भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 10 अप्रैल, 2026 को किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना को अंतिम रूप देने हेतु एक संवाद बैठक आयोजित की गई. संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि असंतुलित उर्वरक उपयोग के कारण मृदा उर्वरता में गिरावट और खेती की लागत में वृद्धि हो रही है, जिससे किसानों की आय प्रभावित हो रही है. उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के समेकित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया.
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने हरी खाद के महत्व पर प्रकाश डाला तथा धैंचा एवं सनई जैसी फसलों के उपयोग की अनुशंसा की, जिससे मृदा में जैविक कार्बन और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है. उन्होंने टिकाऊ एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्राकृतिक कृषि प्रणालियों को अपनाने पर भी जोर दिया.
यह निर्णय लिया गया कि चल रहे कार्यक्रमों के अंतर्गत साप्ताहिक गांव-स्तरीय प्रशिक्षण, खेतों में प्रत्यक्षण तथा जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे. संतुलित उर्वरक उपयोग और हरी खाद पर हिंदी में तकनीकी लेख एवं प्रसार पुस्तिका तैयार कर किसानों के बीच वितरित किए जाएंगे. साथ ही, सटीक नाइट्रोजन उपयोग के लिए लीफ कलर चार्ट के उपयोग को बढ़ावा देने तथा फसल प्रणालियों में दलहनी फसलों को शामिल करने पर भी जोर दिया जाएगा.
संस्थान बिहार सरकार के साथ जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम एवं अन्य संयुक्त कार्यक्रमों के अंतर्गत धान–गेहूं प्रणाली में हरी खाद के बीज उत्पादन तथा हरी खाद एवं दलहनी आधारित फसल प्रणालियों के प्रदर्शन कार्य भी करेगा. फसल विविधीकरण के तहत दलहन एवं मोटे अनाजों को बढ़ावा दिया जाएगा तथा खेत की मेड़ों पर अरहर की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादकता एवं मृदा स्वास्थ्य में सुधार सुनिश्चित हो सके.
संस्थान मोबाइल संदेश, व्हाट्सएप समूह एवं अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से अपने विस्तार कार्य को और सुदृढ़ करने की योजना बना रहा है. विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इन पहलों से इनपुट लागत में कमी, मृदा स्वास्थ्य में सुधार तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा. निदेशक डॉ. अनुप दास ने किसानों के साथ दलहन प्रक्षेत्र का भ्रमण किया तथा उन्हें जागरूक किया कि दलहन फसलें मृदा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होती हैं.
कार्यक्रम में प्रभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. कमल शर्मा, डॉ. उज्ज्वल कुमार एवं डॉ. संजीव कुमार सहित संस्थान के अन्य वैज्ञानिकों ने भाग लिया. साथ ही, बक्सर एवं रामगढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुख भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे.