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Updated on: 23 January, 2026 12:28 PM IST
मशरुम की खेती करने वाले किसानों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी (Image Source-AI generate)

बिहार में मशरुम की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. इस राज्य में हर जिले के किसान मशरुम की खेती बड़े स्तर पर करते हैं. इसी को देखते हुए राज्य सरकार मशरुम उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकारी योजना चला रही है, जिसके तहत किसानों को 90 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है. खासकर इस योजना का असर पश्चिम चंपारण जिले में साफ दिखाई देने लगा है और बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और युवा मशरूम फार्मिंग को अपना रहे हैं.

बिहार कौन-सा जिला मशरूम उत्पादन हब?

बिहार पहले से ही देश के प्रमुख मशरुम उत्पादक राज्यों में गिना जाता है. राज्य के लगभग सभी जिलों में मशरुम की खेती की जा रही है. अगर क्षेत्रफल के हिसाब से बताएं तो बिहार का सबसे बड़ा जिला पश्चिम चंपारण है, जिसके किसान मशरुम की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं.

वहीं, बिहार के वाल्मीकिनगर जैसे वन क्षेत्रों से लेकर जिला मुख्यालय बेतिया तक मशरूम उत्पादन का दायरा तेजी से फैल रहा है. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं भी स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस कारोबार से जुड़ रही हैं.

बांस के हट पर 50% तक सब्सिडी

मशरूम फार्मिंग के लिए सबसे पहले किसानों को शेड या हट की जरुरत होती है, इस पर सरकार किसानों की सहायता कर रही है. अगर हट के खर्च की बात करें, तो किसानों को 15 फीट चौड़े और 30 फीट लंबे बांस के हट को तैयार करने में लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये का खर्च आता है. इसी लागत पर सरकार किसानों को 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी की छूट दें रही है, जिससे किसानों की लागत कम होगी और उनको बड़ा मुनाफा होगा.

मशरूम बैग्स पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?

किसानों को इस सरकारी योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सरकार इस योजना के तहत किसानों को मशरुम बैग्स पर भारी सब्सिडी दें रही है. यानी अगर किसान भाई ओएस्टर मशरूम की खेती शुरू करते हैं तो उद्यान विभाग से उन्हें प्रति बैग मात्रा 7 रुपये में मिलेगा, जबकि बाजार में इस बैग की कीमत 70 से 80 रुपये तक है.

इसी तरह बटन मशरूम के बैग की बाजार कीमत करीब 90 रुपये हैं, लेकिन उद्यान विभाग इसे किसानों को केवल 9 रुपये में उपलब्ध करा रहा है. खास बात यह है कि एक किसान को एक बार में 100 तैयार बैग्स दिए जाते हैं, जो सीधे उत्पादन के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

कम समय में अच्छी पैदावार

किसानों को इस योजना के माध्यम से बड़ा लाभ मिल रहा है, जिससे किसानों की लागत में कमी आई है. उद्यान विभाग से मिलने वाला हर मशरूम बैग करीब 10 किलो क्षमता का होता है. फार्मिंग शुरू करने के लगभग एक महीने बाद ही मशरूम का फलन शुरू हो जाता है. इसके बाद करीब डेढ़ महीने तक किसानों को लगातार उत्पादन होता रहता है. यानी की इस अवधि में किसान एक बैग से औसतन 3 किलो तक मशरूम की हार्वेस्टिंग कर सकते हैं.

इस तरह किसानों के पास अगर मशरुम के 100 बैग्स हैं, तो 45 दिनों के भीतर इन बैग्स से 300 किलो तक मशरुम का उत्पादन कर सकते हैं.

बाजार कितनी कीमत मिलेगी?

मशरुम की डिमांड बाजारों में लगातार बढ़ती जा रही है और बाजारों में मशरुम का भाव 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक मिलता है. ऐसे में किसान भाई 300 किलो मशरुम को बेचकर 45 से 60 हजार रुपये की कमाई कर सकते है. यही कारण है कि किसान मशरुम की खेती को बड़े पैमाने पर अपना कर कम लागत में तगड़ी आमदनी अर्जित कर रहे हैं.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

अगर आप इस योजना में इच्छुक है, तो इस योजना का लाभ लेने के लिए उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.horticulture.bihar.gov.in या फिर http://www.horticulture.bihar.gov.inपर जाए. इसके अलावा किसान आवेदन के समय किसान पंजीकरण प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो और लैंड पोजीशन सर्टिफिकेट (भूमि से संबंधित प्रमाण) जरुर साथ लेकर जाए और अधिक जानकारी जानने के लिए किसान अपने नजदीकी प्रखंड उद्यान कार्यालय में जाए.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Bihar government providing farmers with up to 90 percent subsidy on mushroom cultivation
Published on: 23 January 2026, 12:32 PM IST

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