गर्मियों का मौसम आते ही लोगों को चक्कर, कमजोरी जैसी शिकायत आनी शुरु हो जाती है. ऐसे में वह शरीर को ठंडा रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए देसी सुपरफूड्स की ओर रुख करते हैं. इनमें गोद और गोंद कतीरा का नाम सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है, लेकिन इसके सेवन करने के दौरान लोगों को परेशानी आती है इन दोनों की सही पहचान करने की काफी लोग इसे एक ही समझ लेते हैं, लेकिन सच तो यह है कि दोनों की तासीर और फायदे पूरी तरह अलग होते हैं. चलिए जानते हैं.
क्या है गोंद?
गोंद मुख्य रूप से बबूल या कीकर जैसे पेड़ों (अकेशिया प्रजाति) से प्राप्त होने वाला प्राकृतिक गोंद होता है. यह छोटे-छोटे, चमकदार, भूरे या पीले रंग के टुकड़ों में मिलता है. साथ ही इसका सेवन सर्दियों में काफी लाभकारी होता है, क्योंकि इसकी तासीर बेहद गर्म होती है, जो शरीर में गर्माहट पैदा करती है.
कैसे करें सेवन?
अगर आप गोद का सेवन करना चाहते हैं तो इसका सेवन आप घी या तेल में तलने पर यह पॉपकॉर्न की तरह इसका सेवन कर सकते हैं या फिर इसका उपयोग गोद के लड्डू पंजीरी आदि बनाने में किया जा सकता है और इसकों डाइट में लाने से यह चमत्कारी फायदे होते हैं-
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कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर
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हड्डियों को मजबूत करता है
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इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार
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कमजोरी और थकान दूर करता है
क्या है गोंद कतीरा?
गोंद कतीरा एक अलग प्रकार का प्राकृतिक गोंद है, जो आमतौर पर सफेद या हल्के पीले रंग का होता है और देखने में क्रिस्टल जैसा लगता है और अगर आप इसका सेवन गर्मीयों में करें तो अधिक बेहतर रहता है, क्योंकि गोंद कतीरा की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर को ठडंक प्रदान करती है और खासतौर पर इसका सेवन गर्मीयों में ही किया जाता है.
कैसे करें सेवन?
अगर आप गोंद कतीरा अपनी डाइट में लाने की सोच रहे हैं, तो इसका सेवन आप इस तरह से कर सकते हैं-
सबसे पहले आप गोंद कतीरा को पानी में भिगो दें जो पानी में घुलता नहीं, बल्कि फूलकर जेली जैसा बन जाता है. इलके बाद इसे शरबत, लस्सी या दूध में मिलाकर पिया जा सकता है. अगर आप इसका सेवन सुबह खाली पेट करते हैं तो आप हीट स्ट्रोक, नकसीर (नाक से खून आना), डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं.
ऐसे करें पहचान?
गोंद: इसकी पहचान आप छोटे, सख्त, चमकदार टुकड़े तलते हैं तो फूलता है. इससे यह पहचान की जा सकती है कि यह गोद है.
गोंद कतीरा: हल्के, पारदर्शी क्रिस्टल होते हैं, जो पानी में भिगोने पर जेली बनता है. यह इसकी पहचान होती है.
लेखक: रवीना सिंह