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Updated on: 4 November, 2026 5:33 PM IST

एचडीएफसी बैंक अपने सीएसआर कार्यक्रम 'परिवर्तन' के ज़रिए कश्मीर में कृषि-आधारित आजीविका को मज़बूत करने का काम कर रहा है. इसके लिए बेहतर खेती के तरीकों, प्रोसेसिंग के बुनियादी ढांचे और बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है. बैंक इन पहलों को कश्मीर में अपने सक्रिय कार्यान्वयन भागीदारों, आईएसएपी इंडिया फाउंडेशन और सिटिज़न फाउंडेशन के साथ मिलकर लागू कर रहा है.

इस पहल के तहत समर्थित फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गज़्नाइज़ेशन्स (एफपीओज़) कुल मिलाकर 5.2 करोड़ रूपये तक का राजस्व कमा रहे हैं, जिसमें से एक एफपीओ अकेले 1.4 करोड़ रूपये का राजस्व अर्जित कर रहा है. इस कार्यक्रम के तहत 'समरकाश' नाम का एक ब्रांड भी बनाया गया है. इसके ज़रिए इसमें शामिल एफपीओज़ अपने प्रोसेस किए गए कृषि उत्पादों की सामूहिक रूप से मार्केटिंग करते हैं, जिसमें ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाज़ार से जुड़ाव जैसी सुविधाएँ मिलती हैं.

कश्मीर की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान में कृषि का अहम स्थान है. केसर, सेब, अखरोट और कश्मीरी लाल मिर्च जैसी फसलें यहाँ के लोगों की आजीविका का मुख्य आधार हैं. हालाँकि, उत्पादकता से जुड़ी चुनौतियाँ, जलवायु में बदलाव, फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान और संगठित बाज़ारों तक सीमित पहुँच के कारण किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता है. 'परिवर्तन' कार्यक्रम खेती से लेकर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक, पूरी वैल्यू चेन में मौजूद इन कमियों को दूर करने का काम करता है.

इस सहयोग में सिंचाई की बेहतर प्रणालियाँ, जैसे सोलर वॉटर पंप और ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग खासकर केसर की खेती के लिए और पॉलीहाउस खेती शामिल हैं. इसके अलावा, सेब, अखरोट, केसर, कश्मीरी लाल मिर्च, दूध और पारंपरिक बेकरी उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए भी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं. सोलर ड्रायर, कोल्ड स्टोरेज और अन्य ज़रूरी मशीनों से लैस ये सुविधाएँ, स्थानीय उपज को कटाई के बाद बेहतर तरीके से संभालने, सुरक्षित रखने और प्रोसेस करने में मदद करती हैं.

एचडीएफसी बैंक की सीएसआर प्रमुख नुसरत पठान ने इस पहल के बारे में बात करते हुए कहा, "कश्मीर अपनी खास कृषि उपज के लिए जाना जाता है और किसानों को इससे मिलने वाले मूल्य को बढ़ाने का एक अच्छा अवसर है. 'परिवर्तन' के माध्यम से हम अपने साझेदारों के साथ मिलकर खेती के तरीकों को बेहतर बनाने, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) के बुनियादी ढांचे को सहारा देने और बाजार तक पहुंच मजबूत करने का काम कर रहे हैं. 'समरकाश' जैसी पहल किसान समूहों को अपनी उपज की ब्रांडिंग और उसमें मूल्यवर्धन (वैल्यू ऑडिशंस) करके उसे बाजार के करीब ले जाने में मदद करती हैं. हम स्थानीय स्तर पर उपयोगी ऐसे समाधानों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करें और पूरे क्षेत्र में आजीविका के टिकाऊ अवसर पैदा करें."

कश्मीर में प्रमुख पहल:

  • पम्पोर में केसर की खेती: 'परिवर्तन' केसर किसानों को खेती के बेहतर तरीके अपनाने में मदद कर रहा है. इसके तहत सोलर वॉटर पंप और सोलर ड्रायर उपलब्ध कराए जा रहे हैं साथ ही एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) का विकास और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है. इन प्रयासों का उद्देश्य खेती के तरीकों को मजबूत करना और कश्मीर की सबसे खास फसलों में से एक, केसर से जुड़े किसानों के लिए बेहतर अवसर पैदा करना है.

