RFOI Award 2025: UP के सफल किसान मनोहर सिंह चौहान को मिला RFOI अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI - First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI Award 2025: केरल के मैथ्यूकुट्टी टॉम को मिला RFOI Second Runner-Up Award, 18.62 करोड़ की सालाना आय से रचा इतिहास! Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 21 September, 2023 4:51 PM IST
Dumped Wheat in Market

Farmer's wheat loss: इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) ने अनुमान लगाया है कि बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा बाजार में गेहूं डंप करने के बाद देश में किसानों को लगभग 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ हैं. इस बड़े नुकसान के बाद, आईसीआरआईईआर (ICRIER) ने यह चेतावनी दी है कि अगर सरकार की ऐसी प्रतिबंधात्मक नीतियां आने वाले समय में धान, दाल और गन्ना पर भी लगाती है तो यह किसानों के खरीद के सीजन में उन्हें और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है.

आकड़ों के अनुसार, 2022-23 में देश में कुल 112 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था और 2023-24 के रबी सीज़न में एक क्विंटल गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,125 रुपये और खुले बाजार में 2,673 रुपये पर बेचा गया था.

गेहूं उत्पादन करने वाले किसानों को हुए नुकसान का कारण बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने इस साल फरवरी में खुले बाजार में बिक्री योजना (ओएमएसएस) शुरू की थी, जिसके तहत गेहूं को 2,350 रुपये प्रति क्विंटल और फिर 2150 रुपये प्रति क्विंटल की कम कीमत पर बेचा गया था ताकि इस घरेलू कीमतों को स्थिर किया जा सकें.

ये भी पढ़ें: हुंडई ने की नई एलांट्रा एन लॉन्च, जानें इसके खास फीचर्स

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बाजार के इस हस्तक्षेप के बिना, किसान गेहूं की बिक्री से संभावित रूप से 2,673 रुपये में कर सकते थे जो 548 रुपये अधिक थी.इं डियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस ने सरकार को सुझाव दिया है कि किसानों की कमाई को नुकसान पहुंचाए बिना घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने का दूसरा उपाय सोचा जा सकता है और व्यापार नीति को विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग किया जा सकता है ताकि किसानों को आगे इस तरह के होने वाले एक बड़े नुकसान से बचाया जा सके.

English Summary: Farmers Lost Rs 40,000 Crore After Govt Dumped Wheat in Market
Published on: 21 September 2023, 04:56 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now