Sugarcane New Variety Co-18022: गन्ने की प्रजाति को Co-238 में (लाल सड़न) अन्य कीटों के प्रकोप के कारण उत्पादन काफ़ी तेज़ी से गिरा है. जिसके कारण किसानों को नई प्रजातियां का चुनाव करने में परेशानी हो रही है लेकिन अब नई प्रजाति आ गई है. किसान भाई नई क़िस्म CO-18022 की बुवाई करके अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते है. गन्ने की खेती में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. पिछले कुछ समय से हमारी पसंदीदा किस्म Co-0238 में 'लाल सड़न' (Red Rot) की बीमारी के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था. इसी समस्या का समाधान करते हुए गन्ना प्रजनन संस्थान (SBI), करनाल ने नई किस्म Co-18022 पेश की है, जिसे 'कर्ण-18' के नाम से जाना जाता है.
क्यों है यह किस्म खास?
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बीमारियों से मुक्ति:- यह किस्म रेड रोट (लाल सड़न) के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी है. साथ ही, इसमें टॉप बोरर जैसे घातक कीटों का हमला भी बहुत कम देखा गया है.
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बम्पर पैदावार:- इसकी औसत पैदावार 986 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (लगभग 400 क्विंटल प्रति एकड़) तक दर्ज की गई है.
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चीनी की अधिक मात्रा: इसमें चीनी की रिकवरी लगभग 11% है, जो मिलों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है.
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मजबूत और सीधा गन्ना:- Co-18022 का गन्ना मोटा और सीधा होता है. यह किस्म तेज हवाओं में गिरती नहीं है.
कैसे करें असली Co-18022 की पहचान?
किसान भाई बीज लेते समय इन लक्षणों को जरूर देखें ताकि असली और शुद्ध बीज की पहचान हो सके:
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गन्ने का रंग: इसका गन्ना हल्का हरा और पीलापन लिए हुए होता है. ज्यादा धूप पड़ने पर गन्ने पर हल्का बैंगनी रंग भी दिख सकता है.
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गन्ने की आँख (Bud): इसकी आँखें उभरी हुई और अंडाकार (Oval) होती हैं. जमाव (Germination) के समय यह बहुत जल्दी फुटाव लेती हैं.
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पत्तियां: इसकी पत्तियां गहरी हरी और चौड़ी होती हैं. पत्तियां ऊपर की ओर सीधी खड़ी रहती हैं, जिससे फोटोसिंथेसिस अच्छा होता है.
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पोर: इसके पोर बेलनाकार और ठोस होते हैं. बीच से काटकर देखने पर गन्ना पूरा भरा हुआ और सफेद होता है.
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छिलका: इसका अगोला और छिलका उतारने में आसान होता है, जिससे छिलाई के समय मेहनत कम लगती है.
खेती के लिए जरूरी टिप्स:-
बुवाई का समय: वसंतकालीन बुवाई के लिए फरवरी और मार्च का महीना सबसे उत्तम है.
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बीज का चयन: चूंकि यह किस्म जनवरी 2026 में ही रिलीज हुई है, इसलिए इसका शुद्ध बीज सरकारी संस्थानों या मान्यता प्राप्त चीनी मिलों से ही लें.
लेखक: प्रोफेसर आर एस सेंगर,डॉ शालिनी गुप्ता,गरिमा शर्मा एवं डॉ निधि सिंह
पादप जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग,
सरदार वल्लभभाई पटेल, कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