फलों को सुरक्षित पकाने के लिए राइपनिंग चैंबर योजना पर 35% अनुदान
बिहार सरकार के कृषि विभाग के अंतर्गत उद्यान निदेशालय राज्य में फलों के सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं नियंत्रित परिरक्षण के लिए राइपनिंग चैंबर की स्थापना को बढ़ावा दे रहा है। यह पहल 'सात निश्चय-3' के 'दोगुनी आय-दोगुना रोजगार' संकल्प के अनुरूप है। यह कदम किसानों, एफ.पी.ओ., स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और उद्यमियों को आधुनिक बागवानी मूल्य-श्रृंखला से जोड़ते हुए कटाई के बाद होने वाले नुकसान को घटाने और उपज की गुणवत्ता बढ़ाकर बेहतर बाजार मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
योजना के अंतर्गत राइपनिंग चैंबर की स्थापना पर 35 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। पात्र लाभुकों को अधिकतम 35,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन क्षमता तक सहायता दी जाएगी। यह सुविधा किसान उत्पादक संगठनों, महिला स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों, उद्यमियों और फल उत्पादकों के लिए आधुनिक बाग़वानी अवसंरचना विकसित करने का अवसर है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की सौदेबाजी क्षमता बढ़ेगी और फसल-नुकसान में कमी आएगी।
बिहार में केले सहित कई फलों की कटाई के समय बाजार में अचानक अधिक आवक हो जाने से किसान कम दाम पर फल बेचने को मजबूर होते हैं। राइपनिंग चैंबर में तापमान, आर्द्रता, वायु-संचार और एथलीन गैस की नियंत्रित व्यवस्था रहती है, जिससे कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक रसायनों से मुक्ति मिलती है। इससे फल प्राकृतिक, समान और सुरक्षित रूप से पकते हैं। बेहतर रंग, स्वाद और शेल्फ-लाइफ से बाजार में फल की स्वीकार्यता बढ़ती है। साथ ही ग्रेडिंग, पैकिंग, परिवहन और ई-मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
कृषि मंत्री ने इस विषय पर कहा कि सरकार किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक परिरक्षण और आधुनिक मूल्य-श्रृंखला से जोड़ना चाहती है।
उन्होंने बताया कि केले और अन्य फलों की आवक बढ़ने से बाजार मूल्य में आने वाली गिरावट की समस्या को राइपनिंग चैंबर जैसी सुविधाएं दूर कर सकती हैं। कृषि मंत्री ने किसानों, समूहों और युवाओं से आग्रह किया कि वे इस योजना का लाभ उठाकर बिहार को आय-सृजन करने वाली बागवानी का अग्रणी राज्य बनाएं।
English Summary: Bihar government 35 Percent Subsidy on fruit Ripening Chamber Scheme for Farmers
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