Success Story: रासायनिक खेती का खर्च घटाकर जैविक खेती की ओर बढ़े वीरेंद्र सिंह, जायडेक्स की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी से गेहूं की खेती में मिला फायदा बिहार में बदलेगी बागवानी की तस्वीर! वैज्ञानिकों ने उगाया एवोकाडो, ₹1500 किलो तक बिकता है फल Success Story: बैंगनी धान और गेहूं की खेती से किसानों की बदली तक़दीर, प्रति हेक्टेयर हो रही 1,60,000 रुपये तक की आमदनी! Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 2 September, 2026 11:21 AM IST
एलोरा लौकी ‘सम्राट-7759’

लौकी भारत की प्रमुख सब्जी फसलों में शामिल है और इसकी खेती खरीफ के साथ-साथ ग्रीष्म मौसम में भी की जाती है. कम अवधि में उत्पादन देने वाली और आकर्षक फल वाली किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती हैं. इसी कड़ी में एलोरा लौकी ‘सम्राट-7759’ एक उन्नत किस्म के रूप में सामने आती है. इस किस्म के फल चमकीले हरे रंग के, बेलनाकार और करीब 30-35 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. इसकी पहली तुड़ाई लगभग 50-55 दिन बाद शुरू हो सकती है. खास बात यह है कि इसे खरीफ और ग्रीष्म दोनों मौसमों के लिए उपयुक्त बताया गया है. साथ ही, यह किस्म सफेद एवं काली फफूंदी, फल मक्खी और कुछ बीमारियों के प्रति सहनशीलता के लिए भी है.

एलोरा लौकी ‘सम्राट-7759’ की खासियत

एलोरा लौकी सम्राट-7759 सब्जी उत्पादन के लिए विकसित की गई उन्नत लौकी किस्म है. इसके फल का आकार बेलनाकार होता है और फल का रंग आकर्षक हरा रहता है. सब्जी बाजार में फल का आकार, रंग और एकरूपता किसानों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इस लिहाज से सम्राट-7759 के समान आकार और आकर्षक रंग वाले फल बाजार में अच्छे कीमत पर बिक सकते हैं.

30-35 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं फल

इस किस्म की प्रमुख विशेषताओं में इसके फलों की लंबाई भी शामिल है. सम्राट-7759 के फल करीब 30-35 सेंटीमीटर लंबे हो सकते हैं. फलों का बेलनाकार आकार और हरा रंग इसे सामान्य बाजार मांग के अनुरूप बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, वास्तविक फल का आकार और उत्पादन मिट्टी, मौसम, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और खेती की तकनीक पर निर्भर कर सकता है.

50-55 दिन में शुरू हो सकती है पहली तुड़ाई

किसानों के लिए किसी सब्जी की पहली तुड़ाई का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. एलोरा सम्राट-7759 की पहली तुड़ाई लगभग 50-55 दिन बाद शुरू हो सकती है. जल्दी उत्पादन शुरू होने वाली सब्जी किस्मों में किसान समय पर बाजार तक उपज पहुंचाने की योजना बना सकते हैं. हालांकि, पहली तुड़ाई का वास्तविक समय स्थानीय जलवायु, फसल प्रबंधन और खेती की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

खरीफ और ग्रीष्म दोनों मौसम के लिए उपयुक्त

सम्राट-7759 को खरीफ और ग्रीष्म मौसम में खेती के लिए उपयुक्त है. इससे किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल लगाने का समय तय कर सकते हैं.

लौकी की खेती में सही मौसम का चयन, खेत की तैयारी, सिंचाई और बेलों के उचित प्रबंधन का उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है. इसलिए किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बुवाई का समय निर्धारित करना चाहिए.

फलों की गुणवत्ता और आकर्षक रंग

सम्राट-7759 के फल चमकीले हरे रंग और बेलनाकार होते हैं. सब्जियों में आकर्षक रंग और अच्छी बाहरी गुणवत्ता उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित कर सकती है. इसलिए बाजार के लिए उत्पादन करने वाले किसान ऐसी किस्मों की विशेषताओं को ध्यान में रखकर खेती की योजना बना सकते हैं.

रोग और कीटों के प्रति सहनशीलता

एलोरा सम्राट-7759 को सफेद एवं काली फफूंदी, फल मक्खी और कुछ बीमारियों के प्रति है. फिर भी सहनशील किस्म होने का अर्थ यह नहीं है कि फसल पूरी तरह रोग और कीटों से सुरक्षित रहेगी. खेत में नियमित निगरानी, साफ-सफाई, उचित सिंचाई, संतुलित पोषण और समय पर रोग-कीट पहचान जरूरी है. किसी भी कृषि रसायन का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए.

किसानों के लिए क्यों हो सकती है उपयोगी?

कम अवधि में पहली तुड़ाई, 30-35 सेंटीमीटर तक लंबे फल, आकर्षक हरा रंग और खरीफ व ग्रीष्म मौसम में खेती की उपयुक्तता जैसी विशेषताएं इस किस्म को सब्जी उत्पादकों के लिए विचार करने योग्य विकल्प बनाती हैं. हालांकि, किसी भी किस्म को बड़े क्षेत्र में लगाने से पहले किसानों को अपने क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, सिंचाई सुविधा और स्थानीय बाजार को ध्यान में रखना चाहिए. साथ ही, बीज की प्रमाणिकता और कंपनी द्वारा दिए गए खेती संबंधी निर्देशों की जांच करना भी जरूरी है.

बेहतर उत्पादन के लिए फसल प्रबंधन जरूरी

लौकी की अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी से लेकर बेलों के विकास और फल तुड़ाई तक उचित प्रबंधन आवश्यक है. पर्याप्त धूप, जल निकास वाली मिट्टी, संतुलित पोषण और जरूरत के अनुसार सिंचाई फसल की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

बेल वाली फसल होने के कारण लौकी में सहारा और बेलों का उचित फैलाव भी फसल प्रबंधन का अहम हिस्सा है. नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करने से रोग और कीटों की शुरुआती पहचान की जा सकती है.

English Summary: Elora samrat 7759 bottle gourd variety features yield first harvest kharif summer farming
Published on: 02 September 2026, 11:25 AM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now