मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार 31 मार्च को दिल्ली में गोवंश संरक्षण और गोशालाओं के विकास को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. दिल्ली सरकार ने शहर की चार प्रमुख गोशालाओं को वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ उनके लंबे समय से लंबित लाइसेंस और लीज समझौतों का नवीनीकरण कर दिया है. इस फैसले से न केवल गोशालाओं के संचालन को स्थिरता मिलेगी, बल्कि पशु कल्याण के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे.
20.26 करोड़ रुपये की सहायता
सरकार द्वारा कुल 20.26 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता जारी की गई है, जिसमें दो प्रमुख मद शामिल हैं. जो कुछ इस प्रकार है-
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7.64 करोड़ रुपये जून 2024 से मार्च 2025 तक के बकाया भुगतान के लिए
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12.62 करोड़ रुपये अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक के चारे के खर्च के लिए
बता दे कि यह राशि चार गोशालाओं सुल्तानपुर डबास, रेवला खानपुर, हरेवली और सुरहेड़ा को दी गई है, जो लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना कर रही थीं.
आधुनिक सुविधाओं पर जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता केवल बकाया भुगतान तक सीमित नहीं है. गोशालाओं में आधुनिक बायोगैस प्लांट और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. इससे गोशालाएं न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल बनेंगी, बल्कि ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का स्रोत भी तैयार होगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोशालाओं को आधुनिक बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा. पहले चरण में 10 आधुनिक गोशालाओं के विकास को प्राथमिकता दी गई है, जबकि भविष्य में इस योजना का विस्तार कर 40 गोशालाओं तक सभी जरूरी सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
प्रशासन और समाज का साझा प्रयास
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि गोशालाओं का प्रभावी संचालन केवल सरकारी बजट पर निर्भर नहीं हो सकता. इसके लिए समाज की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है. उन्होंने कहा कि गोवंश की सेवा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व भी है.
सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय समुदाय, सामाजिक संगठन और प्रशासन मिलकर काम करें, तो गोशालाओं को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है. इससे पशुओं की देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा.
गोवंश संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल से दिल्ली में गोवंश संरक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही गोशालाओं को अब राहत मिलेगी, जिससे वे अपने संसाधनों को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकेंगी. चारे की उपलब्धता, पशु चिकित्सा सुविधाएं और स्वच्छता व्यवस्था में भी सुधार होगा.
लेखक: रवीना सिंह