पौधों की देखभाल का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया.
प्रशिक्षण के दौरान फलदार, सब्जी, पुष्पीय एवं सजावटी पौधों का चयन, वैज्ञानिक रोपण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, छंटाई (प्रूनिंग), प्रशिक्षण (ट्रेनिंग), पौध संरक्षण तथा प्रमुख कीट एवं रोगों के समेकित प्रबंधन (IPM) की जानकारी दी गई. साथ ही लॉन स्थापना एवं रखरखाव, लैंडस्केपिंग, मौसमी पुष्प उत्पादन, इनडोर एवं आउटडोर पौधों की देखभाल, रूफटॉप गार्डनिंग, वर्टिकल गार्डन, किचन गार्डन, माइक्रो इरिगेशन, जैविक आदानों के उपयोग, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग, विपणन तथा नर्सरी आधारित उद्यमिता एवं लागत-लाभ विश्लेषण पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
मुकेश गोला, लैंडस्केपिंग विशेषज्ञ, ने आधुनिक लैंडस्केपिंग तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए लॉन विकास, वर्टिकल गार्डन, रॉक गार्डन, हैंगिंग बास्केट, हेज निर्माण, पौधों की छंटाई तथा उद्यानों के वैज्ञानिक सौंदर्यीकरण की जानकारी दी.
प्रशिक्षण के दौरान अन्य विशेषज्ञों में डॉ. समर पाल सिंह ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जैविक आदानों के उपयोग तथा खरपतवार प्रबंधन, डॉ. बाबूलाल ने फल एवं सब्जी फसलों में समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM), जैविक नियंत्रण एवं सुरक्षित पौध संरक्षण उपायों, बृजेश कुमार ने मृदा एवं जल परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा संतुलित पोषण प्रबंधन, जबकि कैलाश ने नर्सरी स्थापना हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं, अनुदान, बैंक ऋण, नर्सरी सर्टिफिकेशन, विज्ञापन, डिजिटल मार्केटिंग एवं अन्य डिजिटल कृषि सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की.
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्हें आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन, लैंडस्केपिंग, डिजिटल विपणन तथा उद्यानिकी आधारित स्वरोजगार के क्षेत्र में नवीन ज्ञान एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जो भविष्य में स्वरोजगार एवं उद्यम स्थापना में सहायक सिद्ध होगा.
प्रशिक्षण में दिल्ली एवं आसपास के राज्यों से 30 प्रतिभागियों, जिनमें 7 महिलाएँ शामिल थीं, ने भाग लिया. समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को मूल्यांकन उपरांत प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए.