देश में गर्मी के सीजन में कई ऐसे राज्य होते हैं जहां तेज गर्मी के प्रकोप से सूखे जैसे हालात बन जाते हैं और इन हालातों में किसानों को यह चिंता सताती है कि इस मौसम में किस फसल का चुनाव करें, जिसकी खेती कर अधिक उत्पादन मिल सकें. ऐसे में किसान अगर इन टॉप-3 फसलों का चयन करते हैं तो इनकम के साथ अच्छा तगड़ा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली टॉप-3 फसलें
1. ज्वार
अगर किसान भाई ज्वार फसल की खेती करते हैं तो डबल फायदा उठा सकते हैं, क्योंकि यह किस्म कम सिंचाई वाली प्रमुख फसलों में शामिल है. यह मानव भोजन के अलावा पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में भी काफी उपयोगी मानी जाती है. इसकी खेती में पानी की आवश्यकता अन्य कई फसलों की तुलना में कम होती है और विपरीत मौसम की परिस्थितियों में भी इसका विकास अच्छा रहता है. यही कारण है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ज्वार की खेती किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प मानी जाती है. इससे अनाज और चारे दोनों की जरूरत पूरी हो जाती है.
2. मूंग
मूंग एक कम अवधि में तैयार होने वाली दलहनी फसल है, जिसकी कटाई लगभग 60 से 70 दिनों में की जा सकती है. यह कम पानी में भी अच्छी उपज देती है और किसानों को कम समय में आय प्राप्त करने का अवसर देती है. इसके अलावा मूंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर भूमि की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है. इससे अगली फसल के लिए भी खेत की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो सकती है.
3. बाजरा
अगर किसान भाई इस फसल का चुनाव करते हैं तो कम समय में अच्छी इनकम हासिल कर सकते हैं. बाजरा एक ऐसी मोटा अनाज फसल है, जो कम वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है. इसकी जड़ें मिट्टी में मौजूद सीमित नमी का भी प्रभावी उपयोग कर लेती हैं, जिससे फसल लंबे समय तक सूखे का सामना कर सकती है. हाल के वर्षों में मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा मिलने के कारण बाजरा की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ रही है. पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसकी अच्छी कीमत मिलती है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है.
लेखक: रवीना सिंह