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Updated on: 31 October, 2026 4:37 PM IST
अब एक गाय से होंगे कई बछड़े (Image Source-AI generate)

देश के पशुपालकों और किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है कि अब अच्छी नस्ल की गाय और भैंस से अधिक संख्या में उन्नत नस्ल के बछड़े पैदा करना संभव हो सकेगा. अब आपके मन में यह सवाल होगा की कैसे तो आपको बता दें कि इसके लिए गुजरात के बनासकांठा जिले के भिलडी में अत्याधुनिक पशु प्रजनन केंद्र तैयार किया गया है, जिससे डेयरी कारोबारियों बड़ा फायदा होगा और वह इस व्यवसाय से अधिक इनकम अर्जित कर सकेंगे.

कितने एकड़ में ये  रिसर्च सेंटर तैयार किया गया?

अगर आप डेयरी बिजनेस करते हैं, तो आपको यह जानना बेहद ही आवश्यक है कि रिसर्च सेंटर कहां और कितने एकड़ में विकसित किया गया है, तो आपको बता दें कि इस केंद्र का नाम भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) है. इसे बनास डेयरी की ओर से 127 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है. परियोजना को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के तकनीकी मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन की मदद से तैयार किया गया है.

एक अच्छी नस्ल की गाय से मिलेंगे कितने बछड़े?

आमतौर पर एक गाय साल में एक ही बछड़े को जन्म देती है. इस वजह से अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने में काफी समय लगता है. लेकिन अब आधुनिक प्रजनन तकनीकों की मदद से इस प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा. बनास डेयरी के चेयरमैन के मुताबिक, इस केंद्र में ओवम पिकअप (OPU), इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और एम्ब्रायो ट्रांसफर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा और इन तकनीकों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली गायों और भैंसों से अंडाणु लेकर प्रयोगशाला में भ्रूण तैयार किए जाएंगे. 

इसके बाद इन भ्रूणों को दूसरी उपयुक्त मादा पशुओं में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा. इस तरह एक श्रेष्ठ नस्ल की मादा पशु की आनुवंशिक क्षमता का इस्तेमाल करके कम समय में अधिक उन्नत नस्ल के बछड़े तैयार किए जा सकते हैं.

किन देसी गायों और भैंसों की नस्लों पर रहेगा फोकस

भारत में कई ऐसी स्वदेशी नस्लें हैं, जो अधिक गर्मी सहने, कम संसाधनों में रहने और स्थानीय जलवायु के अनुकूल होने के लिए जानी जाती हैं. इस केंद्र में ऐसी ही प्रमुख नस्लों के संरक्षण और सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

गायों की प्रमुख नस्लें:

  • गिर

  • साहीवाल

  • कांकरेज

  • थारपारकर

भैंसों की प्रमुख नस्लें:

  •  मुर्रा

  •  मेहसाणी

  •  बन्नी

  •  जाफराबादी

इन नस्लों के आनुवंशिक गुणों में सुधार करके ऐसी अगली पीढ़ी तैयार करने का लक्ष्य है, जो बेहतर दूध उत्पादन कर सके और भारतीय मौसम के अनुकूल भी हो.

क्यों खास है बनास डेयरी का यह सेंटर?

देश में पशुपालन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है अच्छी नस्ल के दुधारू पशुओं की उपलब्धता. दूसरी ओर, पशुओं के लिए चारा और पानी की लागत लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है. ऐसे में वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों को गांवों और डेयरी किसानों तक पहुंचाना जरूरी है.

भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर को इसी उद्देश्य से नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया गया है. यहां आधुनिक प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं के माध्यम से पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने पर काम किया जाएगा. कुल मिलाकर, बनासकांठा में तैयार यह 325 करोड़ रुपये का केंद्र भारतीय डेयरी सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है. 

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Banaskantha 325 Crore Cattle Breeding Bovine Breeding and Research Centre Gujarat
Published on: 31 October 2026, 04:41 PM IST

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