आज किसानों के सामने उर्वरकों की बढ़ती कीमतें और मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट प्रमुख चिंताएँ हैं. अधिक उर्वरक डालने से हमेशा अधिक उपज नहीं मिलती; इसके बजाय, इससे लागत बढ़ जाती है और पोषक तत्वों की हानि भी अधिक होती है. स्मार्ट पोषक तत्व प्रबंधन (Smart Nutrient Management - SNM) किसानों को सही पोषक तत्व, सही मात्रा में, सही समय पर और सही तरीके से देने में सहायता करता है, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है, मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है और किसानों का लाभ बढ़ता है.
स्मार्ट पोषक तत्व प्रबंधन की दिशा में पहला कदम मिट्टी परीक्षण के माध्यम से मिट्टी की पोषक स्थिति को समझना है. मिट्टी परीक्षण के परिणामों के आधार पर उर्वरकों का उपयोग फसल की आवश्यकता के अनुसार किया जा सकता है, बजाय इसके कि हर खेत में एक ही निश्चित मात्रा का प्रयोग किया जाए. गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, फसल अवशेष और बायोगैस स्लरी जैसे जैविक स्रोत रासायनिक उर्वरकों के पूरक के रूप में कार्य करते हैं तथा मिट्टी की उर्वरता में सुधार करते हैं.
आधुनिक तकनीकें पोषक तत्व प्रबंधन को अधिक आसान और प्रभावी बना रही हैं. नैनो उर्वरक कम मात्रा में उपयोग करके पोषक तत्वों की आपूर्ति को अधिक कुशल बनाते हैं. ड्रिप फर्टिगेशन के माध्यम से पानी और पोषक तत्व सीधे जड़ क्षेत्र तक पहुँचाए जाते हैं, जिससे हानि कम होती है. IoT-आधारित मिट्टी नमी सेंसर और स्वचालित सिंचाई प्रणालियाँ किसानों को केवल आवश्यकता पड़ने पर ही पानी और पोषक तत्व देने में मदद करती हैं. ड्रोन का उपयोग तरल उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के समान छिड़काव के लिए किया जा सकता है, जिससे श्रम की आवश्यकता कम होती है और समय पर अनुप्रयोग सुनिश्चित होता है. मोबाइल सलाहकार सेवाएँ भी उर्वरकों के उपयोग के लिए स्थान-विशिष्ट सिफारिशें प्रदान करती हैं.
पारंपरिक से स्मार्ट पोषक तत्व प्रबंधन की ओर
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पारंपरिक पद्धति |
स्मार्ट पद्धति |
किसानों को लाभ |
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सभी खेतों में उर्वरकों की एक समान मात्रा का प्रयोग |
मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशें |
उर्वरक लागत में कमी तथा संतुलित पोषण |
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बुवाई के समय पूरा उर्वरक एक साथ देना |
फसल की वृद्धि अवस्था के अनुसार विभाजित मात्रा में उर्वरक देना |
पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण एवं कम हानि |
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मुख्यतः यूरिया एवं डीएपी पर निर्भरता |
संतुलित NPK, सूक्ष्म पोषक तत्व एवं नैनो उर्वरकों का उपयोग |
बेहतर फसल वृद्धि एवं उपज की गुणवत्ता में सुधार |
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निश्चित समय-सारिणी के अनुसार सिंचाई |
सेंसर आधारित सिंचाई एवं फर्टिगेशन |
पानी एवं उर्वरकों की बचत |
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पोषक तत्वों की कमी का पता केवल क्षति दिखाई देने के बाद चलना |
मोबाइल ऐप एवं सेंसर आधारित फसल निगरानी |
समय पर सुधारात्मक उपाय संभव |
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फसल अवशेष एवं पशु अपशिष्टों को फेंक देना |
कम्पोस्टिंग, वर्मी कम्पोस्टिंग एवं पोषक तत्व पुनर्चक्रण |
मिट्टी की उर्वरता एवं कार्बनिक पदार्थ में वृद्धि |
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हाथ से या समान रूप से उर्वरकों का छिड़काव |
मिट्टी परीक्षण के आधार पर फर्टिगेशन एवं कृषि ड्रोन द्वारा सटीक उर्वरक अनुप्रयोग |
श्रम लागत में कमी एवं पोषक तत्वों का समान वितरण |
मुख्य संदेश
स्मार्ट पोषक तत्व प्रबंधन (Smart Nutrient Management) का अर्थ अधिक उर्वरकों का उपयोग करना नहीं है, बल्कि उर्वरकों और जैविक संसाधनों का अधिक समझदारी एवं दक्षता से उपयोग करना है. मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरीकरण, जैविक पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण तथा सही समय पर पोषक तत्वों के प्रयोग को अपनाकर किसान फसल उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं तथा टिकाऊ (सतत) तरीके से अपनी कृषि आय में वृद्धि कर सकते हैं.
लेखकगण: डॉ. संतोष एस. माली, डॉ. रेश्मा शिंदे एवं डॉ. अनुप दास
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना