किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है कि अब गोबर और जैविक कचरा केवल खेतों की खाद या फिर ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों, ग्रामीण उद्यमियों के लिए यह कमाई का जरिया बनेगा. केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 23,731 करोड़ रुपये की लागत वाली Gobardhan योजना को मंजूरी दी है, जिससे आय में वृद्धि होने की संभावना बढ़ेंगी.
कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा
देश में हर साल फसल कटाई के बाद फसल की पराली और शहरों के जैविक कचरे को जला दिया जाता है, जिससे हर साल शहरों में प्रदूषण पूरे शहर की हवा को दूषित कर देता हैं, लेकिन अब यह परेशानी नहीं आएंगी. नई योजना के तहत इन्हीं संसाधनों का उपयोग करके कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार की जाएगी. इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, प्रदूषण कम होगा.
सरकार खरीदेगी आपकी गैस
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत गैस की खरीद की गारंटी है. आमतौर पर किसी भी नए व्यवसाय में सबसे बड़ी चिंता तैयार उत्पाद की बिक्री होती है, लेकिन 'गोबरधन' योजना में यह समस्या काफी हद तक खत्म कर दी गई है. साथ ही सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए अनिवार्य लक्ष्य तय किए हैं. इन कंपनियों को निर्धारित प्रतिशत में CBG खरीदनी होगी.
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2026-27 में कुल गैस का 3%
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2027-28 में 4%
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2028-29 से 5%
प्लांट लगाने के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता
बायोगैस प्लांट स्थापित करने में बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार पूंजीगत सहायता भी उपलब्ध कराएगी. यानी की नई CBG इकाई लगाने या मौजूदा इकाई का विस्तार करने पर सरकार प्रति टन प्रतिदिन क्षमता के हिसाब से 2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेंगी.
कब योजना को लागू किया जाएगा?
'गोबरधन' योजना लागू होने को लेकर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सूचना प्रसारण मंत्री का कहना है कि यह सरकारी स्कीम 2026-27 से 2035-36 तक में लागू की जाएगी. इससे बेकार कचरे से ईधन तैयार किया जाएगा, जिससे किसानों की इनकम में बढ़ोतरी होने की संभावनाएं बढ़ेंगी.
लेखक: रवीना सिंह