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Updated on: 14 March, 2026 9:18 PM IST
समस्तीपुर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित क्षेत्रीय किसान मेले के दूसरे दिन

समस्तीपुर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित क्षेत्रीय किसान मेले के दूसरे दिन किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर आधुनिक खेती, उन्नत बीज, डिजिटल कृषि तकनीकों और कृषि उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। मेले में किसानों की खास रुचि नई तकनीकों और कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली कृषि पद्धतियों में देखने को मिली।

मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से किसानों को डिजिटल एग्रीकल्चर, जलवायु अनुकूल कृषि, मशरूम उत्पादन, उद्यानिकी, कृषि यंत्रों और उन्नत बीजों की जानकारी दी जा रही है। किसानों ने यहां से सस्ते दर पर सब्जियों और फूलों के बीज, फल-फूल के पौधे तथा अन्य कृषि सामग्री की खरीदारी भी की।

इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने मेले में लगाए गए सैकड़ों स्टॉलों का निरीक्षण किया और विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने मशरूम हब, श्री अन्न तथा बीज निदेशालय के कार्यों की सराहना करते हुए वैज्ञानिकों और कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य किसानों तक उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना है, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि इस वर्ष किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फूल, मसाला और विभिन्न सब्जियों के बीजों की छोटी-छोटी पैकिंग तैयार कर सस्ती दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। इन बीजों की मदद से लोग अपने घरों के आसपास किचेन गार्डन विकसित कर सकते हैं, जिससे उन्हें साल भर ताजी सब्जियां और मसाले मिल सकेंगे।

मेले में डिजिटल एग्रीकल्चर के कई मॉडल भी प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों के उपयोग के बारे में जानकारी दी जा रही है। इन मॉडलों में यह दिखाया गया है कि किस प्रकार मोबाइल फोन के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का संचालन किया जा सकता है तथा फसलों में पोषक तत्वों का संतुलित प्रबंधन किया जा सकता है।

इसके अलावा सैटेलाइट आधारित तकनीकों के जरिए किसानों को मौसम की जानकारी, कीट प्रकोप की संभावना और फसलों के स्वास्थ्य की निगरानी से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार डिजिटल कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से खेती को अधिक सटीक और वैज्ञानिक बनाया जा सकता है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और उपज में वृद्धि संभव होगी।

मेले में किसानों को ड्रोन तकनीक के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। ड्रोन की मदद से फसलों की निगरानी, उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव तथा खेतों की स्थिति का आकलन कम समय में अधिक सटीकता के साथ किया जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यहां पहले भी “ड्रोन दीदी” कार्यक्रम के तहत कई महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है।

मेले के दौरान कुलपति ने कृषि विज्ञान केंद्र हरिहरपुर, वैशाली के स्टॉल पर प्रदर्शित अल्पान केले की सराहना की। वहीं एक अन्य स्टॉल पर प्रदर्शित बत्तीसा केले के लगभग नौ फीट लंबे घौंद को देखकर भी उन्होंने प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के स्टॉलों का निरीक्षण कर वहां किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी ली।

वहीं अनुसंधान निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि मेले में आए किसानों की समस्याओं को नोट किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर उनके समाधान के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर अनुसंधान कार्य भी शुरू किए जाएंगे।

मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक भी भाग ले रहे हैं। ये वैज्ञानिक अपने संस्थानों द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों और फसलों की किस्मों का प्रदर्शन कर किसानों को उनकी जानकारी दे रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न बैंकों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर किसानों को कृषि ऋण और बैंकिंग योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है।

मेले में क्षेत्र के विभिन्न जिलों से आए किसान पूरे दिन प्रदर्शनी और तकनीकी स्टॉलों का अवलोकन करते रहे। किसानों की सक्रिय भागीदारी से यह साफ दिखाई दे रहा है कि अब किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाने और वैज्ञानिक खेती की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट : रामजी कुमार FTJ बिहार

English Summary: Kisan Mela at Pusa Agricultural University in Samastipur On second day crowds of farmers flocked to witness new technologies ranging from digital farming to advanced seeds
Published on: 14 March 2026, 09:37 PM IST

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