  • सेब और अखरोट का प्रसंस्करण: इस कार्यक्रम के तहत प्रसंस्करण के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें सोलर ड्रायर और अन्य मशीनें शामिल हैं. ये फसल कटाई के बाद के प्रबंधन, जैसे कि उपज की ग्रेडिंग और छंटाई को बेहतर बनाने में मदद करती हैं. प्रसंस्करण, संरक्षण और मूल्यवर्धन की सुविधा मिलने से, एफपीओ बाजार के लिए तैयार उत्पाद बना सकते हैं और केवल कच्चा माल बेचने के बजाय अन्य अवसरों का लाभ भी उठा सकते हैं.

  • उरी में कश्मीरी लाल मिर्च: उरी के किसानों को पॉलीहाउस खेती, ड्रिप सिंचाई और सोलर ड्रायर जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे कश्मीरी लाल मिर्च की खेती और कटाई के बाद के प्रबंधन में सुधार हो रहा है. ये पहल सीमावर्ती इलाकों में कृषि पर आधारित आजीविका को सहारा देने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं.

  • 'समरकाश' के जरिए बाजार तक पहुंच: बुनियादी ढांचे और खेती में मदद के अलावा, यह कार्यक्रम 'समरकाश' के माध्यम से एफपीओ को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग की क्षमताएं मजबूत करने में भी मदद कर रहा है. इस पहल का लक्ष्य स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार के लिए और अधिक उपयुक्त बनाना और किसानों के नेतृत्व वाले उद्यमों के विकास को बढ़ावा देना है.

 बशीर अहमद गनी ( अध्यक्ष-किरमानिया फ्रूट फेड एफपीसी)  ने कहा, "पहले हम अपनी फसल कटाई के तुरंत बाद कच्ची ही बेच देते थे और जो भी कीमत मिलती उसी पर राजी हो जाते थे. अब प्रोसेसिंग यूनिट, सुखाने की सुविधाओं और 'समरकाश' ब्रांड की मदद से हमारे सदस्य अपनी उपज को प्रोसेस और पैक कर सकते हैं और अपनी शर्तों पर बेच सकते हैं. यहाँ के युवाओं को अब फिर से खेती में अपना भविष्य नजर आने लगा है."

खेती के अलावा 'परिवर्तन' आजीविका के अन्य विकल्पों को भी बढ़ावा देता है, जिसमें महिलाओं को कौशल सिखाने की पहल भी शामिल है. एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 'बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम' और 'वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम' जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भारत भर के 498 सीमावर्ती गांवों तक अपने कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (सीएसआर) कार्यों का विस्तार किया है.

एचडीएफसी बैंक का सीएसआर कार्यक्रम 'परिवर्तन' अब तक देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 10.77 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल चुका है. वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने सीएसआर कार्यों पर 1,316.18 करोड़ रूपये खर्च किए गए हैं. इस तरह 'परिवर्तन' की शुरुआत से लेकर अब तक इसमें कुल निवेश लगभग 7,492 करोड़ रूपये हो गया है. इसके काम मुख्य रूप से छह क्षेत्रों ग्रामीण विकास, शिक्षा को बढ़ावा देना, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका में सुधार, स्वास्थ्य सेवा और स्वच्छता, वित्तीय साक्षरता और समावेशन, तथा प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन पर केंद्रित हैं. बैंक का प्रमुख कार्यक्रम, 'होलिस्टिक रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम' (एचआरडीपी) 11,000 से अधिक गांवों तक फैला हुआ है.

ग्रामीण विकास के इस व्यापक एजेंडे के तहत, 'परिवर्तन' का लक्ष्य टिकाऊ तरीकों, किसानों के समूह बनाने और उन्हें बाजार से जोड़ने के जरिए, कम आय वाले 5 लाख किसानों की सालाना आमदनी बढ़ाना है. सीआईआई फाउंडेशन के साथ मिलकर चलाई गई  फसल अवशेष प्रबंधन (क्रॉप रेज़िड्यू मैनेजमेंट) पहल ने पंजाब और हरियाणा में 3.26 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि को पराली जलाने से बचाया है. इस पहल से 380 से अधिक गांवों के 86,000 किसानों को लाभ मिला है, जिन्हें 140 से अधिक किसान सहकारी समितियों और एफपीओ (किसान उत्पादक संगठनों) के माध्यम से खेती की मशीनरी उपलब्ध कराई गई है. कार्यान्वयन भागीदारों और स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर सहयोग के माध्यम से, एचडीएफसी बैंक परिवर्तन जम्मू-कश्मीर में किसान समूहों को मजबूत करने, बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने और टिकाऊ कृषि आजीविका को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है.

English Summary: HDFC Bank Parivartan Bolsters Agricultural Livelihoods in Kashmir Through Farmer Collectives and Market Linkages
Published on: 04 November 2026, 05:35 PM IST

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