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Updated on: 8 June, 2026 4:48 PM IST
सरकार रोहू-कतला के बीज पर दे रही है 50% तक सब्सिडी की छूट (Image Source-AI generate)

छत्तीसगढ़, बिलासपुर के किसान अगर मछली पालन की शुरुआत करना चाहते हैं, तो आपके सामने हैं बड़ा अवसर है, क्योंकि मानसून की शुरुआत होते ही बिलासपुर जिलें में मछली बीज उत्पादन की शुरुआत होने जा रही है. साथ ही मत्स्य पालन विभाग ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उपलब्ध कराने की तैयारी पूरी कर ली है. विभाग के अधिकारियों के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह से किसानों को अनुदानित दरों पर मछली बीज का वितरण शुरू कर दिया जाएगा. इस योजना के तहत किसानों को रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रमुख प्रजातियों के बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिलेगा.

कब शुरु होता है बीज उत्पादन?

मछली पालन करने के लिए मानसून का मौसम मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन का समय माना जाता है. इसी अवधी में मछलियों की संख्या बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने का  का कार्य बड़े पैमाने पर किया जाता है. बिलासपुर जिले के शासकीय मत्स्य बीज परिक्षेत्र भोजपुरी में भी बारिश शुरू होते ही उत्पादन प्रक्रिया तेज कर दी जाती है. 

सूत्रों के मुताबिक, मत्स्य विभाग ने बताया कि उत्पादन केंद्रों में सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. जैसे ही मौसम पूरी तरह अनुकूल होगा, रोहू, कतला और मृगल जैसी भारतीय मेजर कार्प प्रजातियों के बीज तैयार किए जाएंगे, जिससे इलाके के लोगों कोस इस करोबार में मुनाफा होने की संभावना बढ़ जाती है.

किस सप्ताह में किसानों को मिलेगा बीज?

अगर आप भी इस करोबार को करने की सोच रहे हैं तो बता दे कि विभाग का लक्ष्य है कि जून के अंतिम सप्ताह या अधिकतम जुलाई के प्रथम सप्ताह तक किसानों को मछली बीज उपलब्ध करा दिया जाए. इसके लिए पहले से पंजीकृत किसानों और नए इच्छुक मत्स्य पालकों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा और मदद से किसान अपने तालाबों में मछली संचयन कर सकेंगे, जिससे उत्पादन चक्र प्रभावित नहीं होगा. समय पर बीज मिलने से मछलियों की वृद्धि भी बेहतर होगी और उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ेगी.

कितनी मिलेगी सब्सिडी की छूट?

यह सरकारी योजना मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित उंगली संचयन योजना किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है. इस योजना के तहत किसानों को फिंगरलिंग यानी उंगली के आकार की मछलियों के संचयन पर 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है.

विभागीय जानकारी के अनुसार यदि कोई किसान 2 हजार रुपये का मछली बीज खरीदता है तो उसे लगभग 4 हजार रुपये मूल्य तक का बीज उपलब्ध कराया जा सकता है. इससे किसानों की शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है और वे कम निवेश में मछली पालन शुरू कर सकते हैं.

इन केंद्रों से मिलेगा मछली बीज

जिले में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए कई शासकीय मत्स्य बीज परिक्षेत्र संचालित किए जा रहे हैं. प्रमुख केंद्रों में भोजपुरी, बेलमुंडी और निगारबंद मत्स्य बीज परिक्षेत्र को शामिल किया गया. साथ ही किसान विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर इन केंद्रों से बीज प्राप्त कर सकते हैं. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपने नजदीकी मत्स्य कार्यालय में संपर्क कर आवश्यक जानकारी प्राप्त करें ताकि बीज वितरण शुरू होते ही उन्हें लाभ मिल सके.

स्पान और फ्राई भी रियायती दरों पर उपलब्ध

मत्स्य विभाग केवल फिंगरलिंग ही नहीं बल्कि स्पान और फ्राई भी किसानों को उपलब्ध कराता है. विभाग के अनुसार शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों में स्पान लगभग 600 से 650 रुपये प्रति लाख की दर से उपलब्ध कराया जाता है. वहीं फ्राई और संवर्धित बीज किसानों को रियायती और अनुदानित दरों पर मुहैया कराया जाते हैं इसके अलावा, दरें समय-समय पर विभाग द्वारा तय की जाती हैं और विभिन्न प्रजातियों के अनुसार इनमें बदलाव भी किया जा सकता है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे बीज खरीदने से पहले विभागीय अधिकारियों से वर्तमान दरों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Good News Fish Farmers 50 Percent Subsidy Rohu Catla-Fish Seeds
Published on: 08 June 2026, 04:54 PM IST

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