भारतीय कृषि में नवाचार और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में आज यानि 4 अप्रैल 2025 को एक ऐतिहासिक पहल करते हुए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना और बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा के पटना कैंपस के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. यह साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्मार्ट खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. यह कार्यक्रम ICAR-आरसीईआर, पटना परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास और बीआईटी मेसरा, पटना कैंपस के निदेशक डॉ. आनंद कुमार सिन्हा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया.
इसके अलावा, कार्यक्रम में BIT मेसरा, पटना कैंपस के डॉ. एस.के. सिन्हा, डॉ. रत्नेश कुमार मिश्रा, डॉ. के.पी. तिवारी और ई. मनोज कुमार के साथ-साथ ICAR-आरसीईआर के वैज्ञानिक, विभागाध्यक्ष और शोधकर्ता भी शामिल हुए.
स्मार्ट कृषि भविष्य की जरूरत
इस मौके पर डॉ. अनुप दास ने स्मार्ट खेती में तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, "भविष्य की कृषि उन्नत तकनीकों के सहज एकीकरण में निहित है. एआई और आईओटी जैसी तकनीकों से न केवल खेती की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि यह संसाधनों के इष्टतम उपयोग और जलवायु संकट से निपटने में भी सहायक होगी. यह साझेदारी किसानों के लिए एक भविष्य-उन्मुख कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी."
साझेदारी से शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. आनंद कुमार सिन्हा ने इस समझौते को अकादमिक और व्यावसायिक क्षेत्र के बीच की दूरी को पाटने वाला बताया. उन्होंने कहा, "यह साझेदारी अंतःविषयक अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देगी, जो आने वाले समय में स्मार्ट कृषि के स्वरूप को पुनर्परिभाषित करेंगे."
स्मार्ट तकनीकों से जल प्रबंधन में आएगा बदलाव
भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख, डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने AI, मशीन लर्निंग (ML), डीप लर्निंग और IoT-आधारित सिंचाई प्रणालियों की उपयोगिता को रेखांकित किया और बताया कि कैसे ये स्मार्ट तकनीकें कृषि जल प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं.
अधिकारियों और वैज्ञानिकों का सराहनीय सहयोग
कार्यक्रम का शुभारंभ PME सेल प्रभारी, डॉ. अभय कुमार के स्वागत भाषण से हुआ, जबकि समापन डॉ. आरती कुमारी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया. इस आयोजन के सफल संचालन में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पुष्पनायक, वित्त एवं लेखा अधिकारी रजत दास तथा भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के वैज्ञानिकों – डॉ. बिकाश सरकार, डॉ. शिवानी, डॉ. अजय कुमार, डॉ. मणिभूषण, डॉ. पी.के. सुंदरम, डॉ. पवन जीत, डॉ. वेद प्रकाश और डॉ. आरती कुमारी – का महत्वपूर्ण योगदान रहा.