खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है और खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच देशभर के किसान बेहतर उत्पादन और कम जोखिम वाली फसलों की तलाश में जुटे हैं. ऐसे में किसान भाई अगर ICAR द्वारा विकसित बाजरा (पर्ल मिलेट) टॉप 3 बाजरा किस्मों का चुनाव करते हैं, तो कम समय में इन उन्नत किस्मों से बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं.
इसके अलावा, कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पूसा सीरीज़ की कई उन्नत किस्में किसानों को अधिक उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता का लाभ दे रही हैं. इनमें से ये टॉप 3 बाजरा किस्में किसानों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी जा रही हैं-
1. पूसा 1801 (संकर)
पूसा 1801 (संकर) वर्तमान में बाजरा की सबसे उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों में शामिल है. इसे खास तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए विकसित किया गया है, लेकिन समान जलवायु वाले क्षेत्रों में भी यह अच्छा प्रदर्शन करती है. अगर किसान बाजारा की इन किस्म का चुनाव करते हैं, तो वह इससे लगभग 33.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं, जो अन्य किस्मों की तुलना में काफी अधिक है. इसकी परिपक्वता अवधि करीब 83 दिन है, जिससे किसान समय पर कटाई कर अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं.
खासियत- पूसा 1801 (संकर) सबसे बड़ी खासियत इसकी बहु-रोग प्रतिरोधक क्षमता है. यह डाउनी मिल्ड्यू, ब्लास्ट, एर्गोट, स्मट और रतुआ जैसे प्रमुख रोगों से बचाव प्रदान करती है. इसके अलावा इसमें लौह (70 पीपीएम) और जिंक (57 पीपीएम) की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो इसे पोषण के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण बनाती है.
2. पूसा 1201 (संकर)
पूसा 1201 (संकर) उन किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प है जो मध्यम अवधि में अच्छी पैदावार और पोषण दोनों चाहते हैं. यह किस्म मुख्य रूप से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है. साथ ही इस किस्म से किसान लगभग 28.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार करीब 80 दिनों में प्राप्त कर सकते हैं. यानी की यह बाजारा की किस्म जल्दी पकने वाली किस्मों में से एक है, जो किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है.
खासियत- पूसा 1201 (संकर) यह किस्म डाउनी मिल्ड्यू और ब्लास्ट रोगों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है, जिससे फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होती है. इसके दानों में लौह (55 पीपीएम) और जिंक (48 पीपीएम) की अच्छी मात्रा होती है, जो इसे पोषण सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है. यही कारण है कि यह किस्म पोषक अनाज मिशन के तहत भी प्रोत्साहित की जा रही है.
3. पूसा कम्पोजिट 701
पूसा कम्पोजिट 701 एक ऐसी किस्म है जो बड़े भौगोलिक क्षेत्र में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है. यह राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों के लिए उपयुक्त है. यानी अगर इन क्षेत्रों के किसान बाजरा की इस किस्म का चुनाव करते हैं तो करीब 23.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक इससे उपज प्राप्त कर अच्छी कमाई कर सकते हैं वो भी लगभग 80 दिनों में यानी की यह किस्म कम अवधि में पककर तैयार हो जाती है. साथ ही इस किस्म से वर्षा आधारित और सिंचित दोनों परिस्थितियों में अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जो इसे छोटे और सीमांत किसानों के लिए आदर्श बनाती है.
खासियत- इसकी खासियत है डाउनी मिल्ड्यू के प्रति उच्च प्रतिरोध और पोषण की दृष्टि से इसमें लौह (48 पीपीएम) और जिंक (41 पीपीएम) की पर्याप्त मात्रा मौजूद है.