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Updated on: 10 February, 2026 4:56 PM IST
टमाटर की फसल पर कीटों का बढ़ता खतरे से ऐसे करें बचाव (Image Source-AI generate)

फरवरी का महीना चल रहा है और किसानों के लिए मुसीबत बढ़ती जा रही है, क्योंकि फरवरी के महीने में टमाटर की फसल में कीड़ा लगने की अधिक संभावना रहती है. पौधों पर जब फल छेदक रोग लगता है, तो पौधे सूखने लगते हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है और इससे किसानों को तगड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है, क्योंकि टमाटर एक ऐसी फसल है, जिसकी मांग बारह महीने बनी रहती है और ऐसे में फसल को रोग लगना किसानों की आमदनी में कमी ला सकता है.

आगे इस लेख के माध्यम से जानें टमाटर की फसल को कीटों से बचाव और प्रबंधन के बारे में विस्तार से-

फल छेदक का प्रकोप और नुकसान

अगर आप टमाटर की खेती कर रहे हैं, तो कीट रोग की पहचान होती है. सूंडी मुलायम पत्तियों को बुरी तरह कुतरकर खाती है. जैसे-जैसे सूंडी वयस्क अवस्था में पहुंचती है, यह फल में गोल छेद बनाकर अपने शरीर का आधा भाग अंदर घुसा देती है और फल के गूदे को खाती है. इसके परिणामस्वरूप फल सड़ने लगते हैं और बाजार में उनकी कीमत गिर जाती है और यदि टमाटर की फसल में कीड़ों का अधिक प्रकोप की स्थिति हो जाती है, तो 30 से 50 प्रतिशत तक उपज प्रभावित हो सकती है.

सफेद मक्खी कीट की पहचान

टमाटर के पौधों के लिए सफेद मक्खी दोहरी मार साबित होती है. इसके वयस्क और निम्फ पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं. साथ ही यह मोजैक वायरस जैसी खतरनाक बीमारियों का प्रसार भी करती है. वायरस संक्रमित पौधों में पत्तियां सिकुड़ जाती हैं, वृद्धि रुक जाती है.

खेत की तैयारी से ही नियंत्रण की शुरुआत ऐसे करें

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कीट प्रबंधन की शुरुआत खेत की तैयारी से ही हो जानी चाहिए. खेत में गहरी जुताई करने से मिट्टी में मौजूद प्यूपा और सूंडियां ऊपर आ जाती हैं, जिन्हें तेज धूप नष्ट कर देती है या पक्षी खा लेते हैं. इससे किसानों को यह लाभ होता है कि प्रारंभिक स्तर पर ही कीटों की संख्या कम हो जाती है, जिससे टमाटर के पौधे कीट की चपेट में नहीं आते.

 इन जैविक उपाय को अपनाएं

किसान भाई फसल की रोपाई के 20 दिन बाद 250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नीम खली का प्रयोग फल छेदक और पत्ती सुरंगक के आक्रमण को रोक सकते हैं. इसके अलावा, फल छेदक के जैविक नियंत्रण के लिए किसान को ट्राइकोग्रामा प्रोटिओसम का 1.50 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से फूल आने के समय इसका प्रयोग करना चाहिए. साथ ही फल छेदक की निगरानी के लिए प्रति हेक्टेयर पांच फेरोमोन ट्रैप लगाना भी एक प्रभावी उपाय है. इससे कीटों की संख्या और प्रकोप का सही आकलन किया जा सकता है. साथ ही, टमाटर की 15 पंक्तियों के बाद गेंदे की एक पंक्ति लगाने से फल छेदक का आकर्षण कम होता है और फसल सुरक्षित रहती है.

जैव-कीटनाशकों का उपयोग

किसान टमाटर की फसल को फल छेदक के प्रकोप से बचने के लिए एजाडायरेक्टिन (1000 पीपीएम) का छिड़काव 1–2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से 15 दिन के अंतराल पर कर सकते हैं. यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ लाभकारी कीटों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है.

रासायनिक नियंत्रण के विकल्प

अगर किसानों की टमाटर के पौधों में यदि कीटों का प्रकोप अधिक हो, तो वह आवश्यकतानुसार अनुशंसित रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं. साथ ही टमाटर में फल भेदक को नियंत्रित करने के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी (3 मिली/10 लीटर पानी), फ्लुबेंडियामाइड 39.35% एससी (3 मिली/10 लीटर), फ्लक्सामेटामाइड 10% ईसी (8 मिली/10 लीटर) या नोवेल्यूरॉन 10% ईसी (15 मिली/10 लीटर) का छिड़काव कर टमाटर की फसल का बचाव कर सकते हैं.

 सफेद मक्खी का रासायनिक प्रबंधन

अगर टमाटर के पौधों में सफेद मक्खी कीट लग गया है, तो घबराएं नहीं इस कीट को नियंत्रण के लिए किसान भाई डायफेंथियुरोन 50% डब्ल्यूपी (12 ग्राम/10 लीटर), स्पाइरोमेसिफेन 22.9% एससी (125 मिली/10 लीटर) या थियामेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी (4 ग्राम/10 लीटर पानी) का छिड़काव कर फसल की सुरक्षा कर सकते हैं.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Tomato Pests Increasing threat on tomato crop Adopt integrated management to protect against fruit borer and whitefly
Published on: 10 February 2026, 05:02 PM IST

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