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Updated on: 2 October, 2026 6:24 PM IST

रिफॉर्म उत्सव के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 29 सितंबर, 2026 को हिंदी पखवाड़ा-2026 का समापन-सह-पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ.अनुप दास ने की. कार्यक्रम में वीरेंद्र कुमार यादव, सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, भारत सरकार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

वीरेंद्र कुमार यादव ने “विकसित भारत में राजभाषा हिंदी का योगदान” विषय पर अपने सारगर्भित व्याख्यान में राजभाषा हिंदी के महत्व तथा विकसित भारत के निर्माण में हिंदी की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला.

उन्होंने कहा कि हिंदी देश के विभिन्न वर्गों तक ज्ञान और सूचनाओं को पहुंचाने का सशक्त माध्यम है. कृषि एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग से वैज्ञानिक तकनीकों, नवाचारों और अनुसंधान परिणामों को किसानों एवं आमजन तक सरलता से पहुंचाया जा सकता है. उन्होंने वैज्ञानिक एवं तकनीकी विषयों को सरल, सहज एवं व्यवहारिक हिंदी में प्रस्तुत करने तथा कार्यालयी कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया. साथ ही, उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपने हस्ताक्षर हिंदी में करने का आह्वान किया.

अध्यक्षीय संबोधन में संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों में वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ संस्थान के कार्यालयी एवं वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में सहायक हैं.

उन्होंने कहा कि संस्थान का पटना मुख्यालय तथा रांची केंद्र दोनों भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित हैं. अतः, हिंदी में प्रवीणता प्राप्त सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने प्रशासनिक कार्यों का शत-प्रतिशत निष्पादन हिंदी में करें. उन्होंने कार्यालयी टिप्पणियों, पत्राचार, प्रतिवेदनों एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के नियमित एवं प्रभावी प्रयोग पर बल दिया.

इस अवसर पर डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रभागाध्यक्ष-सह-उपाध्यक्ष, संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति ने कहा कि संस्थान के सभी वैज्ञानिक किसानों से संबंधित अधिक से अधिक आलेख, प्रसार-पुस्तिकाएं एवं अन्य उपयोगी वैज्ञानिक सामग्री हिंदी में अवश्य तैयार करें.

उन्होंने कहा कि किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाते समय किसानों की भाषा में सरल, सहज और समझने योग्य हिंदी का प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि कृषि अनुसंधान एवं तकनीकी ज्ञान का वास्तविक लाभ किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके. इससे वैज्ञानिक संस्थान और किसान समुदाय के बीच ज्ञान के प्रभावी आदान-प्रदान को और मजबूत किया जा सकेगा.

इससे पूर्व, डॉ. शिवानी, प्रधान वैज्ञानिक-सह-सदस्य, संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति ने हिंदी पखवाड़ा-2026 का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और बताया कि संस्थान में 15 से 28 सितंबर, 2026 तक निबंध, यूनिकोड टंकण, व्याकरण, आशुभाषण, शब्दार्थ, प्रश्नमंच, स्वरचित काव्य पाठ एवं अंताक्षरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया. इन प्रतियोगिताओं में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आईएआरआई पटना हब के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.

इसके साथ ही 23 एवं 24 सितंबर को दो दिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें “ई-ऑफिस में हिंदी का प्रयोग तथा कृषि संबंधी जानकारी के प्रचार-प्रसार में ई-मीडिया का योगदान” और “किसानों की आय एवं जीविकोपार्जन में वृद्धि हेतु कृषि के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया.

हिंदी पखवाड़ा-2026 के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को नगद पुरस्कार एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. साथ ही, हिंदी कार्यशालाओं में व्याख्यान देने वाले अधिकारियों को भी प्रशस्ति-पत्र एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए. समारोह के दौरान प्रतिभागियों एवं विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए राजभाषा हिंदी के प्रयोग को कार्यालयी कार्यों में और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्यगण सहित उमेश कुमार मिश्र, वरिष्ठ तकनीकी सहायक (हिंदी अनुवादक) का सराहनीय योगदान रहा.

English Summary: icar eastern research complex patna hindi pakhwada 2026 concluding ceremony reform festival
Published on: 02 October 2026, 06:27 PM IST

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