Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! STIHL मल्टी-पर्पस स्टेशनेरी इंजन: आधुनिक कृषि और उद्योग के लिए क्रांतिकारी समाधान Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 15 June, 2020 2:13 PM IST

फलदार पेड़ों की श्रेणी में बेर का अपना एक अलग महत्व है. इसकी सबसे बड़ी खासियत तो यही है कि एक बार पूरक सिंचाई के पश्चात वर्षा के पानी से भी ये अपना काम चला लेता है. इस पौधे को बहुवर्षीय और बहुउपयोगी कहा गया है, क्योंकि न सिर्फ इसके फल बल्कि पेड़ के अन्य भाग भी किसी न किसी रूप में उपयोग होते हैं. वैसे बेर की खेती करने वालो के लिए एक अच्छी खबर ये है कि अब भिवानी के गिगनाऊ गांव में इंटीग्रेटिड हार्टिकल्चर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होने जा रहा है.

ग्राम पंचायत ने उपलब्ध कराई जमीन

इंडो-इस्राइल तकनीक पर स्थापित होने वाले इस सेंटर को ग्राम पंचायत ने 25 एकड़ जमीन प्रदान की है. इस सेंटर में फल-सब्जियों की वेरायटी पर काम किया जाएगा.

सरकार ने जारी किया 4 करोड़

इस सेंटर का बजट लगभग 10 करोड़ रुपए रखा गया है और फिलहाल सरकार ने 4 करोड़ रुपए जारी किए हैं. यहां थाईलैंड के ‘एप्पल बेर’ की वेरायटी का उत्पादन भी किया जाएगा. बता दें कि एप्पल बेर की डिमांड भारत के अलावा विदेशों में भी खूब है. इनके पौधें सेंटर में ही तैयार करने के बाद बाकि जगहों पर भेजे जाएंगें.

किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण

बेर के साथ ही अन्य फल-सब्जियों की खेती का प्रशिक्षण किसानों को दिया जाएगा. जानकारी के मुताबिक हार्टिकल्चर मिशन के तहत उन्हें आर्थिक मदद एवं संसाधन भी उपलब्ध करवाएं जाएंगें.

गुणवत्ता में आएगा सुधार

वैसे तो ‘एप्पल बेर’ की खेती भारत में पहले से कुछ जगहों पर होती है, लेकिन सेंटर में इनके गुणवत्ता का सुधार किया जाएगा. इसके साथ ही फल-सब्जियों की भी नई वेरायटी लांच होने से किसानों की आय में बढ़ेगी.

(आपको हमारी खबर कैसी लगी? इस बारे में अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें. इसी तरह अगर आप पशुपालन, किसानी, सरकारी योजनाओं आदि के बारे में जानकारी चाहते हैं, तो वो भी बताएं. आपके हर संभव सवाल का जवाब कृषि जागरण देने की कोशिश करेगा)

ये खबर भी पढ़े: 10वीं, 12वीं वालों के लिए रक्षा मंत्रालय में निकली सरकारी नौकरियां, ऐसे करें आवेदन

English Summary: horticulture centre of excellence in bhiwani know more about it
Published on: 15 June 2020, 02:17 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now