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Updated on: 8 October, 2026 2:52 PM IST
BIOAGRI 2026

भारत में टिकाऊ जैविक कृषि पर केंद्रित प्रमुख सम्मेलनों में से एक छठा वार्षिक बायोएग्री उद्योग सम्मेलन BIOAGRI 2026 आज हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में शुरू हुआ. दो दिवसीय यह सम्मेलन 7 और 8 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर से उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, नवाचारकर्ता, नीति-निर्माता, नियामक और अन्य हितधारक जैविक कृषि के बदलते स्वरूप पर चर्चा के लिए जुटे हैं.

इस वर्ष सम्मेलन की मुख्य विषयवस्तु “जैविक बुद्धिमत्ता और स्मार्ट कृषि” रखी गई है. इसका प्रमुख उद्देश्य जैविक विज्ञान, उन्नत तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बीच बढ़ते तालमेल को समझना और कृषि के भविष्य के लिए नए अवसर तलाशना है.

डॉ. जे.पी. सिंह ने किया उद्घाटन

सम्मेलन का उद्घाटन भारत सरकार के पूर्व पादप संरक्षण सलाहकार डॉ. जे.पी. सिंह ने किया. उन्होंने सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य भी दिया और भारतीय कृषि के भविष्य में जैविक कृषि की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला.

डॉ. सिंह के अनुसार, जैविक कृषि अब केवल एक सीमित क्षेत्र नहीं रह गई है, बल्कि यह टिकाऊ कृषि का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि जैविक समाधानों, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्मार्ट तकनीकों को किसानों की वास्तविक जरूरतों के साथ कितनी प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है.

उन्होंने BIOAGRI जैसे मंचों को उद्योग, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद के लिए महत्वपूर्ण बताया. ऐसे मंचों के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान करने और जैविक समाधानों को जिम्मेदारी के साथ कृषि क्षेत्र में अपनाने की गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है. उन्होंने ऐसी कृषि व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया जो उत्पादक होने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और भविष्य की चुनौतियों के प्रति सक्षम हो.

जैविक कृषि और स्मार्ट तकनीक पर विशेष जोर

BIOAGRI 2026 का विषय “जैविक बुद्धिमत्ता और स्मार्ट कृषि” कृषि नवाचार के बदलते स्वरूप को दर्शाता है. सम्मेलन में जैविक उत्पादों और तकनीकों को डिजिटल उपकरणों, वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक कृषि प्रणालियों के साथ जोड़कर देखने पर जोर दिया जा रहा है.

सम्मेलन का उद्देश्य यह समझना है कि ये सभी क्षेत्र मिलकर कृषि उत्पादकता, मिट्टी और फसल स्वास्थ्य, टिकाऊपन, जलवायु अनुकूलन और किसानों की बदलती जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कैसे कर सकते हैं.

उद्घाटन सत्र ने अगले दो दिनों में होने वाली तकनीकी चर्चाओं, उद्योग संवाद और ज्ञान-विनिमय के लिए आधार तैयार किया.

60 से अधिक प्रदर्शकों ने दिखाए कृषि समाधान

BIOAGRI 2026 के साथ एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है. इसमें कंपनियां कृषि क्षेत्र के लिए अपने उत्पादों, तकनीकों और समाधानों को प्रदर्शित कर रही हैं. 60 से अधिक प्रदर्शक लगभग 35 प्रदर्शनी स्टॉल के माध्यम से अपनी तकनीक और उत्पाद प्रस्तुत कर रहे हैं.

प्रदर्शनी में जैविक फसल सुरक्षा, जैव उर्वरक, जैव उद्दीपक, फेरोमोन और अन्य जैविक कृषि इनपुट से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा डिजिटल कृषि मंच, कृषि उपकरण आपूर्तिकर्ता और अन्य तकनीकी कंपनियां भी भाग ले रही हैं.

इस प्रदर्शनी से उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों को एक ही मंच पर नई तकनीकों और समाधानों को समझने तथा संभावित सहयोग के अवसर तलाशने का अवसर मिल रहा है.

निवेश और व्यावसायिक अवसरों पर चर्चा

सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र का विषय “निवेश और व्यावसायिक अवसर” रहा. इसमें कृषि-जैविक क्षेत्र में वैश्विक व्यावसायिक अवसरों, जलवायु कार्रवाई के लिए वित्तीय संसाधनों, कार्बन क्रेडिट, जैविक बाजार में हो रहे बदलाव और पुनर्योजी कृषि की ओर बढ़ते बदलाव पर चर्चा की गई.

