गर्मी के मौसम में हर व्यक्ति को ऐसे फल की तलाश रहती है, जिसके सेवन से उनकी सेहत भी अच्छे रहे और शरीर में पानी की पूर्ति भी पूरी होती रहे. गर्मी के इस मौसम में तरबूज का सेवन भी फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि इस फल में भरपूर मात्रा में पानी पाया जाता है, जो इस मौसम में शरीर के लिए बेहद जरुरी होता है, लेकिन अभी हाल ही में तरबूज में केमिकल के इस्तेमाल की खबर सामने आ रही है, जिससे लोगों के मन में डर बैठ गया है. कैसे असली तरबूज की पहचान करें, तो आइए इस आर्टिकल में जानें.
अगर आप मार्केट से तरबूज खरीद रहे हैं, तो इन घरेलू तरीकों से आप मिलावटी या केमिकल से पके तरबूज की पहचान कर सकते हैं-
क्यों खतरनाक है केमिकल वाला तरबूज?
अक्सर जब भी मौसम का फल बाजारों में आता है, जैसे तरबूज फल विक्रेता कई बार इस फल को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल करते हैं. यह केमिकल शरीर में जाकर कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है-
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उल्टी और दस्त
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पेट दर्द और पाचन संबंधी दिक्कत
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किडनी और लीवर पर असर
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लंबे समय में स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
इन 3 तरीकों से करें असली तरबूज की पहचान
1. कॉटन या कपड़े से करें टेस्ट
यह सबसे आसान और कारगर तरीका माना जाता है और इस तरीके को करने के लिए सबसे पहले आप तरबूज को काटें और उसके बाद सफेद कॉटन या कपड़ा रगड़ें. अगर कपड़ा लाल हो जाए या फिर रंग छोड़ना शुरु कर दें, तो समझ जाए की इस फल में मिलावट की गई है.
2. पानी वाला टेस्ट
पानी वाला टेस्ट मिलावट पकड़ने में काफी हद तक मददगार हो सकता है. अगर आप बाजार से तरबूज लेकर आए है, तो इस टेस्ट को करने के लिए सबसे पहले आप तरबूज का एक टुकड़ा काट लें. उसके बाद उस टुकड़े को पानी से भरे बर्तन में डाल दें. अगर पानी का रंग हल्का लाल या गुलाबी होने लगे, तो यह यह केमिकल या रंग मिलावट का संकेत है.
3. स्वाद से पहचानें
प्राकृतिक रुप से गर्मी के सीजन का यह फल ताजगी भरा और मीठे स्वाद का होता है. ऐसे में तरबूज की असली-नकली की पहचान करना बेहद ही आसान है. अगर तरबूज का स्वाद फीका लगे,मिठास कम हो हल्की अजीब गंध आए, तो समझ जाए की यह केमिकल से पका हुआ हो सकता है.
खरीदते समय बरतें ये सावधानियां
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अगर आप इस फल को खरीद रहे हैं, तो हमेशा भरोसेमंद दुकानदार से फल खरीदें. साथ ही बहुत सस्ते या असामान्य दिखने वाले तरबूज से बचें
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कटे हुए तरबूज खरीदने से बचें
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घर लाने के बाद अच्छे से धोकर ही काटें
लेखक: रवीना सिंह