मध्य प्रदेश के किसानों और महिलाओं की आय बढ़ाने के उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठा बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना की शुरुआत की है. इस सरकारी योजना के माध्यम से महज 556 रुपये के निवेश के साथ मुर्गी पालन की शुरुआत कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. साथ ही सरकार इस योजना के तहत किसानों और महिलाओं को प्रदान कर रही है भारी अनुदान.
कितने खर्च में शुरू कर सकते पोल्ट्री व्यवसाय?
आज के समय में खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत होना बेहद जरूरी हो गया है. ऐसे में बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना किसानों के लिए शानदार विकल्प साबित हो रही है. योजना के तहत मुर्गी पालन की कुल लागत 2,225 रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें से लाभार्थी को केवल 556 रुपये का योगदान देना होता है. शेष 1,669 रुपये की राशि सरकार अनुदान के रूप में उपलब्ध कराती है.
लाभार्थियों को मिलते हैं 40 उन्नत नस्ल के चूजे
योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 28 दिन उम्र के 40 उन्नत नस्ल के चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं. इसके साथ ही पशुपालन विभाग की ओर से आवश्यक दवाएं, टीकाकरण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है. साथ ही यह उन्नत नस्ल के ये चूजे तेजी से विकसित होते हैं और कम समय में अच्छा वजन हासिल कर लेते हैं. इससे किसानों को कम अवधि में बेहतर आय प्राप्त करने का अवसर मिलता है.
पालन-पोषण में खर्च भी बेहद कम
बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें चारे पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता. ग्रामीण परिवेश में मुर्गियां खुले वातावरण में कीड़े-मकोड़े, घास, अनाज के दाने और घरेलू खाद्य पदार्थों से अपना भोजन प्राप्त कर लेती हैं. यही वजह है कि यह मॉडल छोटे किसानों और सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है. कम लागत के कारण जोखिम भी कम रहता है और लाभ की संभावना अधिक होती है.
कितनी महीने में तैयार हो जाते हैं उन्नत नस्ल के चूजे?
अगर किसान या महिलाएं इस योजना में आवेदन कर इसका फायदा उठाते हैं, तो योजना के तहत मिलने वाले उन्नत नस्ल के चूजे लगभग तीन महीने में 1 से 1.5 किलोग्राम तक वजन हासिल कर लेते हैं. इसके बाद इन्हें स्थानीय बाजारों, हाट-बाजारों और आसपास के गांवों में आसानी से बेचा जा सकता है.
कितनी होगी कमाई?
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यदि लाभार्थी सही तरीके से मुर्गियों का पालन करता है तो वह हर महीने 8,000 से 10,000 रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर सकता है. इस तरह सालभर में एक लाख रुपये या उससे अधिक की कमाई संभव हो सकती है.
ग्रामीण परिवारों के लिए यह आय उनके जीवन स्तर में सुधार लाने, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
कैसे उठाएं योजना का लाभ?
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान और ग्रामीण परिवार अपने जिले के पशुपालन विभाग, जनपद पंचायत या नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं. वहां से पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
कम लागत, सरकारी अनुदान और बेहतर कमाई की संभावनाओं के कारण बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना ग्रामीण भारत में स्वरोजगार का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है. जो लोग कम निवेश में अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है.
लेखक: रवीना सिंह