दोपहर के करीब एक बजे हैं. रोहतास जिले के किसान ज्योति कुमार प्रकाश 46 वर्षीय अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन पर बार-बार नजर डाल रहे हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने बिहार कृषि ऐप के माध्यम से एक सब्जी विकास योजना के लिए आवेदन किया था. अब वे दूसरे कंपोनेंट (फसल) के लिए आवेदन करना चाहते हैं. लेकिन हर बार स्क्रीन पर एक ही संदेश दिखाई देता है- "आपका पहले जमा किया गया आवेदन प्रक्रियाधीन है. कृपया अपडेट की प्रतीक्षा करें." इसके बाद नया आवेदन करने का कोई विकल्प नहीं मिलता ज्योति कुमार प्रकाश अकेले नहीं हैं. बिहार के कई जिलों में ऐसे किसान हैं, जो सरकार की बागवानी एवं सब्जी विकास योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं, लेकिन दावा करते हैं कि बिहार कृषि ऐप पर आवेदन प्रक्रिया उनके लिए नई परेशानी बन गई है.
सरकार डिजिटल व्यवस्था को पारदर्शिता और सुगमता का माध्यम बता रही है, लेकिन किसानों के अनुभव कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं.
डिजिटल बदलाव, लेकिन बढ़ते सवाल-
वर्ष 2026-27 से बिहार के उद्यान निदेशालय ने बागवानी योजनाओं की आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह बिहार कृषि ऐप पर स्थानांतरित कर दिया है. फिलहाल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत शारदीय प्याज, हल्दी, अदरक, हाइब्रिड टमाटर, हाइब्रिड मिर्च, रबी प्याज, फूलगोभी और हाइब्रिड पत्तागोभी के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं. आवेदन की अवधि 10 जून से 30 जून 2026 तक निर्धारित की गई है.
मीनापुर के रहने वाले मुन्ना कुमार 48 वर्षीय किसान बताते हैं पहले किसान विभिन्न योजनाओं और कंपोनेंट्स के लिए अलग-अलग आवेदन कर पाते थे. लेकिन अब कई किसानों का दावा है कि एक बार आवेदन जमा होने के बाद दूसरा कंपोनेंट चुनने का विकल्प ही उपलब्ध नहीं हो रहा.
कई किसानों से बातचीत की, अधिकांश किसानों ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान उन्हें तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ा, ऐसे में किसानों के बीच यह आशंका बढ़ रही है कि कहीं तकनीकी खामियों के कारण वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाएं.
समस्तीपुर के रहने वाले 45 वर्षीय युवा किसान राजू कुमार ने भी इसी तरह की शिकायतें साझा की हैं. उनका कहना है कि यदि एक किसान को केवल एक ही कंपोनेंट में आवेदन की अनुमति है तो विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं यदि तकनीकी त्रुटि है तो उसका तत्काल समाधान किया जाना चाहिए.
अधिकारी भी नहीं दे पा रहे स्पष्ट जवाब-
किसान अनुज कुमार ने कहा कि हम प्रखंड और जिला स्तर पर भी बात किया हूं परंतु यहां बात करने से भी अभी तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं नहीं हो सका है उन्होंने बताया कि जब उन्होंने स्थानीय उद्यान कार्यालयों से संपर्क किया तो उन्हें इंतजार करने या दोबारा प्रयास करने की सलाह दी गई. लेकिन यह नहीं बताया गया कि समस्या का वास्तविक कारण क्या है.
डिजिटल व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि किसान आसानी से उसका उपयोग कर सकें. लेकिन यहां किसान और अधिकारी दोनों ही जवाब तलाशते दिखाई दे रहे हैं.
बिहार सरकार की बागवानी और सब्जी विकास योजनाओं का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, पौध सामग्री और अनुदान के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने में सहायता देना है. वास्तविक चुनौती योजना की घोषणा नहीं, बल्कि उसके लाभ तक पहुंचने की प्रक्रिया है. डिजिटल आवेदन, दस्तावेज अपलोड, सत्यापन और तकनीकी त्रुटियों जैसी बाधाएं कई बार पात्र किसानों को भी योजना से दूर कर देती हैं.
इस संबंध में उद्यान निदेशालय के निदेशक अभिषेक कुमार ने कहा कि किसानों द्वारा बताई जा रही समस्याओं को गंभीरता से लिया गया है. यदि बिहार कृषि ऐप में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा सामने आती है, तो उसकी जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के अंतर्गत पात्र किसान विभिन्न फसलों एवं कंपोनेंट्स के लिए आवेदन कर सकते हैं. यदि किसी आवेदक को एक कंपोनेंट में आवेदन करने के बाद दूसरे कंपोनेंट में आवेदन करने में समस्या आ रही है, तो यह तकनीकी खामी का मामला हो सकता है.
अभिषेक कुमार ने कहा कि यदि जांच में ऐसी तकनीकी समस्या की पुष्टि होती है, तो किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए आवेदन की अवधि 15 दिनों तक बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रह जाए.