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Updated on: 14 June, 2026 9:57 AM IST
भा.कृ.अ.प.-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव ने शिमला क्षेत्रीय केंद्र का दौरा कर अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा की।

नई दिल्ली, 13 जून, 2026- भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव ने 11-12 जून को भा.कृ.अ.प. – भा.कृ.अनु.सं., क्षेत्रीय केंद्र, शिमला का दौरा कर केंद्र में संचालित विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने वैज्ञानिकों से पर्वतीय राज्यों के किसानों एवं बागवानों के लिए खाद्यान्न तथा फल फसलों की नई एवं उन्नत किस्मों के विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। साथ ही, सेब एवं अन्य शीतोष्ण फल फसलों की कम शीत आवश्यकता (Low Chilling Requirement) वाली किस्मों के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

दौरे के दौरान डॉ. राव ने 50,000 लीटर क्षमता वाले सिंचाई जल भंडारण टैंक का उद्घाटन तथा हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली का शुभारंभ किया। उन्होंने भा.कृ.अ.प.-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह के साथ हिमाचल प्रदेश सरकार के कृषि एवं बागवानी सचिव से भेंट कर केंद्र की तकनीकों एवं अनुसंधान उपलब्धियों को किसानों तक पहुंचाने में सहयोग का आग्रह किया।

वर्ष 1935 में स्थापित भा.कृ.अनु.सं. क्षेत्रीय केंद्र, शिमला हिमालयी राज्यों के लिए रोग प्रतिरोधी गेहूं एवं जौ की किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. धर्म पाल ने बताया कि HS 507, HS 542, HS 562 तथा HD 3226 जैसी उन्नत गेहूं किस्मों का प्रजनक बीज राज्य के किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नग्न जौ की नई किस्म BSH 497 को जनजातीय क्षेत्रों में बढ़ावा देने की योजना है।

फल फसलों के क्षेत्र में केंद्र द्वारा विकसित ‘पूसा गोल्ड’ सेब की किस्म, कीवी की विभिन्न किस्मों तथा ‘पूसाखोर’ अखरोट के पौधों को बागवानों तक पहुंचाया जा रहा है। केंद्र द्वारा विकसित वूली एफिड ट्रैप तथा शीतोष्ण फल फसलों के रोगों की त्वरित पहचान के लिए उन्नत परीक्षण प्रोटोकॉल किसानों एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। SCSP एवं TSP कार्यक्रमों के अंतर्गत कृषि तकनीकों और छोटे कृषि उपकरणों का भी वितरण किया जा रहा है।

डॉ. राव ने इस दौरे से केंद्र के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है तथा पर्वतीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप किसान-केंद्रित नवाचारों और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास को नई गति मिलेगी।

English Summary: Icar Iari Director Reviews Agricultural Research Variety Development shimla
Published on: 14 June 2026, 10:01 AM IST

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