अयोध्या जिले के प्रगतिशील किसान शोभा राम ने बहु-फसली खेती के दम पर कृषि जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है. मकसूमगंज गांव निवासी शोभा राम पिछले कई वर्षों से खेती-किसानी कर रहे हैं. तीन एकड़ जमीन पर मेहनत और निरंतर प्रयोगों के जरिए उन्होंने परंपरागत खेती के बजाय बहु-फसली खेती का रास्ता चुना. उनकी मुख्य फसल केला है, लेकिन इसके साथ-साथ वे धान, गेंदा फूल, मिर्च, मक्का, आलू और खीरे की खेती भी करते हैं. खेतों के किनारों पर उन्होंने दशहरी आम के पेड़ लगाए हैं, जिनके नीचे हल्दी, अदरक और सूरन उगाकर अतिरिक्त आय का साधन तैयार किया है. साथ ही बकरी और गाय पालन के माध्यम से वे पशुपालन क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान दे रहे हैं.
हाल ही में उनकी इस मेहनत और नवाचार को विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली एवं युवा केंद्र समिति, बस्ती द्वारा आयोजित साप्ताहिक किसान कन्वेंशन “किसानों की आवाज़” में सम्मानित किया गया.
बहु-फसली खेती से बढ़ा मुनाफा
शोभा राम की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने जमीन के हर हिस्से को उपयोगी बना लिया है. केले की मुख्य फसल के साथ वे पहली सह-फसल के रूप में धान और गेंदा उगाते हैं. इसके बाद गेंदा की फसल के बीच मिर्च और मक्का की खेती की जाती है. खेतों की खाली जगह को आलू और खीरे से भर दिया जाता है. इस प्रकार एक ही जमीन से वर्षभर अलग-अलग फसलों की पैदावार होती रहती है, जिससे आय के कई स्रोत बने रहते हैं.
बागवानी और पशुपालन से अतिरिक्त आय
खेती के साथ-साथ शोभा राम बागवानी और पशुपालन को भी बराबर महत्व देते हैं. उन्होंने खेतों की मेड़ों पर दशहरी आम के पौधे लगाए हैं. इन पेड़ों के नीचे हल्दी, अदरक और सूरन की खेती कर उन्होंने अपनी आमदनी में वृद्धि की है. वहीं बकरी पालन और गाय पालन से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की आय भी प्राप्त होती है. इस तरह बहु-आयामी खेती से उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई है.
वैज्ञानिकों और अधिकारियों की सराहना
शोभा राम के नवाचारों और उनकी खेती की शैली को देखने के लिए समय-समय पर ICAR, CISH के वैज्ञानिक, जिले के कृषि अधिकारी तथा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के विशेषज्ञ उनके फार्म का दौरा करते रहते हैं. उनकी खेती अब किसानों और वैज्ञानिकों, दोनों के लिए अध्ययन का विषय बन चुकी है.
पुरस्कारों से बढ़ा सम्मान
शोभा राम को अब तक जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें एक मिसाल किसान बना दिया है. 15 जनवरी 2026 को उन्हें विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली एवं युवा केंद्र समिति, बस्ती द्वारा आयोजित साप्ताहिक किसान कन्वेंशन “किसानों की आवाज़” में कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती में राज्य स्तरीय कृषि अवार्ड से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके वर्षों की मेहनत और प्रयोगशील खेती का प्रमाण है.
किसानों के लिए प्रेरणा
शोभा राम की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों और कम जमीन पर भी नवाचार और कड़ी मेहनत से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. बहु-फसली खेती और पशुपालन को एक साथ अपनाकर उन्होंने खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है. उनका मानना है कि यदि किसान समय पर तकनीक और वैज्ञानिक सलाह का सही उपयोग करें, तो खेती में नुकसान की संभावना बहुत कम हो जाती है.