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Updated on: 31 July, 2026 5:25 PM IST
पूसा मूंग की टॉप-3 उन्नत किस्में (Image Source-AI generate)

भारत देश में दलहनी फसलों की एक अलग ही जगह है, जिनकी खेती कुछ किसान खरीफ सीजन और कुछ किसान रबी सीजन में बड़े पैमाने पर करते हैं. अब इस वक्त किसान खरीफ सीजन की फसल की तैयारी में व्यस्त है. इसी के चलते किसान अगर ICAR-IARI पूसा द्वारा विकसित मूंग की इन 3 उत्तम किस्मों की खेती करते हैं, तो, वह 65 दिनों के अंदर तगड़ा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

आइए जानते हैं पूसा विशाल, पूसा 672 और पूसा 1371 की प्रमुख विशेषताओं के बारे में

पूसा विशाल 

पूसा विशाल उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के किसानों के लिए एक भरोसेमंद किस्म मानी जाती है. ऐसे में अगर किसान इस खरीफ सीजन इस किस्म का चुनाव कर इसकी पैदावार करते हैं, तो वह इस किस्म से 65 दिनों में 1.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही किसान इस किस्म से कम समय में फसल लेकर अगली खेती की तैयारी आसानी से कर सकते हैं.

खासियत-  इस किस्म की खासियत है इसके मोटे दाने और समकालिक (एक साथ) परिपक्वता है, जिससे कटाई आसान हो जाती है और उत्पादन की गुणवत्ता बनी रहती है. इसके अलावा यह येलो मोजेक वायरस (MYMV) के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे फसल को रोगों से होने वाले नुकसान में कमी आती है.

पूसा 672

पूसा 672 का विकास वर्ष 2010 में किया गया. यह किस्म विशेष रूप से उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विकसित की गई है और खरीफ मौसम में वर्षा आधारित खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है. ऐसे में किसान भाई इस  किस्म से लगभग 52 से 103 दिनों में तैयार कर 9.5 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

खासियत- पूसा 672 की खासियत यह है कि यह येलो मोजेक वायरस (MYMV) और सरकोस्पोरा लीफ स्पॉट जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी है. इसके 100 दानों का वजन 3.8 से 5.3 ग्राम तक होता है, जो इसकी अच्छी दाना गुणवत्ता को दर्शाता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण किसानों को रासायनिक दवाओं पर अपेक्षाकृत कम खर्च करना पड़ता है.

पूसा 1371

पूसा 1371 भी उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित एक उन्नत किस्म है. यह खरीफ मौसम में वर्षा आधारित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है और लगभग 87 दिनों में तैयार हो जाती है. यानी की अगर किसान इस खरीफ सीजन इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो वह इससे 9.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

खासियत- यह किस्म कई प्रमुख रोगों जैसे येलो मोजेक वायरस (MYMV), मूल विगलन (Root Rot), वेब ब्लाइट और एन्थ्राकनोज के प्रति प्रतिरोधी है. पोषण की दृष्टि से भी यह किस्म बेहतर मानी जाती है. इसमें लगभग 24.1 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जो इस किस्म को खास बनाता है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Top 3 Pusa Moong Varieties Higher Yield less Time Moong Cultivation
Published on: 31 July 2026, 05:29 PM IST

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