भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र, शिकोहपुर, गुड़गांव द्वारा किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से “संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान” का आयोजन ज़िले के काकरोला, गाँव में किया गया जिसमें 30 से अधिक कृषकों एवं महिलाओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. भरत सिंह ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित मात्रा में प्रयोग करने के उद्देश्य से फार्म से उत्पादित अवशेषों व पशु गोबर से निर्मित खाद तथा वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन कर जीवांशयुक्त खादों की उत्पादन तकनीकी तथा प्रयोग विधि के बारे में विस्तृत जानकारी दी जिससे कि भूमि में जैविक कार्बन के स्तर में वृद्धि कर फसलों से उत्पादन अधिकतम लिया जा सके। इस दौरान
डॉ. सिंह ने फसलों में कीट जैविक कीटनाशकों के प्रयोग तथा वातावरण के अनुरूप सुरक्षित रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग के प्रति कृषकों को प्रेरित किया। इस दौरान किसानों को जैविक व प्राकृतिक खेती के बारे में भी जानकारी दी जिससे कि रासायन रहित कृषि उत्पाद प्राप्त होंगे और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा | उन्होंने कहा कि किसानों को धीरे धीरे रासायनिक खेती को कम करते हुए प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना होगा जिससे किसान गुणवत्ता पूर्ण खाद्यान का उत्पादन कर सकेंगे।
इस अवसर पर डॉ हरेंद्र सिंह दहिया ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के सही एवं संतुलित प्रयोग की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग करने से फसलों की पैदावार बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
उन्होंने उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी तथा टिकाऊ कृषि अपनाने पर बल दिया गया। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अन्य किसानों को भी मिट्टी की जांच करवाने हेतु प्रेरित करें और रासायनिक खादों का संतुलित प्रयोग करें।
उन्होंने किसानों को हरी खाद को प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है जिससे रासायनिक उर्वरकों की खपत में भी कमी आएगी।