भारत में बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और जनजातीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) इस योजना के तहत मछली तालाब या मीठे पानी की हैचरी स्थापित करने पर ₹22.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है. साथ ही इस योजना का संचालन मत्स्य पालन विभाग भारत द्वारा किया जा रहा है. यह पहल खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो कृषि के साथ-साथ अतिरिक्त आय का स्रोत तलाश रहे हैं.
कितनी मिलेगी वित्तीय सहायता?
अगर आप भी इस योजना के लिए अप्लाई करते हैं तो DAJGUA योजना के अंतर्गत मछली तालाब, हैचरी या अन्य एक्वाकल्चर संरचना विकसित करने के लिए ₹22.5 लाख तक की सहायता मुहैया कराई जाएगी. यह राशि परियोजना की लागत और पात्रता के आधार पर निर्धारित की जाएगी. इससे छोटे और मध्यम स्तर के किसानों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी और वे आधुनिक तकनीकों को अपनाने में सक्षम होंगे.
कौन उठा सकता है लाभ
इस योजना का लाभ विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग उठा सकते हैं. इसके अलावा, वे किसान और उद्यमी भी आवेदन कर सकते हैं जो मछली पालन में रुचि रखते हैं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवा सकते हैं. सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस योजना से जोड़ना है, ताकि इस योजना के माध्यम से किसान, उद्यमी आय में वृद्धि कर सकें.
DPR बनाना अनिवार्य क्यों हैं?
अगर आप भी इस योजना में आवेदन करने की सोच रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले इच्छुक व्यक्तियों को एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करनी होगी. इसमें भूमि, पानी की उपलब्धता, मछली की प्रजाति, लागत और संभावित लाभ का विवरण देना आवश्यक है. DPR के आधार पर ही आवेदन का मूल्यांकन किया जाएगा.
आवेदन प्रक्रिया और सहायता
सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए QR कोड और टोल-फ्री नंबर (1800-425-1660) उपलब्ध कराया है. इच्छुक उम्मीदवार QR कोड स्कैन करके अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं. साथ ही हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करके भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है.
तकनीकी प्रशिक्षण और समर्थन
इस योजना के तहत लाभार्थियों को आधुनिक मछली पालन तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. इसमें पानी की गुणवत्ता प्रबंधन, बेहतर बीज (फिंगरलिंग) का उपयोग और संतुलित आहार जैसी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी, जिससे उत्पादन में वृद्धि हो सके और वह अपनी आमदनी में इजाफा कर सकें.
लेखक: रवीना सिंह