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Updated on: 3 November, 2026 10:41 AM IST
हैदराबाद में आयोजित पहला अंतर्राष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026

'बदलती दुनिया में भोजन, पशु-आहार, चारा, ईंधन और स्थिरता के लिए मक्का क्रांति' (M4FS) विषय पर पहला अंतर्राष्ट्रीय मक्का सम्मेलन आज हैदराबाद के जेडी कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुआ. इस सम्मेलन में मक्का अनुसंधान, उत्पादकता और वैल्यू-चेन विकास को आगे बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कृषि संस्थान और उद्योग से जुड़े हितधारक एकजुट हुए.

इस सम्मेलन में अधिक उपज देने वाली किस्मों और संकरों (हाइब्रिड), बेहतर पोषण गुणवत्ता, संसाधनों के कुशल उपयोग, मशीनीकरण, मजबूत बीज प्रणालियों और खाद्य, पशु आहार, चारे तथा ऊर्जा सुरक्षा में मक्के की बढ़ती भूमिका के बारे में चर्चा की गई.

सम्मेलन में डीएआरई के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने मक्का अनुसंधान समुदाय को बधाई दी. उन्होंने बताया कि भारत में मक्के का उत्पादन लगभग 55 मिलियन टन तक पहुंच गया है और पिछले एक दशक में उत्पादकता में भी काफी वृद्धि हुई है. उन्होंने अगले दशक में उत्पादन को बढ़ाकर 75 मिलियन टन करने का आह्वान किया. इसके साथ ही, उन्‍होंने तकनीकी नवाचार, बेहतर फसल प्रबंधन और संसाधनों के कुशल उपयोग के माध्यम से उत्पादकता को 1.5 गुना और बढ़ाने पर जोर दिया.

डॉ. जाट ने पारंपरिक '4एफ' विज़न—भोजन (फूड), पशु आहार (फीड), चारा (फॉडर) और ईंधन (फ्यूल)—का विस्तार करके '5एफ' करने पर ज़ोर दिया, जिसमें किसानों को केंद्र में रखा गया है. उन्होंने कहा कि शोध और विस्तार कार्यों का परिणाम किसानों के लिए अधिक मुनाफ़े और बेहतर आजीविका के रूप में नजर आना चाहिए. उन्होंने पैदावार के अंतर को कम करने, विशेषरूप से फसल प्रबंधन से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए प्रणाली-विज्ञान (सिस्‍टम-साइंस) दृष्टिकोण अपनाने की हिमायत की.

उन्होंने सुझाव दिया कि मक्के की खेती को अलग-अलग मौसमों और कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से बढ़ावा दिया जाए, लेकिन ध्यान रहे कि इससे अन्य महत्वपूर्ण फसलों, विशेषकर तिलहन और दलहन की खेती पर कोई नकारात्मक असर न पड़े. उन्होंने मज़बूत बीज प्रणाली के ज़रिए, विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा विकसित हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया.

आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने मक्के को खाद्य, पोषण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक 'आदर्श फसल' बताया. पिछले पांच वर्षों में मक्के के अनुसंधान और विस्तार कार्यों में हुई प्रगति—जिसमें 329 हाइब्रिड किस्मों का विकास शामिल है—का ज़िक्र करते हुए उन्होंने 'ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन मेज़' (मक्‍का पर एआईसीआरपी) को और मज़बूत करने का आह्वान किया. उन्होंने अधिक पैदावार, बेहतर पोषण गुणवत्ता और जैविक तथा अजैविक तनावों के प्रति सहनशीलता विकसित करने पर ज़ोर दिया. इसके साथ ही, उन्होंने इनपुट के कुशल उपयोग, मशीनीकरण, क्षमता विकास और सार्वजनिक क्षेत्र में हाइब्रिड बीजों के उत्पादन को मज़बूत करने की बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि मक्के का उपयोग इथेनॉल बनाने के कच्चे माल (फिडस्‍टॉक) के रूप में हो सके, इसके लिए अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच आपसी सहयोग ज़रूरी है.

सीआईएमएमवाईटी से जुड़े प्रख्यात मक्का वैज्ञानिक और 'वर्ल्ड फ़ूड लॉरेट' पद्म श्री डॉ. एस. वसल ने किसानों की ज़रूरतों के अनुरूप बेहतर किस्मों और हाइब्रिड बीजों के विकास में तेज़ी लाने के लिए सरल और किफायती 'ब्रीडिंग' तरीकों को अपनाने को कहा.

मुख्य अतिथि और डीएआरई के पूर्व सचिव तथा आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक, पद्म भूषण डॉ. आर. एस. परोदा ने ज़ोर दिया कि अनुसंधान की प्राथमिकताओं को कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की बदलती ज़रूरतों अनुरूप निर्धारित किया जाना चाहिए. उन्होंने उन्नत 'ब्रीडिंग' तकनीकों के अधिक उपयोग, 'जर्मप्लाज्म' के व्यवस्थित संरक्षण और उपयोग, मक्के की मज़बूत 'वैल्यू चेन' बनाने और 'एफ्लाटॉक्सिन' के प्रभावी प्रबंधन पर ज़ोर दिया, ताकि भोजन और पशु आहार के रूप में मक्के की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके.

इससे पहले, मेज़ टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमटीएआई) के अध्यक्ष डॉ. एच. एस. जाट ने अतिथियों का स्वागत किया और भारत के कृषि परिवर्तन में मक्के के रणनीतिक महत्व के बारे में बताया. उन्होंने उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग का आह्वान किया.

कार्यक्रम के दौरान कई वैज्ञानिक प्रकाशन जारी किए गए और मक्के के अनुसंधान एवं विकास में योगदान के लिए प्रमुख वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए.

सम्मेलन में उपज के अंतर को कम करने, बीजों की उपलब्धता बढ़ाने, ब्रिडिंग कार्यक्रमों को मजबूत करने, पोषण गुणवत्ता बढ़ाने और मक्के की टिकाऊ मूल्य श्रृंखला विकसित करने के लिए किसानों पर केंद्रित सहयोगात्मक अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया गया. 2 से 4 नवंबर, 2026 तक हैदराबाद में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक ऐसा मंच प्रदान करता है, जहां वे भारत में मक्के के क्षेत्र को उत्पादक, लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए एक रोडमैप तैयार कर सकें.

English Summary: first international maize conference 2026 hyderabad focus on high yield hybrid seeds and farmer centric research
Published on: 03 November 2026, 10:46 AM IST

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