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Updated on: 14 March, 2026 9:41 PM IST
बिहार–झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड 2026 का पटना में आयोजन की झलक
  • बिहार की नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने के लिए इसे आकर्षक बनाना जरूरी : रामकृपाल यादव

  • बिहार के विकास के लिए अगले 5 साल बेहद महत्वपूर्ण : संजय कुमार झा

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और कृषि के सामने खड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पटना स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में “बिहार–झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड 2026” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन सस्टेनेबिलिटी मैटर्स, इंडीएग्री और एनजीओ एक्शन (Alliance for Change, Transformation & Innovation) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव तथा राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि के विषय पर नीति-निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि कंपनियों के प्रतिनिधियों, वित्तीय संस्थानों, उद्यमियों और किसानों के बीच व्यापक संवाद हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच कृषि को अधिक टिकाऊ, लचीला और भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए नई नीतियों और तकनीकों पर विचार-विमर्श करना था।

अपने संबोधन में कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कृषि की भी मुख्य भूमिका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में कृषि और किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लंबे समय से काम करते आ रहे हैं। हमारी यह कोशिश होनी चाहिए कि 2047 से पहले ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाए। इसमें बिहार की अग्रणी भूमिका होगी।

उन्होंने कहा कि कृषि को आकर्षक बनाने की जरूरत है ताकि नौजवान पीढ़ी कृषि की ओर अग्रसर हो। दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने से बेहतर है कि वे बिहार में ही कृषि के क्षेत्र में काम करें।

मंत्री ने आगे कहा कि यह अच्छी बात है कि बिहार में आज परंपरागत कृषि से इतर फल, सब्जी और फूल का भी उत्पादन हो रहा है। जिस तरीके से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में हर क्षेत्र में विकास को गति प्रदान की है, उसे देखते हुए यहां की जनता उन्हें छोड़ना नहीं चाहती है। उन्होंने भी स्पष्ट कर दिया है कि अभी हार नहीं मानेंगे। सदन चलने के दौरान वे दिल्ली में रहेंगे, बाकी समय बिहार में ही व्यतीत करेंगे।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर मुझे अन्य राज्यों का दौरा करना पड़ता था। दूसरे राज्यों के लोग कहते थे कि उन्हें बिहार में हो रहे विकास की तरह ही अपने राज्य में भी विकास चाहिए। आज उनके नेतृत्व में बिहार कहां से कहां पहुंच चुका है। आज जर्दालू आम, कतरनी चावल, लीची, मखाना आदि का निर्यात देश-विदेश में हो रहा है। मुख्यमंत्री का सपना है कि बिहार का व्यंजन दूसरे राज्यों की हर थाली में पहुंचे। हम लोगों को भंडारण, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले दो दशकों में कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। कृषि रोडमैप के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में कई योजनाएँ लागू की गई हैं। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए खोजपरक और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की मांग है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि जब सतत कृषि की चर्चा व्यापक रूप से नहीं हो रही थी, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के माध्यम से सतत कृषि पर विशेष जोर दिया था। वर्ष 2019 में बिहार देश का पहला राज्य बना, जहां जल-जीवन-हरियाली के अंतर्गत सतत कृषि की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया। पिछले 20 वर्षों में चार कृषि रोडमैप के जरिए बिहार के कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज एक बड़ी समस्या है। बिहार में कहीं अत्यधिक सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक बाढ़ आती है। मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश में बाढ़ की समस्या को न्यूनतम करने की कोशिश की गई है। इतना ही नहीं, बारिश के पानी का उपयोग भी कुशल तरीके से किया गया है। गंगा के जल का इस्तेमाल गया और नवादा जैसे शहरों में पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। पिछले 20 वर्षों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार में तेजी से काम किया जा रहा है और विकास के हर पैमाने पर राज्य आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बिहार के विकास के लिए अगले 5 साल बेहद महत्वपूर्ण हैं। बिहार को देश के शीर्ष 10 राज्यों में स्थान बनाना है। पारंपरिक कृषि से हटकर कैश क्रॉप्स की ओर कदम बढ़ाना जरूरी है। इससे किसानों के जीवन में भी खुशहाली आएगी।

सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है और इसका सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों को मिलकर काम करना होगा।

कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन एवं सिडबी के अधिकारियों ने बताया कि वे कैसे किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों की मदद करते हैं ताकि वे बिहार को विकास के पथ पर आगे ले जा सकें।

कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित भी किया गया। इनमें जलवायु-अनुकूल कृषि चैंपियन, सतत जल प्रबंधन अग्रदूत, मृदा स्वास्थ्य एवं सतत खेती पुरस्कार, एफपीओ उत्कृष्टता पुरस्कार, युवा कृषि उद्यमी पुरस्कार, वर्ष का एग्रीटेक स्टार्टअप, प्रगतिशील किसान पुरस्कार और स्वदेशी खाद्य विरासत पुरस्कार शामिल थे। इन पुरस्कारों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नवाचार, टिकाऊ खेती, जल और मिट्टी संरक्षण तथा किसानों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान, उद्योग जगत और किसान मिलकर सतत कृषि की दिशा में कार्य करें, तो बिहार और झारखंड के कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत, टिकाऊ और समृद्ध बनाया जा सकता है।

इस कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र गुप्ता ,सचिव, बिहार सरकार, डॉ. विवेकानंद पांडेय, कुलपति, एमिटी विश्वविद्यालय; मती अनुभा प्रसाद, महाप्रबंधक, सिडबी; राजेश कुमार, कृभको;

लक्ष्मण कुमार,नाबार्ड; विनय चौधरी, डेयरी डायरेक्टर सहित कई कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों ने अपने विचार रखे।

English Summary: Bihar Jharkhand Regional Policy Dialogue and Awards 2026 Held in Patna Deliberations Held on Climate Change and Sustainable Agriculture
Published on: 14 March 2026, 09:50 PM IST

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