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Updated on: 11 June, 2026 6:22 PM IST
seed treatment with biofertilizers

जैव उर्वरक ऐसे लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं जो बीज, पौधों अथवा मिट्टी में प्रयोग किए जाने पर पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाकर उनकी वृद्धि एवं विकास में सहायता करते हैं. जैव उर्वरकों द्वारा बीज उपचार एक महत्वपूर्ण एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीक है, जिसमें बुवाई से पूर्व बीजों पर लाभकारी सूक्ष्मजीवों की परत चढ़ाई जाती है. ये सूक्ष्मजीव बीज अंकुरण, पौधों की वृद्धि, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं. यह तकनीक सतत कृषि में व्यापक रूप से अपनाई जाती है क्योंकि इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है तथा मृदा उर्वरता सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से बनी रहती है.

जैव उर्वरकों के रूप में प्रयुक्त सूक्ष्मजीव

  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु: राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम एवं सायनोबैक्टीरिया

  • फॉस्फेट घुलनशीलक जीवाणु

  • पोटाश घुलनशीलक जीवाणु

  • लाभकारी कवक जैसे ट्राइकोडर्मा एवं आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल फफूंद

दलहनी फसलों में राइजोबियम जड़ों पर गांठें बनाकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है और उसे पौधों के लिए उपलब्ध कराता है. एजोटोबैक्टर एवं एजोस्पिरिलम भी नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ पौध वृद्धि को प्रोत्साहित करने वाले पदार्थों का उत्पादन करते हैं. फॉस्फेट सोलूबिलीज़िंग जीवाणु एवं पोटाश सोलूबिलीज़िंग जीवाणु मिट्टी में उपस्थित अघुलनशील फॉस्फोरस एवं पोटाश को घुलनशील रूप में परिवर्तित करके पौधों द्वारा उनके अवशोषण को बढ़ाते हैं. ट्राइकोडर्मा जैव उर्वरकों के साथ साथ एक जैव-नियंत्रक एजेंट के रूप में  भी कार्य करता है तथा पौधों को मृदा जनित रोगजनकों से सुरक्षा प्रदान करता है.

अर्बुस्कुलर माइकोराइज़ल फफूंद, पौधों की जड़ों के साथ एक सहजीवी संबंध बनाती है जो पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है. यह फफूंद मिट्टी में मौजूद फॉस्फोरस और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्वों को पौधों तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाती है.

जैव उर्वरकों के फॉर्मुलेशन के प्रकार

जैव उर्वरक तरल तथा ठोस दोनों रूपों में उपलब्ध होते हैं. सामान्यतः इन्हें शुष्क उत्पादों जैसे चूर्ण, दाने एवं ब्रिकेट्स  तथा तरल निलंबनों जैसे तेल-आधारित, जल-आधारित एवं इमल्शन फॉर्मुलेशन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है.

जैव उर्वरकों के फॉर्मुलेशन द्वारा बीज उपचार लाभकारी सूक्ष्मजीवों को मृदा–पौधा तंत्र में स्थापित करने का एक प्रभावी तरीका है. इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि लाभकारी सूक्ष्मजीव पौधों की जड़ों के आसपास के क्षेत्र में कितनी अच्छी तरह स्थापित, प्रसारित एवं विकसित हो पाते हैं.

जैव उर्वरकों द्वारा बीज उपचार की विधि

•फसल के अनुसार उपयुक्त जैव उर्वरक का चयन करें.
• 100 ग्राम गुड़ अथवा चीनी को 1 लीटर पानी में घोलकर 10% घोल तैयार करें.
• घोल को उबालें तथा उपयोग से पूर्व ठंडा होने दें.
• आवश्यक मात्रा में बीजों को साफ पॉलीथीन शीट अथवा ट्रे पर फैलाएँ.
• ठंडे घोल को बीजों पर छिड़कें और अच्छी तरह मिलाएँ.
• अनुशंसित मात्रा में जैव उर्वरक कल्चर (लगभग 200–250 ग्राम प्रति 10 किलोग्राम बीज) मिलाएँ.
• बीजों को अच्छी तरह मिलाकर सुनिश्चित करें कि सभी बीजों पर जैव उर्वरक की समान परत चढ़ जाए.
• उपचारित बीजों को छाया में 20–30 मिनट तक सुखाएँ.

सावधानियाँ

•केवल ताज़े जैव उर्वरक पैकेट का उपयोग करें तथा प्रयोग से पूर्व उसकी समाप्ति तिथि अवश्य जाँच लें.
• फसल एवं मिट्टी की स्थिति के अनुसार उपयुक्त जैव उर्वरक स्ट्रेन का चयन करें.
• जैव उर्वरकों को विश्वसनीय एवं अधिकृत स्रोतों से ही खरीदें.
• जैव उर्वरकों को ठंडी एवं सूखी जगह पर सीधे सूर्य प्रकाश से दूर रखें. अत्यधिक ताप, नमी अथवा धूप के संपर्क में आए जैव उर्वरकों का उपयोग न करें.
• बीज उपचार से पहले बीजों से धूल, मिट्टी एवं रासायनिक अवशेषों को हटा लें .
• यदि बीजों का फफूंदनाशी या कीटनाशी से उपचार करना हो, तो पहले उनका उपचार करें और सूखने के बाद जैव उर्वरक लगाएँ. जैव उर्वरकों को रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों या फफूंदनाशकों के साथ सीधे न मिलाएँ.
• घोल तैयार करने एवं उपयोग के लिए स्वच्छ पानी तथा बर्तनों का प्रयोग करें.
• आसंजक घोल ताज़ा तैयार करें तथा ठंडा होने के बाद ही जैव उर्वरक मिलाएँ.
• बीज उपचार छायादार स्थान पर करें तथा जैव उर्वरकों को सीधे सूर्य प्रकाश से बचाएँ.
• निर्माता द्वारा अनुशंसित मात्रा एवं विधि का पालन करें.
• बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करें ताकि लाभकारी सूक्ष्मजीव आसानी से स्थापित हो सकें.
• उपचारित बीजों का उपयोग यथाशीघ्र करें.

जैव उर्वरकों के लाभ

•बीज अंकुरण, पौधों की प्रारंभिक वृद्धि तथा जड़ विकास में सहायक होते हैं.
• फसलों में जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण को बढ़ावा देते हैं.
• फॉस्फोरस एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता एवं अवशोषण में वृद्धि करते हैं.
• मृदा उर्वरता एवं मृदा की जैविक सक्रियता को बढ़ाते हैं.
• रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके उत्पादन लागत घटाते हैं.
• पर्यावरणीय संतुलन एवं सतत कृषि को बढ़ावा देते हैं.
• मृदा संरचना एवं कार्बनिक पदार्थों के अपघटन में सुधार करते हैं.
• लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों द्वारा कुछ मृदा जनित रोगों को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं.
• पर्यावरण-अनुकूल एवं प्रदूषण रहित होने के कारण रासायनिक उर्वरकों का बेहतर विकल्प हैं.

लेखकगण : भिषेक कुमार दूबे, सौरभ कुमार एवं मनीषा टम्टा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना

English Summary: seed treatment with biofertilizers benefits method and precautions
Published on: 11 June 2026, 06:26 PM IST

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