सत्र में बहुमूल्य धातुओं के निष्कर्षण में सूक्ष्मजीवों के उपयोग जैसे विषय को भी शामिल किया गया. इससे जैविक विज्ञान के बढ़ते व्यापक उपयोग और कृषि से आगे इसके संभावित अनुप्रयोगों की तस्वीर सामने आई.

चर्चाओं में जैविक समाधानों की बढ़ती व्यावसायिक संभावनाओं के साथ-साथ निवेश, नवाचार और नए कारोबारी मॉडल की भूमिका पर भी जोर दिया गया.

मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के पैनल में उद्योग की चुनौतियों पर मंथन

सम्मेलन में आयोजित मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के पैनल में जैविक कृषि क्षेत्र को बड़े स्तर पर विकसित करने से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा हुई.

इस चर्चा में व्यावसायिक विस्तार, गुणवत्ता सुनिश्चित करना, सूक्ष्मजीवों की स्थिरता, नियामकीय प्रक्रियाएं, अनुसंधान एवं विकास साझेदारी, नीतिगत प्रोत्साहन और वैश्विक निर्यात बाजारों के लिए तैयारी जैसे विषय शामिल रहे.

जैविक कृषि उद्योग के विस्तार के साथ उत्पादों की गुणवत्ता और एकरूपता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण हो गया है. पैनल में कंपनियों की अनुसंधान, विनिर्माण, नियामकीय और बाजार रणनीतियों को मजबूत करने की जरूरत पर विचार किया गया.

मिट्टी की उर्वरता से ‘मृदा बुद्धिमत्ता’ तक

सम्मेलन के पहले दिन मृदा स्वास्थ्य भी प्रमुख विषयों में शामिल रहा. इस सत्र में पारंपरिक मृदा उर्वरता की अवधारणा से आगे बढ़कर “मृदा बुद्धिमत्ता” की व्यापक अवधारणा पर चर्चा हुई.

मृदा पोषण, माइकोराइजल अनुप्रयोग, जैव द्रव्य, जैव-कोयला और कार्बन क्रेडिट जैसे विषयों पर विचार किया गया. साथ ही पारंपरिक कृषि इनपुट से जैविक समाधानों की ओर बढ़ते बदलाव को भी चर्चा का हिस्सा बनाया गया.

मिट्टी का क्षरण और बदलती जलवायु कृषि के सामने प्रमुख चुनौतियां बन रही हैं. ऐसे में वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन और दीर्घकालिक टिकाऊ कृषि की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया.

जैविक कृषि में तकनीकी अवसरों पर चर्चा

दोपहर के कार्यक्रम में जैविक कृषि उद्योग के लिए तकनीकी अवसरों पर विशेष चर्चा हुई. इसमें स्टार्टअप, शिक्षण संस्थानों, उद्योग प्रतिनिधियों और शोधकर्ताओं ने कृषि, खाद्य और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उभरती तकनीकों और नवाचारों पर विचार साझा किए.

प्रतिभागियों ने अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि अनुसंधान और नवाचार को व्यावहारिक समाधानों में बदला जा सके.

फाइटोसैनिटरी अनुसंधान, स्टार्टअप तकनीक, जैविक उत्पाद, बाजार तक पहुंच और वैज्ञानिक योगदान जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे.

पुरस्कार समारोह में नवाचार और उपलब्धियों का सम्मान

BIOAGRI 2026 के पहले दिन का समापन पुरस्कार समारोह के साथ हुआ. इसमें उद्योग, शिक्षा एवं अनुसंधान और स्टार्टअप क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया.

समारोह के माध्यम से जैविक कृषि क्षेत्र में योगदान और नवाचार को पहचान मिली. साथ ही यह कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों के बीच संवाद और नेटवर्किंग का अवसर भी बना.

स्टार्टअप चैलेंज बना विशेष आकर्षण

इस वर्ष BIOAGRI 2026 में BIPA Startup Challenge 2026 को विशेष आकर्षण के रूप में शामिल किया गया है. यह प्रतियोगिता जैविक कृषि में नए और शुरुआती चरण के समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप के लिए आयोजित की जा रही है.

चयनित स्टार्टअप को उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों और शोधकर्ताओं के पैनल के सामने अपने समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है. इससे उन्हें पहचान हासिल करने और संभावित व्यावसायिक साझेदारियों की तलाश करने के लिए मंच मिल रहा है.

यह पहल आधुनिक कृषि की प्रमुख चुनौतियों के समाधान में उद्यमिता और नवाचार की भूमिका को सामने लाने का प्रयास है.

20 से अधिक राज्यों की भागीदारी

BIOAGRI 2026 में देशभर से प्रतिभागी पहुंचे हैं. सम्मेलन में 20 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों की भागीदारी है. उद्योग विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों की मौजूदगी इसे जैविक कृषि क्षेत्र का व्यापक राष्ट्रीय मंच बनाती है.

