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Updated on: 10 June, 2026 9:35 PM IST
खेत बचाओ अभियान श्रृंखला दसवाँ दिन

पीढ़ियों से किसान मृदा की उर्वरता बनाए रखने और स्वस्थ फसल उत्पादन के लिए प्राकृतिक खादों पर निर्भर रहे हैं। सभी जैविक खादों में गोबर की खाद (FYM) सबसे उपयोगी और विश्वसनीय खादों में से एक है। यह खेतों में आसानी से उपलब्ध होती है, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करती है तथा दीर्घकालिक उत्पादकता को बनाए रखने में सहायता करती है। आज की कृषि में, जहाँ मृदा उर्वरता और खेती की लागत प्रमुख चिंताएँ हैं, वहाँ गोबर की खाद (FYM) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

FYM क्या है?

FYM पशुओं के गोबर, मूत्र, बचा हुआ चारा तथा बिछावन सामग्री (Bedding materials) जैसे पुआल, सूखी पत्तियाँ और फसल अवशेषों के अच्छी तरह सड़े-गले मिश्रण को कहा जाता है, जिसे पशुशालाओं से एकत्र किया जाता है। ताजा गोबर और मूत्र को FYM नहीं कहा जाता। वे तभी FYM बनते हैं जब उनका उचित अपघटन (Decomposition) हो जाता है। अपघटन की प्रक्रिया के दौरान सूक्ष्मजीव इन अपशिष्ट पदार्थों को तोड़कर उन्हें गहरे रंग की, मुलायम तथा पोषक तत्वों से भरपूर खाद में परिवर्तित कर देते हैं, जिसे पौधे आसानी से उपयोग कर सकते हैं।

कृषि में FYM का महत्व

मिट्टी किसान के लिए एक बैंक के समान है। यदि प्रत्येक मौसम में मिट्टी से पोषक तत्व निकाले जाते रहें और उनकी भरपाई न की जाए, तो मिट्टी कमजोर हो जाती है। FYM मिट्टी को पुनः पोषक तत्व और जैविक पदार्थ प्रदान करने में मदद करती है। यह मिट्टी की संरचना में सुधार करती है, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को बढ़ावा देती है तथा फसलों को अधिक सशक्त बनाती है। इसके अलावा, यह उर्वरकों की हानि को कम करती है और उर्वरकों के उपयोग की दक्षता बढ़ाती है।

FYM कैसे तैयार करें?

अच्छी गुणवत्ता वाली FYM के लिए अपशिष्ट पदार्थों का उचित संग्रहण तथा उनका सही ढंग से अपघटन आवश्यक है।

ट्रेंच या पिट विधि अथवा ढेर विधि (Heap Method) :

खाद को खुले मैदान में ढेर लगाकर रखने की पुरानी प्रथा से बहुमूल्य पोषक तत्वों की काफी हानि होती है। धूप खाद को सुखा देती है और वर्षा का पानी उसके पोषक तत्वों को बहा ले जाता है। ट्रेंच या पिट विधि पोषक तत्वों के अधिकतम संरक्षण के लिए सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है।

  1. ट्रेंच कैसे तैयार करें: ऐसी ऊँची जगह का चयन करें जहाँ वर्षा का पानी जमा न होता हो। सुविधा के अनुसार 6–8 मीटर लंबी, 1.5–2 मीटर चौड़ी तथा लगभग 1 मीटर गहरी गड्ढा खोदें।

  2. पशुशाला से निकलने वाले अपशिष्ट का प्रतिदिन संग्रह करें: प्रतिदिन सुबह पशुओं का गोबर, मूत्र से भीगा बिछावन (लिटर) तथा बचा हुआ चारा एकत्र करें। गड्ढा के तल में सबसे पहले सूखे फसल अवशेषों की एक परत बिछाएँ ताकि तरल पदार्थों का अवशोषण हो सके। पशुओं का मूत्र अत्यंत मूल्यवान होता है क्योंकि इसमें नाइट्रोजन और पोटाश प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसे बहकर नष्ट नहीं होने देना चाहिए।

  3. गड्ढा को क्रमवार भरें: गड्ढा के एक सिरे से भरना प्रारंभ करें। अपशिष्ट पदार्थों को अच्छी तरह दबाकर भरें। जब किसी भाग की ऊँचाई भूमि सतह से लगभग 1.5 फुट ऊपर पहुँच जाए, तो उसे छत के समान गोलाकार गुंबद (Dome) का आकार दें।

