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Updated on: 21 April, 2026 6:23 PM IST
पटना में हरी खाद एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम की झलक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 21 अप्रैल, 2026 को हरी खाद एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 20 किसानों ने भागीदारी की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को सतत् मृदा प्रबंधन की उन्नत एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के प्रति जागरूक करना था। 

विशेषज्ञों द्वारा हरी खाद की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए ढैंचा, सनई एवं मूंग जैसी उपयुक्त फसलों के बारे में जानकारी दी गई। यह भी बताया गया कि दलहनी फसलें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मृदा की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

किसानों को यह जानकारी दी गई कि हरी खाद से मृदा की संरचना में सुधार होता है, कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है तथा समग्र मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और दीर्घकालीन रूप से उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। 

कार्यक्रम में संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। किसानों को सलाह दी गई कि वे फसल की आवश्यकता एवं मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें, जिससे पोषक तत्वों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। यह पद्धति न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण एवं मृदा की दीर्घकालिक उत्पादकता को भी बढ़ावा देती है। 

फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सतत् कृषि पद्धतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. शिवानी एवं श्री अभिषेक कुमार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें संतुलित उर्वरक उपयोग एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के संबंध में व्यावहारिक एवं उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई, जो उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में किया गया।

English Summary: Awareness Program Green Manure Balanced Fertilizer Icar Patna
Published on: 21 April 2026, 06:29 PM IST

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