आयोजन को 100 से अधिक साझेदारियों और सहयोगों का समर्थन प्राप्त है. उद्घाटन कार्यक्रम में 400 पंजीकृत प्रतिनिधियों की भागीदारी रही, जबकि पूरे सम्मेलन में 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी बताई गई है.

जैविक कृषि के राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की पहल

BIOAGRI पिछले कुछ वर्षों में जैविक कृषि उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हुआ है. वर्ष 2026 का आयोजन 2021 से 2025 तक आयोजित हुए पिछले BIOAGRI सम्मेलनों की उपलब्धियों को आगे बढ़ा रहा है.

इसका उद्देश्य ज्ञान साझा करने, उद्योग सहयोग, अनुसंधान, नवाचार तथा नीति-निर्माताओं और नियामकों के साथ रचनात्मक संवाद के माध्यम से जैविक कृषि के राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है.

BIPA जैविक कृषि के लिए काम करने वाले भारत के पुराने पंजीकृत संगठनों में से एक है और इसके साथ 100 से अधिक उद्योग सदस्य जुड़े हैं. संस्था नवाचार, नियामकीय उत्कृष्टता, उद्योग सहयोग और टिकाऊ जैविक समाधानों के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम करती है.

उद्योग, अनुसंधान और स्टार्टअप के बीच बढ़ता सहयोग

BIOAGRI 2026 से उभरने वाला एक महत्वपूर्ण विषय स्थापित उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता है.

कृषि में नए नवाचारों को सफल बनाने के लिए वैज्ञानिकों, कंपनियों, स्टार्टअप और किसानों के बीच सहयोग जरूरी है. वैज्ञानिक नई तकनीक विकसित करते हैं, कंपनियां उन्हें व्यावसायिक रूप देती हैं और किसान इन समाधानों को खेतों में अपनाते हैं.

BIOAGRI इस पूरी श्रृंखला के अलग-अलग हिस्सों को एक मंच पर लाकर ज्ञान साझा करने, नए अवसर पहचानने और संभावित साझेदारियां विकसित करने का अवसर प्रदान कर रहा है.

भारतीय कृषि के भविष्य में जैविक समाधानों की भूमिका

भारतीय कृषि को ऐसे समाधानों की आवश्यकता है जो उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता, मिट्टी के स्वास्थ्य, जलवायु अनुकूलन और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद करें.

इसी संदर्भ में जैविक कृषि को व्यापक कृषि परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है. BIOAGRI 2026 में यह चर्चा हो रही है कि जैविक इनपुट, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्मार्ट तकनीकें कृषि परिवर्तन के अगले चरण में किस तरह योगदान दे सकती हैं.

सम्मेलन का जोर इस बात पर भी है कि नवाचारों को ऐसे व्यावहारिक समाधानों में बदला जाए जो किसानों और पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला की बदलती जरूरतों को पूरा कर सकें.

कृषि नवाचार के केंद्र के रूप में उभरता हैदराबाद

रामोजी फिल्म सिटी में BIOAGRI 2026 का आयोजन हैदराबाद की कृषि तकनीक, नवाचार और ज्ञान आधारित सम्मेलनों के लिए बढ़ती पहचान को भी मजबूत करता है. देश के विभिन्न हिस्सों से आए व्यवसाय, वैज्ञानिक, स्टार्टअप, शोधकर्ता और नीति-निर्माता यहां एक साथ संवाद कर रहे हैं.

दो दिवसीय सम्मेलन में तकनीकी सत्रों, प्रदर्शनी, उद्योग संवाद, नेटवर्किंग, स्टार्टअप प्रस्तुतियों और जैविक कृषि के भविष्य पर चर्चा का आयोजन किया जा रहा है.

BIOAGRI 2026 के माध्यम से जैविक समाधान, वैज्ञानिक अनुसंधान, उद्यमिता और स्मार्ट तकनीकों को टिकाऊ भारतीय कृषि के भविष्य की चर्चा के केंद्र में लाया गया है. उद्योग, शोध समुदाय, स्टार्टअप, नीति-निर्माताओं और तकनीकी कंपनियों को एक मंच पर लाकर सम्मेलन अधिक उत्पादक, टिकाऊ और जलवायु-सक्षम कृषि व्यवस्था की दिशा में संवाद और सहयोग को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है.

English Summary: BIOAGRI 2026 Hyderabad Brings Together India’s Biological Agriculture Ecosystem for a Sustainable and Smarter Farming Future
Published on: 08 October 2026, 02:58 PM IST

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