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Updated on: 9 July, 2026 1:48 PM IST
धान की टॉप-5 हाई-यील्ड किस्में (Image Source-AI generate)

देश के किसान धान की पैदावार बड़े पैमाने पर करते हैं और अब खरीफ सीजन चल रहा है. यह मौसम इस फसल की बुवाई के लिए बेहद ही उचित है माना जाता है. ऐसे में अगर आप भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित इन पांच उन्नत किस्मों का चुनाव करते हैं, तो 120 दिनों में इस किस्म से 57.1 क्विंटल से अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

1. पूसा बासमती 1847

वर्ष 2021 में विकसित पूसा बासमती 1847 किसानों के लिए अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बासमती किस्म है. यह दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित है. यह खरीफ मौसम की सिंचित परिस्थितियों में लगभग 120 दिनों में तैयार हो जाती है. किसान अगर इस खरीफ सीजन में इस किस्म का चुनाव करते हैं तो वह 57.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

2. पूसा बासमती 1692

पूसा बासमती 1692 वर्ष 2020 में विकसित की गई थी. यह हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए उपयुक्त है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल 115 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. सिंचित परिस्थितियों में इसकी औसत पैदावार 52.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है. यह अर्ध-बौनी, शीघ्र पकने वाली और अधिक उत्पादन देने वाली बासमती किस्म है, जिससे किसानों को समय और लागत दोनों में लाभ मिल सकता है.

3. पूसा संबा 1850

पूसा संबा 1850 विशेष रूप से उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अनुशंसित है. यह खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों में लगभग 140 दिनों में तैयार होती है. यानी की अगर किसान इस खरीफ सीजन में इस किस्म की पैदावार अपने खेतों में करते हैं तो वह इस किस्म से 47.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

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4. पूसा बासमती 1718

पूसा बासमती 1718  बैक्टीरियल ब्लाइट से सुरक्षा के साथ बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों में से एक है. यह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए सही विकल्प है, जिससे इन इलाकों के किसान इस किस्म से 135 दिनों में 46.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही यह लोकप्रिय पूसा बासमती 1121 का बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोधी उन्नत संस्करण है, जिससे रोग का खतरा कम होता है और फसल की गुणवत्ता बनी रहती है.

5. पूसा बासमती 1637

वर्ष 2016 में विकसित पूसा बासमती 1637 पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब के किसानों के लिए उपयुक्त है. यह लगभग 130 दिनों में तैयार हो जाती है. सीमित सिंचाई की परिस्थितियों में किसानों को इस किस्म से 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार मिल सकती है. इसकी प्रमुख विशेषता ब्लास्ट रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता है, जिससे किसानों को रोग प्रबंधन पर कम खर्च करना पड़ता है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Top-5 High Yield Paddy Varieties for Kharif Season High Profit Rice Farming
Published on: 09 July 2026, 01:54 PM IST

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