Success Story: 1250 एकड़ में जैविक खेती, देसी गायों की डेयरी और 40 करोड़ का टर्नओवर - लेखराम यादव की सफलता की कहानी Success Story: 72 एकड़ में गन्ने की खेती, इंटरक्रॉपिंग मॉडल और 2 करोड़ का कारोबार - सरताज खान की सफलता की कहानी खेती से 100 करोड़ का टर्नओवर: हेलीकॉप्टर के बाद अब हवाई जहाज से कृषि क्रांति लाएंगे डॉ. राजाराम त्रिपाठी Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 22 January, 2024 11:12 AM IST
सेब की फसल पर मंडराए खतरे के बादल

Apple Production: सेब उत्पादन करने वाले किसानों के लिए एक बुरी खबर है. देश में इस वर्ष औसत से कम बारिश और बर्फबारी के कारण सेब के उत्पादन में गिरावट आने का अनुमान है. ये सेब बागवानों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. दरअसल, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे सेब उत्पादक राज्यों में इस बार न के बराबर बर्फबारी हुई है. जिसके कारण किसान काफी चिंतित है. जनवरी महीने में एक हफ्ते से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इन राज्यों में बारिश नहीं हुई है. बारिश नहीं होने के कारण, बर्फबारी का भी कोई नामोनिशान नहीं है. इससे सेब की फसल को जरूरत के मुताबिक, सर्दियों वाला मौसम नहीं मिल रहा है. इस परिस्थिति में विशेषज्ञों का कहना है कि कम बर्फबारी के कारण सेब के आकार पर असर पड़ेगा और उसकी मीठास भी कम हो जाएगी.

उत्पादन घटने का अनुमान

बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कुछ दिनों में बारिश और बर्फबारी नहीं होती है, तो सेब के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. उत्पादन में कमी आने के कारण सेब की कीमत भी बढ़ सकती है. कहा जा रहा है कि बारिश न होने के कारण जमीन से नमी गायब हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप सेब के पौधों को नमी समुचित रूप से नहीं मिल पा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार सेब के पौधों के विकास के लिए कम से कम 800 से 1000 घंटे के चिलिंग पीरियड की जरूरत होती है. लेकिन, बारिश-बर्फबारी न होने के कारण चिलिंग पीरियड पूरा नहीं हो पाया है. ऐसे में सेब उत्पादन प्रभावित होने के पूरे आसार हैं.

बारिश के लिए देवताओं की पूजा

यदि हिमाचल प्रदेश की बात करें, तो यहां के किसान भी बारिश और बर्फबारी न होने से परेशान हैं. राज्य में बारिश और बर्फबारी की कमी के कारण सेब के 5500 करोड़ रुपये के कारोबार पर खतरा मंडरा रहा है. क्योंकि, बर्फबारी अभी तक शुरू नहीं हुई है, जिससे चिलिंग पीरियड की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है. इससे राज्य के हजारों बागबानों की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में बागवान बारिश और बर्फबारी के लिए देवी-देवताओं की प्रार्थना कर रहे हैं.

IMD ने बताया कब होगी बारिश

हिमाचल के अलावा उत्तराखंड में भी बड़े स्तर पर सेब की खेती की जाती है. यहां करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब के बागान हैं. जिससे हर साल लगभग 67 हजार टन सेब का उत्पादन होता है. बागेश्वर, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, नैनीताल, चंपावत, चमोली और देहरादून जैसे जिलों में किसान सेब उगाते हैं. साथ ही, इन इलाकों में किसानों द्वारा नाशपाती, पुलम और खुमानी की खेती भी की जाती है. यही वजह है की यहां के किसान बारिश और बर्फबारी न होने के कारण काफी परेशान हैं. किसानों का कहना है कि अगर बारिश और बर्फबारी नहीं हुई तो इससे उनकी फसल बर्बाद हो जाएगी. वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में आने वाले कुछ दिनों में बारिश-बर्फबारी होने के आसार हैं.

English Summary: Apple Production expected to decrease due to lack of snowfall apple crop is in danger due to weather conditions
Published on: 22 January 2024, 11:13 AM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now