भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां आज भी लगभग 56 से 60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों पर निर्भर है। इसके बावजूद, कृषि क्षेत्र से जुड़े नायकों को वह सामाजिक सम्मान और राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल सकी, जो औद्योगिक या कॉरपोरेट क्षेत्र के नायकों को प्राप्त हुई।
इसी सामाजिक असंतुलन को तोड़ते हुए बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र से निकलकर एक ऐसे व्यक्तित्व ने अपनी अलग पहचान बनाई, जिन्होंने सुविधा, पद और प्रतिष्ठा को त्यागकर खेती को अपना जीवन और मिशन बना लिया। यह प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं डॉ. राजाराम त्रिपाठी।
डॉ. राजाराम त्रिपाठी का बचपन छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में बीता। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात वे भारतीय स्टेट बैंक जैसे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में ब्रांच मैनेजर के प्रतिष्ठित पद तक पहुंचे। जहां अधिकांश लोग इस पद को जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि मानते हैं, वहीं डॉ. त्रिपाठी ने समाज, किसान और प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को प्राथमिकता देते हुए इस सुरक्षित और सुविधापूर्ण नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
खेती के क्षेत्र में कदम रखते ही उन्हें आर्थिक संकट, सामाजिक दबाव, संसाधनों की कमी और असफलताओं जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। किंतु दृढ़ इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रकृति के साथ गहरे आत्मिक जुड़ाव के बल पर उन्होंने इन सभी बाधाओं को पार किया और स्वयं को एक सफल, नवाचारी और मार्गदर्शक किसान के रूप में स्थापित किया।
डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने भारत सहित विश्व के चालीस से अधिक देशों की कृषि यात्राएं की हैं। इन यात्राओं के माध्यम से उन्होंने वैश्विक कृषि प्रणालियों, जैविक खेती, कृषि विपणन और मूल्य संवर्धन की बारीक समझ विकसित की, जिसका लाभ आज देश के लाखों किसान उठा रहे हैं।
आधा दर्जन विषयों में एमए, एलएलबी तथा पारंपरिक चिकित्सा में पीएचडी जैसी उच्च शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ वे देश के सर्वाधिक शिक्षित किसानों में गिने जाते हैं।
वर्तमान में वे कोंडागांव और बस्तर क्षेत्र में जैविक एवं प्राकृतिक खेती के माध्यम से न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने नवाचारों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और किसान आंदोलनों के माध्यम से देश के करोड़ों किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं।
उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें पर्यावरण, जैविक खेती, जनजातीय उत्थान और सतत विकास से जुड़े प्रतिष्ठित पुरस्कार शामिल हैं।
इसी असाधारण और प्रेरक जीवन यात्रा को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर बॉलीवुड के अनुभवी और सफल फिल्म निर्माताओं की टीम के साथ एक औपचारिक फीचर फिल्म अनुबंध संपन्न किया गया है।
फिल्म की मुख्य भूमिका के लिए बॉलीवुड के कुछ प्रतिष्ठित कलाकारों से चर्चा चल रही है। इससे जुड़े अन्य तथ्यों और कलाकारों की घोषणा शीघ्र ही पृथक रूप से की जाएगी।
यह फीचर फिल्म डॉ. राजाराम त्रिपाठी के संघर्ष, संकल्प और सफलता की सच्ची कहानी को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करेगी। संभवतः यह किसी किसान के जीवन पर आधारित देश की पहली मुख्यधारा की फीचर फिल्म होगी, जो ग्रामीण भारत की वास्तविकता, किसान की पीड़ा, उसकी मेहनत और उसकी जिजीविषा को सशक्त रूप से सामने लाएगी।
यह फिल्म केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं होगी, बल्कि देश के करोड़ों किसानों की भावनाओं, संघर्षों और सपनों की प्रतिनिधि आवाज बनेगी। यह दर्शाएगी कि सच्चा नायक वही होता है, जो अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज, किसान और प्रकृति के लिए कार्य करता है।
डॉ. राजाराम त्रिपाठी का जीवन इस सत्य का जीवंत प्रमाण है कि यदि संकल्प अडिग हो, तो एक व्यक्ति भी व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
हमें पूर्ण विश्वास है कि यह फिल्म युवाओं, किसानों और समाज के हर वर्ग को प्रेरित करेगी तथा कृषि और किसानों को उनका खोया हुआ सम्मान लौटाने की दिशा में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाएगी।