देश के किसान अब सिर्फ पारपंरिक खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि बाजारों की मांग और बदलते समय को समझते हुए सब्जियों की उन्नत खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. साथ ही खास बात यह है कि किसान अब नर्सरी तैयार कर वैज्ञानिक तरीकों से खेती कर रहे हैं, जिससे किसानों को कम समय में अच्छा उत्पादन और बड़िया मुनाफा मिल रहा है.
वहीं, कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जनवरी का महीना सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, जिससे किसानों को समय पर फसल मिलने के साथ-साथ अच्छी आमदनी भी हो जाती है.
जनवरी में नर्सरी, फरवरी में खेतों में रोपाई
अगर किसान भाई सब्जियों की नर्सरी जनवरी में तैयार करते है, तो वह फरवरी माह के पहले सप्ताह तक फसल की रोपाई कर सकते हैं, क्योंकि इस समय यह फसल पूरी तरह से रोपाई के लिए तैयार हो जाती है और जब किसान फरवरी के महीने में रोपाई करते हैं, तो वह मार्च-अप्रैल तक फसल बाजार में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इस समय बाजार में पुरानी सब्जियां लगभग खत्म हो जाती है. ऐसे में किसानों को नई फसलों के अच्छे दाम मिल जाते हैं.
किन सब्जियों की नर्सरी से हो रही अच्छी कमाई?
जनवरी के महीने में किसान कई ऐसी सब्जियां हैं, जिनकी नर्सरी आसानी से तैयार कर सकते हैं, जिनकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. इनमें प्रमुख है-
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टमाटर
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फूलगोभी
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बैंगन
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खीरा और लौकी
इन सब्जियों की खासियत यह है कि जल्दी फसल आने पर किसानों को इनकी कीमत अच्छी मिल जाती है. यही वजह है कि किसान पारंपरिक गेहूं-धान के साथ-साथ अब सब्जियों की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं.
खेत में रोपाई से क्यों होता है नुकसान?
अगर किसान जनवरी के महीने में इन सब्जियों के बीज बोने या फिर पौधे रोपित करते हैं, तो बाहरी नुकसान का सामना करना पड़ सकता हैं, क्योंकि ज्यादा ठंड होने के कारण पौधों में गलन जैसी समस्याएं होना शुरु हो जाती है, जिसके चलते किसानों को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है.
लो टनल और मिनी पॉलीहाउस से क्या फायदा होगा?
किसान ठंड से नर्सरी को बचाने के लिए लो टनल और मिनी पॉलीहाउस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस तकनीक के जरिए नर्सरी के अंदर का तापमान नियंत्रित रहता हैं, जिससे पौधों पर ठंड का असर कम होता है और लो टनल और मिनी पॉलीहाउस तकनीक से पौधे अधिक स्वस्थ होते हैं, उनकी बढ़वार तेजी से होती है और बाद में खेत में लगाने पर बेहतर फलन मिलता है, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो जाता है.
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
किसान अगर घर पर ही नर्सरी तैयार करते हैं, तो उनको सबसे बड़ा फायदा यह होगा. किसानों को बाहर से पौधे खरीदने की जरुरत नही होगी, जिससे खेती की लागत भी कम हो जाएगी. इसके अलावा किसान क्यारी की चौड़ाई ढाई से तीन मीटर रखे और लंबाई किसान अपनी सुविधा के अनुसार रख सकते हैं.
वहीं, अगर किसान मिट्टी को भुरभुरी बनाकर उसमें गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाते हैं, तो इससे पौधों की जड़ें मजबूत बनती है और नर्सरी जल्दी विकसित हो जाती है.