खरीफ सीजन में किसान अगर खीरे की खेती करते हैं तो अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं. यह मौसम खीरे की खेती करने के लिए बेहद ही अनुकूल माना जाता है. किसान अगर इस मौसम में यानी की इस मानसून की बारिश में खेती करते हैं तो खीरे की इन उन्नत किस्मों से अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं. क्योंकि इस मौसम में मिट्टी में नमी रहती है, जिससे उपज भी अधिक होती है. आइए आगे जानें कौन-सी है खीरे की यह 3 उन्नत किस्में.
जुलाई के मौसम में क्यों करें खीरे की खेती?
खीरा एक कम अवधि वाली नकदी फसल है, जो बुवाई के लगभग 45 से 60 दिनों के भीतर फल देना शुरू कर देती है. मानसून के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी रहने से पौधों का विकास तेजी से होता है और सिंचाई पर भी कम खर्च आता है. यदि किसान खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था रखें और रोग प्रबंधन पर ध्यान दें, तो इस मौसम में भी शानदार उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
खीरे की टॉप 3 उन्नत किस्में
1. पूसा बरखा
पूसा बरखा मानसून के मौसम के लिए विकसित की गई लोकप्रिय किस्म है. यह अधिक नमी और वर्षा की परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन करती है. इसके फल गहरे हरे रंग के, आकर्षक और बाजार में पसंद किए जाने वाले होते हैं. यह किस्म जल्दी तैयार हो जाती है और कई सामान्य रोगों के प्रति बेहतर सहनशीलता रखती है. साथ ही इस किस्म से किसान 18.0 टन/ हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.
2. पूसा पार्थेनोकार्पिक खीरा हाइब्रिड-1
खीरे की यह किस्म राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली) के लिए अनुमोदित यह उन्नत संकर कम लागत वाले पॉलीहाउस में सर्दियों के ऑफ-सीजन (नवंबर–मार्च) के दौरान खेती के लिए उपयुक्त है. किसान अगर इस किस्म की पैदावार करते हैं तो वह इसकी पहली तुड़ाई बुवाई के 40–45 दिनों बाद शुरू कर 143.6 टन प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर सकते हैं और बाजार में इस किस्म को समय पर बेच अच्छी आमदनी कमा सकते हैं.
3. स्वर्ण पूर्णा
स्वर्ण पूर्णा उच्च उत्पादन और उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. इसके फल स्वादिष्ट, समान आकार के और आकर्षक रंग वाले होते हैं. यह किस्म मानसून की नमी को अच्छी तरह सहन करती है. संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर देखभाल करने पर किसानों को अच्छी उपज और बेहतर आय मिल सकती है.
लेखक: रवीना सिंह