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भूमि ट्रस्ट का संकल्प: डॉ. राजाराम त्रिपाठी द्वारा अपनी भूमि को ट्रस्ट में देकर भूमिहीन आदिवासियों को खेती हेतु देने की ऐतिहासिक घोषणा
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भूदान का नया मॉडल: सामूहिक जैविक खेती और नेचुरल ग्रीनहाउस को भूदान आंदोलन की आधुनिक व्याख्या के रूप में सराहा गया
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राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता: 35,000 किमी यात्रा कर चुके रमेश भाई ने कोंडागांव मॉडल को देश का अद्वितीय कृषि समाधान बताया
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देशभर में विस्तार: विनोबा भावे के आश्रमों में भी इस मॉडल को लागू करने की दिशा में सहमति और पहल
पंच राज्यों की ‘भूदान स्मृति विचार एवं सद्भावना यात्रा’, जो पूज्य विनोबा भावे जी की प्रेरणा से भूदान महायज्ञ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है, का कोंडागांव आगमन एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पड़ाव बन गया. मां दंतेश्वरी हर्बल समूह तथा साथी समाज सिविल संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में इस दल का स्वागत, विचार मंथन बैठक तथा मां दंतेश्वरी हर्बल फॉर्म तथा रिसर्च सेंटर का निरीक्षण भ्रमण का आयोजन विधिवत संपन्न हुआ. इस दल ने रात्रि विश्राम साथी समाज सेवी संस्थान के अतिथि गृह में किया, और प्रातः रुक्मणी सेवा संस्थान डिमरापाल जगदलपुर के लिए प्रस्थान कर गए.
सर्वप्रथम नारायणपुर चौक पर इस यात्रा दल का भव्य स्वागत समाजसेवी भूपेश तिवारी एवं उनके साथियों द्वारा सूत की माला पहनाकर किया गया. इसके उपरांत दल सीधे ‘मां दंतेश्वरी हर्बल स्टेट’ पहुंचा, जहां परिसर स्थित ‘बईठका हाल’ में एक गहन विचार मंथन बैठक आयोजित की गई.
इस बैठक में प्रमुख रूप से डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने अपने 30 वर्षों के सामूहिक खेती के अनुभव को साझा करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मॉडल पारंपरिक सहकारी खेती से अलग है और विनोबा भावे के विचारों के अधिक निकट है.
डॉ. त्रिपाठी ने अपने खेतों की भूमि का एक ट्रस्ट बनाने का संकल्प व्यक्त किया, जिसके अंतर्गत बस्तर के भूमिहीन आदिवासी भाइयों को कृषि हेतु भूमि उपलब्ध कराई जाएगी. इस भूमि पर जैविक पद्धति से हर्बल फसलें, मसाले एवं श्रीअन्न की खेती की जाएगी, जिससे सीधे-सीधे आदिवासी किसानों को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा.
डॉ. त्रिपाठी के इस अभिनव प्रस्ताव का यात्रा दल के प्रमुख रमेश भाई ने हृदय से स्वागत किया तथा इसे भूदान आंदोलन की समकालीन और व्यावहारिक पुनर्व्याख्या बताया. उन्होंने इस दिशा में डॉ. त्रिपाठी को मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया तथा उन्हें शीघ्र ही विनोबा भावे से जुड़े पवनार आश्रम में आमंत्रित भी किया.
बैठक को प्रसिद्ध समाजसेवी भूपेश तिवारी ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम में रमेश भाई, राकेश पांडे (प्रयागराज), जालंधर भाई (गांधी आश्रम, वर्धा), राजेश भाई (हरियाणा), विजय ओझा (चारामा) एवं संकेत सारथी सहित अन्य साथियों का अंगवस्त्र से सम्मान किया गया तथा उन्हें बस्तर की प्रसिद्ध काली मिर्च भेंट की गई.
बैठक के पश्चात सभी प्रतिभागी फार्म विजिट के लिए गए, जहां उन्होंने पूरे दिन ‘मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म’ में विकसित बहुस्तरीय जैविक खेती, नेचुरल ग्रीनहाउस एवं उच्च उत्पादकता वाली काली मिर्च की खेती का अवलोकन किया.
रमेश भाई ने कहा कि उन्होंने 35,000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान देशभर में अनेक कृषि मॉडल देखे हैं, किंतु कोंडागांव में विकसित यह मॉडल अद्वितीय है. उन्होंने विशेष रूप से 70-80 फीट तक ऊंची काली मिर्च की बेलों, ऑस्ट्रेलियन टीक के साथ मिश्रित खेती, तथा हल्दी, सफेद मूसली और स्टीविया जैसी फसलों के संयोजन की सराहना की.
उन्होंने यह भी कहा कि यह मॉडल खाद, सिंचाई, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, किसानों की आय और युवाओं के रोजगार जैसी ज्वलंत समस्याओं का एक समग्र समाधान प्रस्तुत करता है. उन्होंने आगे कहा कि, यह आयोजन न केवल भूदान आंदोलन की स्मृति को पुनर्जीवित करता है, बल्कि उसे वर्तमान संदर्भों में एक नई दिशा देने का सशक्त प्रयास भी सिद्ध हुआ.
कोंडागांव में मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की टिकाऊ तथा सस्ती जैविक खेती से प्रभावित होकर रमेश भाई सहित विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने ‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ की विधिवत सदस्यता ग्रहण की.
साथ ही उन्होंने घोषणा की कि नेचुरल ग्रीनहाउस का यह प्रकल्प विनोबा भावे के आश्रमों में भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें डॉ. त्रिपाठी ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया.