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Updated on: 19 September, 2026 9:48 PM IST

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 19 सितंबर, 2026 को ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी, अपर सचिव (डेयर) एवं सचिव (आईसीएआर) तथा सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एवं नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार सरकार का आगमन हुआ. दोनों गणमान्य अतिथियों ने संस्थान का भ्रमण कर विभिन्न अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास एवं संस्थागत गतिविधियों का अवलोकन किया.

इस दौरे का उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप विज्ञान-आधारित, मांग-आधारित एवं किसान-केंद्रित कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी प्रसार को सुदृढ़ करना था. इस अवसर पर डॉ. आर. के. सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) भी उपस्थित थे.

त्रिपाठी ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित अनुसंधान कार्यक्रमों एवं प्रक्षेत्र-आधारित गतिविधियों की समीक्षा की. नर्मदेश्वर लाल के साथ उन्होंने प्राकृतिक खेती पर दीर्घकालिक परीक्षणों, मोटे अनाज आधारित फसल प्रणालियों, फल आधारित विविधीकृत पोषण वाटिका, सौर ऊर्जा आधारित कृषि मशीनीकरण, स्मार्ट जल प्रबंधन इकाइयों तथा जलवायु-अनुकूल किस्मों के विकास और भविष्य में जलवायु संबंधी चुनौतियों के लिए तैयारी हेतु रेनआउट शेल्टर एवं ओपन टॉप चैंबर्स जैसी प्रदर्शन एवं अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन किया.

दोनों गणमान्य व्यक्तियों ने संस्थान के एक एवं दो एकड़ के समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, जिसमें सूक्ष्म एवं नैनो-गृहवाटिका आधारित कृषि मॉडल भी शामिल हैं, का भी अवलोकन किया तथा किसानों के खेतों में इनके विस्तार और व्यापक स्तर पर अपनाए जाने की संभावनाओं पर चर्चा की. पशुधन प्रक्षेत्र में उन्होंने ब्लैक बंगाल बकरी एवं मुर्रा भैंस के आनुवंशिक सुधार तथा क्षेत्रीय देशी पशुधन संसाधनों के लक्षण-निर्धारण एवं संरक्षण से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की. दोनों गणमान्य व्यक्तियों ने संस्थान परिसर में संयुक्त रूप से पौधारोपण भी किया.

इस अवसर पर संस्थान की प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान उपलब्धियों एवं किसान-केंद्रित नवाचारों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई. गणमान्य व्यक्तियों ने संस्थान की प्रौद्योगिकी प्रसार पहलों से जुड़े सफल किसानों से संवाद किया. रांची की श्रीमती अल्बिना एक्का ने समेकित कृषि प्रणाली के माध्यम से लगभग 12 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित करने तथा रामगढ़ के रामशरण ने रेज्ड बेड पर वर्षभर सब्जी उत्पादन के साथ बकरी एवं मछली पालन को एकीकृत कर लगभग 20 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित करने के अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने प्रौद्योगिकी अपनाने तथा आजीविका में हुए सुधार के संबंध में अपने अनुभव बताए.

राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में कृषि अनुसंधान के महत्व पर जोर देते हुए ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने कहा कि अनुसंधान परिणामोन्मुखी, प्रक्षेत्र-प्रासंगिक तथा उभरती चुनौतियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए. उन्होंने वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक ज्ञान को ऐसी प्रौद्योगिकियों में तेजी से परिवर्तित किया जा सके, जो कृषि की स्थिरता, संसाधन उपयोग दक्षता तथा कृषि उत्पादकता में सुधार कर सकें. उन्होंने अंतर्विषयक एवं समन्वित अनुसंधान, प्रौद्योगिकी के त्वरित प्रसार तथा उभरती कृषि चुनौतियों के समाधान और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की पूर्ति के लिए राज्य सरकारों एवं अन्य हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय पर भी बल दिया.

 

नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार सरकार ने संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास कार्यों की सराहना की. उन्होंने जलवायु-अनुकूल एवं किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकियों के प्रक्षेत्र स्तर पर सत्यापन, व्यापक प्रसार एवं अंगीकरण के लिए संस्थान और राज्य कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने बिहार के किसानों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोगात्मक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी संवर्धन एवं क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया.

डॉ. अनुप दास, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया तथा संस्थान के प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रमों, आधारभूत संरचना एवं प्रौद्योगिकी प्रसार पहलों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने जलवायु-अनुकूल कृषि, धान-परती प्रणालियों का सतत सघनीकरण, बहु-तनाव सहनशील फसल सुधार, उन्नत सब्जी एवं फल किस्मों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग आधारित जल एवं पोषक तत्व प्रबंधन, किफायती कृषि मशीनीकरण, आजीविका संवर्धन के लिए समेकित कृषि प्रणालियों, बहु-स्तरीय कृषिवानिकी तथा पशुधन एवं मत्स्य क्षेत्र में नवाचारों पर संस्थान के कार्यों को रेखांकित किया. उन्होंने पूर्वी भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए संस्थान के बहुविषयक दृष्टिकोण तथा राज्य विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों, किसानों एवं अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला. डॉ. दास ने विशेष रूप से जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम, बिहार कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान तथा अन्य पहलों के माध्यम से बिहार सरकार से प्राप्त निरंतर सहयोग एवं सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया.

कार्यक्रम के दौरान गणमान्य व्यक्तियों द्वारा “पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के सशक्तीकरण हेतु प्रौद्योगिकी एवं संस्थागत समन्वय: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की पहल” नामक प्रकाशन का विमोचन किया गया. इसके पश्चात संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्मिकों, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र भी शामिल थे, के साथ संवाद आयोजित किया गया. संवाद के दौरान वर्तमान एवं उभरती अनुसंधान प्राथमिकताओं, अनुसंधान निधियों के विवेकपूर्ण उपयोग, अनुसंधान एवं प्रसार के बीच बेहतर समन्वय तथा राज्य कार्यक्रमों के साथ अभिसरण जैसे विषयों पर चर्चा की गई.

गणमान्य व्यक्तियों ने किसानों, राज्य विभागों एवं अन्य हितधारकों के साथ सहयोग के माध्यम से मांग-आधारित एवं किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास तथा प्रसार के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के प्रयासों की सराहना की.

English Summary: icar patna agriculture research climate friendly farmer centric research review
Published on: 19 September 2026, 09:52 PM IST

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