  4. मिट्टी से सील करें: ऊपरी गोलाकार सतह पर मिट्टी और गोबर के गाढ़े मिश्रण का लेप करें। यह लेप ढक्कन की तरह कार्य करता है, जिससे वर्षा का पानी अंदर नहीं जाता, पोषक तत्वों की हानि रुकती है तथा खाद धूप और वर्षा दोनों से सुरक्षित रहती है।

  5. नमी बनाए रखें: सामग्री को नम रखें, लेकिन अत्यधिक गीला न होने दें। यदि खाद बहुत सूखी होगी तो अपघटन की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। वहीं, अत्यधिक नमी होने पर पोषक तत्वों की हानि तथा दुर्गंध की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

  6. आवश्यकता पड़ने पर पलटाई करें: एक या दो बार पलटाई करने से खाद का अपघटन समान रूप से होता है। इसके बाद इसे पूरी तरह सड़ने-गलने तक छोड़ दें।

FYM तैयार होने में कितना समय लगता है?

सामान्यतः गर्म मौसम में FYM तैयार होने में 3 से 4 महीने का समय लगता है। शीत ऋतु अथवा शुष्क मौसम में यह अवधि 4 से 6 महीने तक हो सकती है। FYM तैयार होने का समय निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:

  • नमी (Moisture)

  • तापमान (Temperature)

  • उपयोग किए गए अवशेषों का प्रकार

  • पलटाई (Turning)

  • भंडारण की विधि

कैसे पहचानें कि FYM तैयार हो चुकी है?

  • रंग परीक्षण (Color Test): तैयार FYM अपना मूल पीला-भूरा रंग खो देती है और गहरे भूरे या लगभग काले रंग की हो जाती है।

  • गंध परीक्षण (Smell Test): तैयार FYM में कच्चे गोबर या अमोनिया जैसी दुर्गंध नहीं होनी चाहिए। इसके स्थान पर उसमें पहली वर्षा के बाद नम मिट्टी जैसी सुखद प्राकृतिक गंध आनी चाहिए।

  • बनावट परीक्षण (Texture Test): बिछावन में प्रयुक्त पुआल या फसल अवशेषों की मूल संरचना पूरी तरह समाप्त हो जानी चाहिए। खाद भुरभुरी, हल्की तथा महीन दानों वाली होनी चाहिए, जो उँगलियों के बीच आसानी से ढीली मिट्टी की तरह बिखर जाए।

  • अवशेष परीक्षण: यदि खाद में अभी भी पुआल या भूसे के बड़े-बड़े टुकड़े दिखाई दे रहे हैं, तो समझिए कि अपघटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और खाद को तैयार होने में अभी कुछ समय और लगेगा।

FYM में पोषक तत्वों की मात्रा

FYM में पोषक तत्वों की मात्रा पशुओं के प्रकार, उनके आहार तथा खाद के भंडारण एवं प्रबंधन की विधि के अनुसार भिन्न हो सकती है। सामान्यतः अच्छी तरह सड़ी-गली FYM में निम्नलिखित औसत पोषक तत्व पाए जाते हैं:

  • नाइट्रोजन (N): लगभग 0.5%

  • फॉस्फोरस (P₂O₅): लगभग 0.2%

  • पोटाश (K₂O): लगभग 0.5%

इसके अतिरिक्त FYM पौधों को गंधक (सल्फर), कैल्शियम तथा मैग्नीशियम जैसे द्वितीयक पोषक तत्व भी प्रदान करती है। साथ ही इसमें जस्ता (जिंक), लोहा (आयरन), बोरॉन तथा तांबा (कॉपर) जैसे महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व भी उपलब्ध होते हैं। पोषक तत्वों की आपूर्ति के अलावा, FYM मिट्टी को मूल्यवान जैविक कार्बन (Organic Carbon) भी प्रदान करती है।

50 किलोग्राम नाइट्रोजन की पूर्ति हेतु कितनी गोबर की खाद (FYM) आवश्यक है?

गोबर की खाद (FYM) में औसतन 0.5% नाइट्रोजन पाई जाती है। इसका अर्थ है कि 100 किलोग्राम FYM से लगभग 0.5 किलोग्राम नाइट्रोजन प्राप्त होती है। अतः 50 किलोग्राम नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए लगभग:

50 ÷ 0.5 × 100 = 10,000 किलोग्राम FYM की आवश्यकता होगी।

इस प्रकार, 50 किलोग्राम नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर लगभग 10 टन गोबर की खाद (FYM) का प्रयोग करना चाहिए।

हालाँकि, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, गोबर की खाद में पोषक तत्वों की मात्रा पशु के प्रकार, उसके आहार तथा खाद के प्रबंधन की विधि के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकती है। इसलिए वास्तविक आवश्यकता परिस्थितियों के अनुसार कुछ कम या अधिक हो सकती है।

