"साहित्य, कृषि और जनजातीय सरोकारों के संगम पर मिला सम्मान, काली मिर्च की क्रांतिकारी किस्म व नेचुरल ग्रीनहाउस मॉडल को राष्ट्रीय स्वीकृति"
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छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल, रायपुर के 85-वें स्थापना समारोह में डॉ. राजाराम त्रिपाठी सम्मानित
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राष्ट्रीय कृषि रत्न अवार्ड’ कृषि नवाचारों, आदिवासी उत्थान और जैविक खेती में योगदान हेतु मिला
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चार गुना उत्पादन देने वाली बस्तर की काली मिर्च की नई प्रजाति MDBP-16 एवं 'नेचुरल ग्रीनहाउस' मॉडल को राष्ट्रीय पहचान
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सम्मान को परिजनों, मां दंतेश्वरी हर्बल समूह एवं साथी आदिवासी समुदाय किसानों को किया समर्पित
रायपुर स्थित 85 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक संस्था छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल के 85वें स्थापना समारोह का आयोजन 28 फरवरी 2026 को वृंदावन (बड़ा हॉल), सिविल लाइंस, रायपुर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ. प्रदेश के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शोधकर्ताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, साहित्यकार एवं जनजातीय चिंतक डॉ. राजाराम त्रिपाठी को “राष्ट्रीय कृषि रत्न अवार्ड” से सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम के उद्घाटक राजर्षि महंत डॉ. रामसुंदर दास जी, सर्वाधिकार, दूधाधारी मठ, रायपुर रहे. प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. इंदिरा मिश्र (आई.ए.एस.) ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में आयुर्वेद विश्व परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजाराम त्रिपाठी उपस्थित रहे. विशिष्ट अतिथियों में मुख्य वक्ता राजकवि डॉ. बृजेश सिंह, प्रसिद्ध रंगकर्मी विजय मिश्रा, मोटिवेशनल लेखक डॉ जेपी डागर, समाजसेवी लेखक, अधिवक्ता अंबर शुक्ल अम्बरीष शामिल रहे. द्वितीय सत्र में आयोजित कवि दरबार की अध्यक्षता डॉ. संजय अलंग ने की.
कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन संस्था के विगत 15 वर्षों से लगातार संस्था की अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे प्रसिद्ध समाजसेवी वरिष्ठ लेखक अध्यक्ष आचार्य इंजीनियर अमरनाथ त्यागी, उपाध्यक्ष श्रीमती ललिता भावे, प्रधान सचिव गोपाल सोलंकी, प्रमुख सचिव सुनील पांडे एवं सचिव तेजपाल सोनी के नेतृत्व में हुआ. वरिष्ठ कवि सुनील पांडे के द्वारा मंच का कुशल संचालन लोगों को बहुत भाया.
इस अवसर पर डॉ. राजाराम त्रिपाठी को कृषि क्षेत्र में उनके अभिनव कार्यों, विशेषकर दक्षिण भारत से बाहर पहली बार सफलतापूर्वक विकसित की गई उच्च उत्पादक काली मिर्च की नई प्रजाति के विकास के लिए सम्मानित किया गया, जो सामान्य किस्मों की तुलना में चार गुना तक अधिक उत्पादन देती है और जिसकी गुणवत्ता राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार की जा रही है. इसके साथ ही उनके द्वारा विकसित नेचुरल ग्रीनहाउस मॉडल को पर्यावरण संरक्षण, रासायनिक निर्भरता में कमी, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से मुकाबला तथा किसानों की आय वृद्धि का प्रभावी समाधान माना जा रहा है.
लगभग बारह वर्षों से जनजातीय सरोकारों पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर की दिल्ली से प्रकाशित लोकप्रिय मासिक पत्रिका ककसाड़ के संपादक रहे डॉ. त्रिपाठी सात बार सर्वश्रेष्ठ किसान सम्मान प्राप्त कर चुके हैं. वे एक संवेदनशील कवि एवं वरिष्ठ लेखक के रूप में भी प्रतिष्ठित हैं तथा कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आयुर्वेद, पर्यावरण और जनजातीय विषयों पर देश के प्रमुख समाचार पत्रों के संपादकीय पृष्ठों पर नियमित रूप से उनके लेख प्रकाशित होते हैं. उनकी सात से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें हाल में प्रकाशित शोधग्रंथ “गांडा अनुसूचित जाति या जनजाति” विशेष चर्चा में है.
विधि स्नातक एवं विज्ञान स्नातक होने के साथ उन्होंने छह विषयों में स्नातकोत्तर उपाधियां तथा पीएचडी प्राप्त की है तथा देश के सबसे ज्यादा पढ़े लिखे किसानों में गिने जाते हैं.. विश्व की कृषि प्रणालियों के अध्ययन हेतु वे लगभग 40 देशों की यात्राएं कर चुके हैं.
सम्मान प्राप्त करते हुए डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने यह पुरस्कार अपने परिजनों मां दंतेश्वरी हर्बल समूह तथा बस्तर के आदिवासी समुदाय के उन साथियों को समर्पित किया, जिन्होंने उनकी संघर्ष यात्रा में निरंतर साथ निभाया और प्राकृतिक खेती के इस आंदोलन को जनांदोलन का स्वरूप दिया.
साहित्य, कृषि और समाज सेवा के समन्वय की त्रिवेणी का संगम यह समारोह , एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा, जहां ज्ञान, संवेदना और धरती से जुड़ी प्रतिबद्धता का सम्मान किया गया.