महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार को घोषणा की कि राज्य में ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ लागू की जाएगी, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2100 की वित्तीय सहायता दी जाएगी. यह योजना 25 सितंबर से, भाजपा विचारक दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर शुरू होगी.
योजना का लक्ष्य राज्य की करीब 20 लाख महिलाओं तक पहुंचना है, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता मिल सके. राज्य कैबिनेट की विशेष बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई. इस पहल को महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार और समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
कौन होंगी पात्र महिलाएं?
मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि योजना के तहत 23 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं, चाहे विवाहित हों या अविवाहित, इसका लाभ उठा सकती हैं. प्रारंभिक चरण में इसका लाभ उन महिलाओं को मिलेगा, जिनकी पारिवारिक आय ₹1 लाख सालाना से कम है. अनुमान है कि पहले चरण में 19 से 20 लाख महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जाएगा.
आगे चलकर इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तार दिया जाएगा ताकि उच्च आय वर्ग की महिलाएं भी इसमें शामिल हो सकें. सरकार का मानना है कि यह योजना महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक राहत देगी, बल्कि उनकी सामाजिक स्थिति को भी मजबूत करेगी.
परिवार में लाभार्थियों की कोई सीमा नहीं
इस योजना की एक बड़ी विशेषता यह है कि एक परिवार में लाभार्थियों की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं होगी. यदि किसी परिवार में तीन महिलाएं पात्र हैं, तो तीनों को ₹2100 प्रतिमाह दिया जाएगा. पात्रता के लिए महिला खुद या, अगर वह विवाहित है, तो उसका पति कम से कम 15 वर्षों से हरियाणा का निवासी होना चाहिए.
अन्य कल्याणकारी योजनाओं से होगा तालमेल
यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अन्य कल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा गया है.
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अविवाहित महिला जब 45 साल की आयु पूरी करेगी, तो उसे विधवा और निराश्रित महिला वित्तीय सहायता योजना में शामिल कर दिया जाएगा.
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विवाहित महिलाएं जब 60 साल की आयु पूरी करेंगी, तो उन्हें वृद्धावस्था सम्मान भत्ता पेंशन योजना में स्थानांतरित किया जाएगा.
इस तरह, यह योजना महिलाओं को जीवन के विभिन्न चरणों में निरंतर सहयोग प्रदान करेगी.
आवेदन की प्रक्रिया
सरकार ने महिलाओं को आवेदन में आसानी देने के लिए एक मोबाइल ऐप लॉन्च करने की योजना बनाई है. इसके माध्यम से महिलाएं घर बैठे आवेदन कर सकेंगी. पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पात्र लाभार्थियों की सूची पंचायतों और शहरी वार्डों में सार्वजनिक की जाएगी. इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या अपात्र व्यक्ति को लाभ मिलने की संभावना कम हो जाएगी.
चुनावी वादे का किया गया पालन
यह योजना सिर्फ महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है. भाजपा ने 2024 विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का वादा किया था. अब सरकार ने इस वादे को पूरा करते हुए इसे लागू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, जो राज्य का वित्त विभाग भी संभाल रहे हैं, ने इस योजना के लिए 2025-26 के बजट में ₹5000 करोड़ का आवंटन किया है.
महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों की महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी. ग्रामीण महिलाओं को इससे अपनी आजीविका सुधारने और छोटे-मोटे खर्च पूरे करने में मदद मिलेगी, वहीं शहरी क्षेत्रों की महिलाएं भी इस सहायता का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और घर की जिम्मेदारियों को निभाने में कर पाएंगी.
इसके अलावा, यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देगी और उन्हें परिवार और समाज में और मजबूत स्थिति दिलाने का कार्य करेगी.