पोषक तत्वों की हानि से बचने के लिए सावधानियाँ

गोबर की खाद (FYM) के निर्माण, भंडारण तथा उपयोग के दौरान उचित सावधानी बरतकर पोषक तत्वों की होने वाली हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।

  1. पशु मूत्र की हानि रोकें: पशुओं के मूत्र में नाइट्रोजन एवं पोटाश जैसे मूल्यवान पोषक तत्व होते हैं। मूत्र को अवशोषित करने के लिए बिछावन सामग्री (जैसे भूसा, सूखी पत्तियाँ आदि) का उपयोग करें।

  2. खाद को ढककर रखें: तेज धूप और भारी वर्षा से पोषक तत्वों की हानि होती है। धूप के कारण नाइट्रोजन गैस के रूप में उड़ जाती है (वाष्पीकरण), जबकि वर्षा का पानी घुलनशील पोषक तत्वों को मिट्टी की गहरी परतों में बहा ले जाता है, जहाँ पौधों की जड़ें उन्हें ग्रहण नहीं कर पातीं।

  3. गोबर को खुले खेत में न छोड़ें: खुले में पड़े गोबर के सूखने से नाइट्रोजन की हानि होती है। इसलिए गोबर को एकत्रित कर उचित स्थान पर खाद बनाने हेतु रखें।

  4. उचित नमी बनाए रखें: खाद के ढेर में पर्याप्त नमी होनी चाहिए ताकि अपघटन (सड़ने-गलने) की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके। अत्यधिक सूखने पर अपघटन रुक जाता है, जबकि अधिक पानी भर जाने पर लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि प्रभावित होती है।

  5. अच्छी तरह सड़ी-गली FYM का प्रयोग करें: बुवाई से पहले अच्छी तरह विघटित (सड़ी-गली) गोबर की खाद खेत में डालकर मिट्टी में मिला दें। यदि खाद पूरी तरह तैयार नहीं है, तो उसे विघटित होने के लिए पर्याप्त समय दें।

  6. लंबे समय तक खुले में भंडारण से बचें: खाद को लंबे समय तक खुले वातावरण में रखने से उसकी पोषक गुणवत्ता घटती जाती है। इसलिए खाद का समय पर उपयोग करें।

  7. गड्ढे या सघन फर्श का उपयोग करें: खाद को गड्ढे में या पक्के/सघन आधार पर संग्रहित करने से पोषक तत्वों के रिसाव (लीचिंग) को रोका जा सकता है और खाद की गुणवत्ता बनी रहती है।

अपूर्ण रूप से सड़ी हुई गोबर खाद (FYM) के दुष्प्रभाव

कई किसान जल्दबाजी में कच्ची (Raw) या आधी-सड़ी हुई गोबर खाद का खेत में प्रयोग कर देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। अपूर्ण रूप से विघटित (अपूर्ण ) गोबर खाद के उपयोग से अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

अपूर्ण रूप से सड़ी हुई गोबर खाद के प्रयोग से नाइट्रोजन की अवशोषण (Nitrogen Lock-up) की स्थिति बन जाती है। खाद में उपस्थित ताजे कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए सूक्ष्मजीव मिट्टी की उपलब्ध नाइट्रोजन का उपयोग करने लगते हैं, जिससे फसलों में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। कच्ची गोबर खाद सफेद सूंडी (White Grubs) तथा दीमक जैसे कीटों को आकर्षित करती है, जो फसलों की जड़ों को नुकसान पहुँचाते हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें हानिकारक फफूंद (Fungi) भी मौजूद हो सकती हैं, जो पौधों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। पशुओं के गोबर में अनेक खरपतवारों के बीज पाए जाते हैं। यदि खाद पूरी तरह से सड़ी हुई नहीं है, तो ये बीज जीवित रहते हैं और खेत में पहुँचकर तेजी से अंकुरित हो जाते हैं, जिससे खरपतवारों की समस्या बढ़ जाती है। ताजी या कच्ची खाद के प्रयोग से मिट्टी का तापमान बढ़ सकता है, जिससे पौधों की जड़ों को क्षति पहुँचने की संभावना रहती है। साथ ही, ऐसी खाद से दुर्गंध उत्पन्न होती है तथा खेत में असमान परिस्थितियाँ बन जाती हैं। अपूर्ण रूप से सड़ी हुई गोबर खाद से पोषक तत्व समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते, जिसके कारण पौधों की वृद्धि धीमी पड़ जाती है और फसल के विकास एवं उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

