भा.कृ.अ.प.- भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा संस्थान), नई दिल्ली ने 1 अप्रैल 2026 को अपने 122वें स्थापना दिवस का भव्य आयोजन प्रतिष्ठित डॉ. बी.पी. पाल सभागार में किया. यह कार्यक्रम उत्साह, गरिमा तथा राष्ट्रीय विकास हेतु कृषि विज्ञान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ. यह अवसर कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं प्रसार के क्षेत्र में संस्थान के एक शताब्दी से अधिक समय के अग्रणी योगदान का स्मरण कराने वाला रहा जिसने भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
स्वागत संबोधन में संस्थान के निदेशक, डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव ने गत वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों एवं पहलों पर प्रकाश डाला. उन्होंने “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप संस्थान की रणनीतिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए जलवायु-सहिष्णु कृषि, डिजिटल एवं इमर्सिव प्रौद्योगिकियों तथा किसान-केंद्रित नवाचारों पर विशेष बल दिया. उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में (NIRF 2025) में लगातार तीसरे वर्ष प्रथम स्थान प्राप्त किया, एसडीजी में द्वितीय स्थान, समग्र रूप से 24वाँ तथा अनुसंधान में 29वाँ स्थान प्राप्त किया. साथ ही संस्थान को NAEAB (2025–2030) से A+ ग्रेड (3.64/4.00) प्राप्त हुआ तथा QS विश्व रैंकिंग 2026 (151–200 श्रेणी) में स्थान प्राप्त किया.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं जिन्होंने कृषि स्थिरता एवं किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने में संस्थान के योगदान की सराहना की. उन्होंने “ग्रीन दिल्ली” के निर्माण एवं जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया. साथ ही, उन्होंने वैज्ञानिक योगदानों एवं जन-जागरूकता के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने किसानों के हित में संस्थान की भूमिका को रेखांकित करते हुए विकसित भारत के निर्माण में इसके योगदान की सराहना की तथा खाद्य आत्मनिर्भरता के संदर्भ में स्व. लाल बहादुर शास्त्री के विचारों का उल्लेख किया.
दिल्ली सरकार के मंत्री रविंदर सिंह (इंद्राज) ने भी संस्थान को स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए “ग्रीन दिल्ली” के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया तथा इस दिशा में संस्थान के प्रयासों की सराहना की.
कार्यक्रम में डॉ. एम. एल. जाट सचिव, डेयर (DARE) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने अपने संबोधन में दिल्ली सरकार एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने पर बल दिया, जिससे शहरी एवं अर्ध-शहरी कृषि संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सके. उन्होंने अपशिष्ट को उर्वरक में परिवर्तित करने जैसी नवाचारपूर्ण तकनीकों का उल्लेख किया जो सतत कृषि एवं अपशिष्ट प्रबंधन में सहायक हैं. उन्होंने मानव संसाधन विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए “भोजन ही औषधि है” पर विशेष बल दिया
डॉ. जाट ने किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा सलाह दी कि यदि गेहूँ की फसल में डीएपी उर्वरक का प्रयोग हो चुका है, तो उन्हें धान की फसल में इसके अनावश्यक उपयोग से बचना चाहिए. उन्होंने बताया कि ऐसी वैज्ञानिक जानकारी से किसानों के खर्च में कमी आएगी और पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ेगी.
मुख्यमंत्री ने पूसा संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा समारोह के दौरान “खाद्यान्न, पोषण एवं आजीविका सुरक्षा हेतु फसलों की उन्नत किस्में” तथा “प्रिसिशन फ्लोरिकल्चर एवं लैंडस्केप डिजाइन” नामक पुस्तकों का विमोचन भी किया.
इस अवसर पर वर्ष 2025–26 के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों, तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय कर्मियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम का समापन डॉ. आर. एन. पडारिया द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया. इस समारोह में भा.कृ.अ.अनु.सं. के पूर्व निदेशकगण सहित अन्य गणमान्य अतिथि, कर्मचारी एवं छात्र भी उपस्थित रहे.
भा.कृ.अ.अनु.सं. का 122वाँ स्थापना दिवस समारोह संस्थान की गौरवशाली विरासत का प्रतीक रहा तथा वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार एवं किसान-केंद्रित विकास के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है, जो भारत के सतत एवं समृद्ध कृषि भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है.