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बागवानी योजनाओं में देरी से किसान परेशान (Image Source-AI generate)

बिहार के बागवानी और सब्जी उत्पादक किसान इन दिनों गहरे असमंजस में हैं। सरकार की दो बड़ी योजनाओं मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत कई महीनों पहले आवेदन कर चुके किसानों को अब तक न तो योजना मिला है, न आवेदन की स्वीकृति या अस्वीकृति की कोई सूचना। नतीजा यह है कि किसान न तो नई बागवानी की योजना बना पा रहे हैं, न सब्जी की खेती के लिए समय पर तैयारी कर पा रहे हैं।

आवेदन जमा, जवाब गायब

आम, लीची, पपीता, अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, प्लास्टिक मंचिंग, कटहल, सेव, किन्नौ और टिश्यू कल्चर केला जैसी बागवानी फसलों के साथ-साथ औषधीय पौधे के लिए किसानों ने मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत ऑनलाइन आवेदन कई महीने पहले ही जमा करा लिया गया है। लेकिन विभाग की ओर से न स्वीकृति आई है, न यह बताया गया है कि आवेदन किस चरण में अटका है। किसानों का कहना है कि बिहार कृषि ऐप पर स्टेटस "पेंडिंग" के अलावा कुछ नहीं दिखाता और कार्यालयों में पूछने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।

बागवानी फसलों के लिए यह देरी खासतौर पर नुकसानदेह है, क्योंकि आम-लीची जैसे बगीचों के नए पौधे रोपने का उपयुक्त समय मानसून का शुरुआती दौर (जून-जुलाई) माना जाता है, जो पहले ही बीत चुका है। पपीता और अमरूद के पौधे भी बरसात के मौसम में ही बेहतर तरीके से स्थापित होते हैं। टिश्यू कल्चर केले की रोपाई के लिए भी मानसून-पूर्व या मानसून का समय अनुकूल रहता है। यानी अनुमोदन में हो रही देरी सीधे तौर पर किसानों का एक पूरा रोपण सीजन छीन सकती है।

किसे मिलेगी नर्सरी, किसे बीज — कुछ तय नही दूसरी ओर, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत शारदीय प्याज, हल्दी, अदरक, हाइब्रिड टमाटर, हाइब्रिड मिर्च, रबी प्याज, फूलगोभी और हाइब्रिड पत्तागोभी के लिए आवेदन देने वाले किसान इस उलझन में हैं कि आखिर उन्हें नर्सरी (पौध) मिलेगी या सिर्फ बीज और कब मिलेगा। यह स्पष्टता न होने से किसान खेत की तैयारी, सिंचाई और मजदूरी का प्रबंधन तक नहीं कर पा रहे।

फसलवार बुआई/रोपाई के सामान्य समय और मौजूदा देरी की स्थिति इस प्रकार है: शारदीय (खरीफ) प्याज नर्सरी जून-जुलाई, रोपाई (अगस्त-सितंबर) नर्सरी सीजन लगभग निकल चुका, रोपाई का समय भी हाथ से जा रहा। हल्दी (अप्रैल-मई) सीजन 3 महीने से अधिक पीछे, अब बुआई संभव नहीं। अदरक रोपाई (अप्रैल-मई)

सीजन पूरी तरह निकल चुका। हाइब्रिड टमाटर (खरीफ) नर्सरी जून-जुलाई नर्सरी सीजन बीत चुका। हाइब्रिड मिर्च (खरीफ) नर्सरी जून-जुलाई नर्सरी सीजन बीत चुका। फूलगोभी (अगेती किस्म) नर्सरी जुलाई-अगस्त सीजन अंतिम दौर में। हाइब्रिड पत्तागोभी नर्सरी अगस्त-सितंबर समय अभी है, पर तेजी से निकल रहा। रबी प्याज नर्सरी अक्टूबर-नवंबर अभी समय है, पर तैयारी अभी से शुरू करनी होगी तालिका साफ बताती है कि हल्दी, अदरक, खरीफ प्याज, खरीफ टमाटर और मिर्च का रोपण सीजन व्यावहारिक रूप से निकल चुका है। यानी अगर अभी भी नर्सरी/बीज नहीं मिलता, तो इन फसलों के लिए यह पूरा वर्ष किसानों के हाथ से निकल जाएगा  केवल फूलगोभी, पत्तागोभी और रबी प्याज के लिए कुछ समय अभी बचा है।

किसानों का दर्द, विभाग की चुप्पी

किसानों का कहना है कि हर साल योजनाओं का ऐलान समय पर होता है, लेकिन जमीन पर क्रियान्वयन में देरी उन्हें भारी पड़ती है। न पौधे समय पर मिलते हैं, न बीज, न यह बताया जाता है कि देरी की वजह क्या है। आवेदन करने के बाद किसान बार-बार कृषि/उद्यान कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, लेकिन "बिहार कृषि ऐप" से आगे कोई जवाब नहीं मिलता।

राजद के नेता मो. फरहान ने कहा कि बागवानी और सब्जी की फसलों में समय की भूमिका सबसे अहम होती है नर्सरी और रोपाई का सीजन चूकने का मतलब है पूरी फसल चक्र का नुकसान, जिसकी भरपाई अगले वर्ष तक नहीं हो पाती। ऐसे में किसान संगठनों की मांग है कि विभाग आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करे, स्पष्ट समय-सीमा तय करे और देरी के लिए जवाबदेही तय की जाए, ताकि आने वाले सीजन में किसानों को समय पर नर्सरी और बीज मिल सकें।

English Summary: Bihar Horticulture Scheme Delays Farmers Await Benefits no Response
Published on: 23 September 2026, 04:33 PM IST

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