गर्मी का मौसम शुरु होने के बाद किसानों के मन में यह उलझन होती है कि वह इस मौसम में किस फसल की खेती करें, जिससे उनकी आय में इजाफा हो सकें. ऐसे में अगर किसान भाई तोरई की खेती करते हैं, तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. साथ ही इस सब्जी की गर्मी के मौसम में अधिक मात्रा में मांग रहती है, जिससे किसानों की अधिक कमाई होने की संभावना बढ़ जाती है.
इसके अलावा, अप्रैल का महीना इस फसल की बुवाई के लिए सबसे सही माना जाता है, जिससे समय पर फसल तैयार होकर अच्छे दाम मिलने की गुंजाइश बढ़ जाती है.
कम समय में तैयार, जल्दी आमदनी
तोरई की सबसे बड़ी खासियत इसकी जल्दी तैयार होने वाली फसल है. अप्रैल महीने में इसकी बुवाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है और महज 40 से 45 दिनों के भीतर फसल तैयार हो जाती है. इससे किसानों को लंबे इंतजार के बिना जल्दी बाजार में उपज बेचने का मौका मिलता है और नकदी प्रवाह बना रहता है.
गर्मियों में बढ़ती डिमांड का फायदा
गर्मी के मौसम में हरी सब्जियों की मांग बढ़ जाती है, जिसमें तोरई की मांग काफी अधिक होती है. बाजार में इसकी अच्छी खपत होने के कारण किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. यही वजह है कि यह फसल कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली साबित हो रही है.
खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियां
तोरई की अच्छी पैदावार के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. खेत में जल निकासी का अच्छा इंतजाम होना जरूरी है, क्योंकि पानी रुकने से फसल को नुकसान हो सकता है. बुवाई से पहले खेत की 2-3 बार जुताई कर उसे भुरभुरा बनाया जाता है. इसके बाद बेड तैयार कर 1 से 2 फीट की दूरी पर बीज बोए जाते हैं.
मचान तकनीक से बढ़ती गुणवत्ता
तोरई की खेती में मचान (ट्रेलिस) तकनीक का इस्तेमाल किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है. इस तकनीक में बेलों को ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे फल जमीन को छूते नहीं हैं. इससे सड़न की संभावना कम हो जाती है और फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है. साथ ही, धूप और हवा का सही संचार होने से उत्पादन भी बढ़ता है और तुड़ाई में आसानी होती है.
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
तोरई की खेती की सबसे बड़ी ताकत इसका कम लागत वाला मॉडल है. एक बीघा जमीन में इसकी खेती करने पर लगभग 7 से 8 हजार रुपये का खर्च आता है. वहीं, सही देखभाल और तकनीक अपनाने पर किसान 70 से 80 हजार रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. यानी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुनाफा संभव है.
लेखक: रवीना सिंह