FYM (गोबर की सड़ी हुई खाद) का उपयोग क्यों करें

किसी भी कृषि आदान की तरह, एफवाईएम (Farmyard Manure) के अनेक लाभ हैं, लेकिन इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएँ भी हैं।  

FYM के प्रमुख लाभ

  1. मृदा संरचना में सुधार: गोबर की खाद स्पंज की तरह कार्य करती है। यह भारी चिकनी (क्ले) मिट्टी को भुरभुरी बनाती है तथा हल्की रेतीली मिट्टी के कणों को आपस में बाँधकर उसकी संरचना में सुधार करती है।

  2. जल धारण क्षमता बढ़ाती है: गोबर की खाद मिली हुई मिट्टी लंबे समय तक नमी बनाए रखती है, जिससे फसलें सूखे की स्थिति में भी बेहतर ढंग से जीवित रह पाती हैं।

  3. जल निकास में सुधार: भारी मिट्टियाँ अधिक छिद्रयुक्त (Porous) बन जाती हैं, जिससे अतिरिक्त पानी का निकास सुचारु रूप से होता है।

  4. सभी प्रकार के पोषक तत्व उपलब्ध कराती है: रासायनिक उर्वरक सामान्यतः केवल एक या दो पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जबकि गोबर की खाद पौधों की आवश्यकता वाले लगभग सभी प्रमुख, गौण एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे जस्ता, लोहा आदि) की थोड़ी-थोड़ी मात्रा उपलब्ध कराती है।

  5. मृदा के जीवों को पोषण देती है: यह केंचुओं तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का कार्य करती है। ये जीव मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों को पौधों के लिए सुलभ बनाने में सहायता करते हैं।

  6. लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाती है: गोबर की खाद मिट्टी की जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देती है तथा सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को प्रोत्साहित करती है।

  7. उर्वरकों की दक्षता बढ़ाती है: गोबर की खाद के साथ रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करने पर पोषक तत्वों का संरक्षण बेहतर होता है और उनकी उपयोग दक्षता बढ़ती है।

  8. दीर्घकालीन मृदा उर्वरता बनाए रखती है: यह वर्ष-दर-वर्ष मिट्टी की उत्पादकता को बनाए रखने में मदद करती है।

  9. पर्यावरण के अनुकूल एवं किफायती: इसे गोबर तथा खेत के जैविक अवशेषों से स्थानीय स्तर पर तैयार किया जा सकता है। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता और उत्पादन लागत भी कम रहती है।

  10. फसल वृद्धि एवं उपज में सुधार: गोबर की खाद स्वस्थ जड़ विकास, मजबूत पौधों तथा बेहतर उपज प्राप्त करने में सहायक होती है।

FYM की सीमाएँ

  • रासायनिक उर्वरकों की तुलना में इसमें पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है।

  • भारी मात्रा में खाद को लोड करना, परिवहन करना तथा खेत में फैलाना समय एवं श्रम-साध्य कार्य है।

  • इसकी गुणवत्ता एवं पोषक तत्वों की मात्रा विभिन्न खेतों और प्रबंधन पद्धतियों के अनुसार भिन्न हो सकती है।

  • उच्च गुणवत्ता वाली गोबर की खाद तैयार करने के लिए पर्याप्त समय, धैर्य एवं उचित प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

  • इसके भंडारण के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि इसका आयतन अधिक होता है।

  • इसमें उपस्थित पोषक तत्व धीरे-धीरे उपलब्ध होते हैं क्योंकि खाद को पहले विघटित होना पड़ता है।

  • यह दीर्घकालीन मृदा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है, लेकिन यदि फसल तत्काल पोषक तत्वों की कमी से प्रभावित हो रही हो, तो केवल गोबर की खाद उसकी तत्काल आवश्यकता पूरी नहीं कर सकती।

किसानों के लिए संदेश

गोबर की खाद केवल पशुओं का अपशिष्ट नहीं, बल्कि एक बहुमूल्य कृषि संसाधन है। उचित विधि से तैयार की गई गोबर की खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम करती है, फसल वृद्धि में सहायता करती है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की उत्पादकता को सुरक्षित बनाए रखती है। इसलिए प्रत्येक किसान को गोबर की खाद का नियमित एवं वैज्ञानिक उपयोग करना चाहिए।

लेखकगण : गौस अली, अनुप दास एवं राकेश कुमार

English Summary: Farmyard Manure Fym Benefits for Soil Health Save Farm Campaign Day-10
Published on: 10 June 2026, 09:54 PM IST

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